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फैसला / सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस को झटका; कमलनाथ और पायलट की याचिकाएं खारिज, दोनों ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट मांगी थी



supreemcourt dissmiss kamlnath and sachin piolet pitition
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supreemcourt dissmiss kamlnath and sachin piolet pitition
  • मध्यप्रदेश में 28 नवंबर और राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान 
  • कमलनाथ का दावा था- मध्यप्रदेश में वोटर लिस्ट में 60 लाख फर्जी मतदाता

Dainik Bhaskar

Oct 16, 2018, 08:28 PM IST

भोपाल. मध्यप्रदेश कांग्रेस को चुनाव से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने वोटर लिस्ट की जानकारी पीडीएफ के बजाय टेक्स्ट फार्मेट में दिए जाने के लिए चुनाव आयोग को आदेश देने की बात कही थी। कांग्रेस ने मध्यप्रदेश की वोटर लिस्ट में 60 लाख डुप्लीकेट वोटर होने का आरोप लगाया था। साथ ही हर एक विधानसभा क्षेत्र में 10 फीसदी वीवीपैट और ईवीएम मशीन की रेंडम जांच करने का आदेश देने को कहा था। 

 

इसी तरह की याचिका राजस्थान कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष सचिन पायलेट की ओर से भी दायर की गई थी जिसे खारिज कर दिया है। इन याचिकाओं पर 8 अक्टूबर को सुनवाई पूरी हो गई थी, इसके बाद कोर्ट ने इस फैसले को सुरक्षित रखा था। कोर्ट का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को वोटिंग होना है और 11 दिसंबर को चुनाव के नतीजे आना है।

कोर्ट ने दोनों याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि दोनों पक्षों को वोटर लिस्ट को लेकर कोई आपत्ति है तो उसे लेकर चुनाव आयोग में जाएं। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस की ओर से अब पीडीएफ फार्म में उपलब्ध  मध्यप्रदेश की 5 करोड़ 3 लाख वोटर लिस्ट का अवलोकन किया जाएगा और इसमें जो भी गलतियां होंगी उसे चुनाव आयोग के सामने रखा जाएगा। हालांकि, चुनाव आयोग ने कोर्ट में कहा था कि फोटोयुक्त मतदाता सूचियों में हेराफेरी रोकने के लिए इसे टेक्स्ट के बजाए पीडीएफ फॉर्मेट में ही जारी किया जा सकता है।

 

वोटर लिस्ट से 35 लाख डुप्लीकेट नाम हटा चुका है आयोग :  कांग्रेस ने जनवरी में जारी की गई वोटर लिस्ट पर आपत्ति जताई थी, जिसमें 60 लाख वोटर डुप्लीकेट होने की बात कही गई थी। इसके बाद आयोग ने 19 जनवरी को प्रकाशित वोटर लिस्ट से 4 लाख नाम हटाए। इसके बाद 31 जुलाई को वोटर लिस्ट का प्रारंभिक ड्राफ्ट प्रकाशित हुआ, जिसमें 24 लाख फर्जी वोटर हटाए गए। 27 सितंबर को वोटर लिस्ट का फाइनल नोटिफिकेशन किया गया, उस दौरान 7 लाख फर्जी वोटर हटाए गए। इस तरह प्रदेश की वोटर लिस्ट से 35 लाख डुप्लीकेट वोटर हटाए जा चुके हैं।

 

फाइनल वोटर लिस्ट में किसी तरह की ऋुटि नहीं है। मतदाता सूची को लेकर पहली बार आयोग के 70 हजार कर्मचारी 96 लाख लोगों के घरों तक पहुंचे। उनमें से प्रत्येक से जानकारी प्राप्त करने के बाद वोटर लिस्ट संशोधित की गई है। -वीएल कांताराव, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश

सुप्रीम कोर्ट ने हमारी याचिका खारिज कर दी है। अब आगे चुनाव आयोग के पास जाएंगे और प्रदेश की 5 करोड़ 3 लाख मतदाताओं वाली सूची का अवलोकन करेंगे, उसमें जो भी गलतियां होंगी, उसे आयोग को बताएंगे। -विवेक तन्खा, अध्यक्ष, कांग्रेस लीगल सेल

 

सुप्रीम कोर्ट के  फैसले में यही कहा गया है कि वोटर लिस्ट की जानकारी पीडीएफ के बजाए टेक्स्ट फार्म में नहीं दी जा सकती। हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। माननीय न्यायालय ने यह भी कहा है कि वोटर लिस्ट को लेकर कोई आपत्ति है तो चुनाव आयोग में जाएं। आगे इस काम में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता लगेंगे और वोटर लिस्ट की गलतियों को चुनाव आयोग के सामने रखा जाएगा।- रणदीप सुरजेवाला, मीडिया प्रभारी, एआईसीसी

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