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एससी-एसटी का हक मारकर सवर्ण अफसरों को रिटायरमेंट के बाद भी मलाईदार पद दे दिए

प्रदेश में ब्यूरोक्रेट्स के बीच भी जातीय संघर्ष की आहट सुनाई दे रही है। चार दिन पहले सपाक्स संरक्षक हीरालाल...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 02:25 AM IST
प्रदेश में ब्यूरोक्रेट्स के बीच भी जातीय संघर्ष की आहट सुनाई दे रही है। चार दिन पहले सपाक्स संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी ने मंत्रालय में पदस्थ ब्यूरोक्रेटस पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए पत्र लिखा था। इसके जवाब में अब अजाक्स ने भी पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा है कि एससी-एसटी वर्ग के अफसरों का हक मारकर सवर्ण वर्ग के अफसरों को रिटायरमेंट के बाद भी मलाईदार पदों पर संविदा नियुक्ति दी जा रही है। अजाक्स ने सड़क निर्माण से जुड़े विभागों में पदस्थ चार अफसरों की शिकायत चुनाव आयोग और मुख्य सचिव को की है। पत्र में कहा गया है कि इन अफसरों को संविदा पर मुख्य अभियंता जैसे पदों पर कई साल से बरकरार रखा गया है। पत्र में यह आरोप भी लगाया गया है कि यह अफसर जातिगत भेदभाव करते हैं। अजाक्स का यह पत्र चुनाव आयोग के अलावा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्य सचिव बीपी सिंह को भी भेजा गया है।

एससी-एसटी के अफसरों को जानबूझकर नहीं दिया प्रमोशन

अजाक्स की ओर से की गई शिकायत में कहा गया है कि ये चारों अफसर सामान्य वर्ग के हैं। इनके अधीनस्थ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सैकड़ों कर्मचारी कार्यरत है। इन चारों अफसरों को रिटायरमेंट के बाद दोबारा नियुक्ति देकर अजा-जजा वर्ग के योग्य अफसरों को पदोन्नति की पात्रता से जानबूझकर वंचित किया गया है। राज्य शासन के प्रमुख पद पर बैठे कुछ आला अफसर नियुक्ति बढ़ाने की एवज में सालाना 50 लाख रुपए लेते है। पत्र में ये भी लिखा गया है कि अजाक्स कार्यकर्ता की हैसियत से इसे लिखा गया है। अगर नाम लिखा गया तो वह सवर्ण अफसरों की आंखों में चुभेगा। जीवन को खतरा हो जाएगा।

1. लोक निर्माण विभाग से 8 साल पहले मुख्य अभियंता के पद से रिटायर हुए एएस चेंडके को ंएमपीआरडीसी में तकनीकी सलाहकार के पद पर नियुक्ति दे दी गई है। 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर इन्हें समान पद पर आज तक संविदा पर निरंतर रखा जा रहा है।

सपाक्स का आरोप कंसोटिया सामान्य वर्ग के कर्मचारियों के अवकाश मंजूर नहीं करते

सपाक्स के संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी ने लिखा था कि आईएएस इकबाल सिंह बैस और अजाक्स के अध्यक्ष जे एन कंसोटिया के सरंक्षण में अफसरों का गुट जातिवाद फैला रहा है। त्रिवेदी ने सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रभांशु कमल एवं प्रमुख सचिव रश्मि शमी पर भी आरोप लगाए थे कि वे जातिगत भेदभाव के आधार पर कार्रवाई करते है। कंसोटिया सामान्य वर्ग के कर्मचारियों के अवकाश मंजूर नहीं करते है।

शिकायत... अफसर रिटायर हो गए, लेकिन अब भी पद पर डटे हैं

2.मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग और मध्यप्रदेश राज्य सड़क विकास निगम में प्रतिनियुक्ति पर रहे आलोक चतुर्वेदी की सेवाएं एमपीआरडीसी, भोपाल में समाहित की गई। लगभग दो साल पहले रिटायर हुए चतुर्वेदी को उसी दिन से मुख्य अभियंता के पद पर पुन: नियुक्ति दे दी गई।

डिप्लोमेसी... सबके अपने-अपने तर्क


3.एमपीआरडीसी, भोपाल से दो साल पहले रिटायर हो चुके एम के आचार्य को मुख्य अभियंता के पद पर ही वापस नियुक्ति दे दी गई। रिटायरमेंट के बाद भी वे वर्तमान में उसी पद पर कार्यरत हंै।


चुनाव से ठीक पहले प्रदेश के ब्यूरोक्रेट्स में जातीय संघर्ष की आहट

4. शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग से प्रमुख अभियंता के पद पर दो साल पहले रिटायर हुए प्रभाकांत कटारे भी रिटायरमेंट के बाद प्रमुख अभियंता बने हुए हैं। इन्हें भी सरकार ने संविदा नियुक्ति देकर प्रमुख अभियंता के पद से नवाजा है।