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मप्र / 6वीं की तनिष्का देना चाहती थी 10वीं की परीक्षा; बोर्ड ने रोका तो राज्यपाल से लगाई गुहार, अब फर्स्ट डिवीजन पास

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 05:22 PM IST



तनिष्का को राज्यपाल से मंजूरी मिली तो उन्हें आईक्यू टेस्ट भी देना पड़ा। तनिष्का को राज्यपाल से मंजूरी मिली तो उन्हें आईक्यू टेस्ट भी देना पड़ा।
प्रतिभावान तनिष्का सातवीं की छात्रा हैं। प्रतिभावान तनिष्का सातवीं की छात्रा हैं।
एक साल की भागमभाग के बाद इस साल उन्हें परीक्षा देने की मंजूरी दी। एक साल की भागमभाग के बाद इस साल उन्हें परीक्षा देने की मंजूरी दी।
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तनिष्का को राज्यपाल से मंजूरी मिली तो उन्हें आईक्यू टेस्ट भी देना पड़ा।तनिष्का को राज्यपाल से मंजूरी मिली तो उन्हें आईक्यू टेस्ट भी देना पड़ा।
प्रतिभावान तनिष्का सातवीं की छात्रा हैं।प्रतिभावान तनिष्का सातवीं की छात्रा हैं।
एक साल की भागमभाग के बाद इस साल उन्हें परीक्षा देने की मंजूरी दी।एक साल की भागमभाग के बाद इस साल उन्हें परीक्षा देने की मंजूरी दी।

  • माध्यमिक शिक्षा मंडल ने नियमों का हवाला देकर तनिष्का को 2017 में परीक्षा देने से रोका था 
  • एक साल में राज्यपाल ने परीक्षा की मंजूरी दी तो फॉर्म भरने की तारीख निकली, आईक्यू टेस्ट से मिली परीक्षा की अनुमति 
  • बुधवार को आए बोर्ड रिजल्ट में तनिष्का ने 500 में से 327 अंक लाकर फर्स्ट डिवीजन पास हुईं 

भोपाल. 12 साल की तनिष्का ने 10वीं की परीक्षा फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं। पिता सुजीत चंद्रन और मां अनुभा को बेटी के हाईस्कूल पास होने का इंतजार डेढ़ साल से ज्यादा करना पड़ा। 

 

दरअसल पिछले शिक्षा सत्र में दसवीं की परीक्षा में बैठने की मंजूरी के आवेदन को माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कोई नियम नहीं होने की वजह से बैरंग लौटना पड़ा था। राज्यपाल से गुहार लगाने पर मंजूरी मिल गई, आईक्यू टेस्ट हुआ, लेकिन तब तक फॉर्म भरने की तारीख निकल चुकी थी। फिर भी तनिष्का को परीक्षा में बैठने का मौका मिल गया। बुधवार को बोर्ड के रिजल्ट आए तो तनिष्का ने 500 में से 327 नंबर पाकर फर्स्ट डिवीजन में पास हुई हैं। 


सामाजिक विज्ञान में 79 अंक मिले
तनिष्का इंदौर के निजी स्कूल में सातवीं की छात्रा है। हाईस्कूल परीक्षा के लिए उसने इस सत्र में प्राइवेट फॉर्म भरा था। उसकी जन्म तारीख 20 जुलाई 2007 है। उसे सामाजिक विज्ञान में 79 अंक के साथ डिस्टिंक्शन मिला है। इंग्लिश में 71, हिन्दी में 60, संस्कृत में 61, गणित में 56 और विज्ञान में 39 अंक मिले है। मां अनुभा के मुताबिक, "शिक्षा मंडल के अफसरों ने राज्यपाल की मंजूरी के बाद भी समय लगा दिया। उसका आईक्यू टेस्ट हुआ था। तनिष्का 10 साल की उम्र में ही दसवीं पास कर सकती थी। बुधवार को परिणाम आने के बाद हमें बेहद खुशी मिली है।"

 

डेढ़ साल तक चक्कर काटते रहे
इंदौर के निजी स्कूल में पड़ने वाली तनिष्का सुजीत प्रतिभाशाली है। उसकी मां अनुभा सुजीत ने वर्ष 2017 में जिला शिक्षा अधिकारी को आवेदन दिया था। वह तब छठी कक्षा में थी। मंडल ने नियम नहीं होने और राज्यपाल का विशेषाधिकार होने का कहकर प्रस्ताव ठुकरा दिया था।

 

राज्यपाल से मंजूरी, फाइलें घूमती रही
शिक्षा विभाग के इंकार के बाद तनिष्का और माता-पिता राजभवन पहुंचे थे। राजभवन से 19 दिसंबर 2017 को परीक्षा में बैठने की मंजूरी मिल गई थी। बावजूद इसके मंत्रालय में फाइलें घूमती रहने से वर्ष 2018 के सत्र में वह परीक्षा नहीं दे पाई थी।  फॉर्म भरने की तारीख निकलने की वजह से तनिष्का इस सत्र में परीक्षा दे पाई है।   

 

दूसरे राज्यों में नियम साफ 
दिल्ली, उत्तरप्रदेश, पंजाब, राजस्थान जैसे राज्यों में कम उम्र के होनहार बच्चों को हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा में बैठने की मंजूरी देने नियम बने हुए है। प्रदेश में अब तक ऐसा कोई नियम नहीं था, जिसकी वजह से कोई बच्चा परीक्षा दे सकता है।

 

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