मध्य प्रदेश / सर्दी, खांसी, गले में दर्द है तो यह स्वाइन फ्लू हो सकता है, डॉक्टर्स की सलाह से ही खाएं दवाएं

Dainik Bhaskar

Mar 14, 2019, 12:17 PM IST


swine flu alert in mp
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  • समय पर इलाज शुरू नहीं होने पर जानलेवा साबित हो रहा है
  • मौत के अधिकांश मामलों में इलाज में देरी ही वजह

भोपाल. अगर आपको खांसी, गले में दर्द, बुखार, सिरदर्द और उल्टी हो रही है तो बिना समय गवाएं स्वाइन फ्लू की जांच करानी चाहिए। केवल डॉक्टर की निगरानी में ही दवाइयां लेनी चाहिए। दरअसल, ये परेशानियां स्वाइन के शुरुआती लक्षण हैं, लेकिन लोग इन्हें सामान्य बीमारी मानकर मेडिकल या फिर झोलाछाप डॉक्टरों से दवाइयां लेते रहते हैं। जब स्थिति गंभीर हो जाती है तब इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। तब तक देर हो चुकी होती है। इस सीजन में स्वाइन फ्लू से जिन मरीजों की मौत हुई है, उनमें अधिकांश का इलाज समय पर शुरू नहीं हो पाना सामने आया।

 

स्वाइन फ्लू के संक्रमण से मरीजों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है। बुधवार को दो और मरीजों की माैत हो गई। मरने वालों में एक राजधानी का और एक होशंगाबाद था। इससे पहले मंगलवार और सोमवार को भी एक-एक मरीज की मौत हुई थी। इसके साथ ही स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या 20 पर पहुंच गई है।

 

जबकि, 130 से ज्यादा मरीज में स्वाइन फ्लू पॉजीटिव पाया गया है। बुधवार को 12 सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। 13 की रिपोर्ट आई, इनमें एक पॉजीटिव और 12 सैंपल निगेटिव मिले हैं। 37 सैंपल की जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है।


सरकारी से पांच गुना ज्यादा मरीज प्राइवेट अस्पताल में :  स्वाइन फ्लू के मरीज सरकारी अस्पतालों के बजाय प्राइवेट अस्पतालों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। अभी राजधानी में स्वाइन फ्लू के चिह्नित और संदिग्ध 37 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इनमें से महज छह मरीज सरकारी अस्पतालों में हमीदिया और एम्स में भर्ती हैं। जबकि, 31 मरीज अपना इलाज प्राइवेट अस्पताल में करा रहे हैं।

 

सुआब की जांच रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने के बाद 13 मरीज राजधानी में अपना इलाज करा रहे हैं। इनमें से सिर्फ तीन मरीज सरकारी अस्पताल में और 10 मरीज अलग-अलग प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती हैं। इसी प्रकार राजधानी में स्वाइन फ्लू के 24 संदिग्ध मरीजों का भी इलाज किया जा रहा है। इनमें से महज तीन मरीज ही सरकारी अस्पतालों में भर्ती हैं। जबकि, 21 मरीजों ने प्राइवेट अस्पताल में जाना ही बेहतर समझा।
  
युवाओं में भी स्वाइन फ्लू का खतरा:  स्वाइन फ्लू के संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा पांच साल से कम 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को अधिक प्रभावित करता है। लेकिन, इस बार राजधानी में स्वाइन फ्लू का संक्रमण युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। यही वजह है कि 15 से 45 साल उम्र क 36 मरीजों में स्वाइन फ्लू पॉजीटिव पाया गया।

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