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लापरवाही / संरक्षित करने की बजाय ढहा दिया 150 साल पुराना बाग फरहत अफ्जा का गेट



भोपाल के 150 साल पुराने बाग फरहत अफ्जा के गेट को ढहा दिया गया। भोपाल के 150 साल पुराने बाग फरहत अफ्जा के गेट को ढहा दिया गया।
इस एेतिहासिक गेट को किसके आदेश से गिराया गया, ये कोई बताने को तैयार नहीं है। इस एेतिहासिक गेट को किसके आदेश से गिराया गया, ये कोई बताने को तैयार नहीं है।
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भोपाल के 150 साल पुराने बाग फरहत अफ्जा के गेट को ढहा दिया गया।भोपाल के 150 साल पुराने बाग फरहत अफ्जा के गेट को ढहा दिया गया।
इस एेतिहासिक गेट को किसके आदेश से गिराया गया, ये कोई बताने को तैयार नहीं है।इस एेतिहासिक गेट को किसके आदेश से गिराया गया, ये कोई बताने को तैयार नहीं है।
  • भोपाल में जर्जर हो रहे पुरातत्विक धरोहरों को संरक्षित करने के बजाय बुलडोजर चला रहे हैं 
  • नवाबों के समय का ऐतिहासिक जुमेराती गेट भी संरक्षण के अभाव में गिर रहा है 

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 01:27 PM IST

भोपाल. शहर में नवाबी काल की ऐतिहासिक इमारतों को नगर निगम खत्म करने पर आमादा है। जर्जर हो रहे पुरातत्विक धरोहरों को संरक्षित करने के बजाय तोड़ा जा रहा है। गत शनिवार को 150 साल पुराना बाग फरहत अफ्जा गेट को निगम अमले तोड़ दिया। रविवार को मलबा हटाने का काम किया गया। शहर में नवाबी रियासत के 15 दरवाजों में से अब 14 ही बचे हैं। निगम अधिकारियों का तर्क है कि इंजीनियरों से स्ट्रक्चर की जांच कराई गई थी, जिसमें पाया गया कि इसका संरक्षण नहीं किया जा सकता। सुरक्षा को देखते हुए इसको हटाया गया है। 

 

धरोहरों के संरक्षण में रुचि नहीं ले रहा एएसआई 

  1. 9 अगस्त को गिरा था जर्जर हिस्सा

    बता दें कि गत 9 अगस्त को गेट का जर्जर हिस्सा गिरा था, मौके पर पहुंचे निगम के अधिकारियों ने बैरिकेड्स लगाकर रास्ता बंद कर दिया था। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने भी निरीक्षण कर इसकी जांच के निर्देश दिए थे। उन्होंने इंजीनियरों से कहा था कि यदि इसका संरक्षण किया जा सकता है तो संरक्षित करें अन्यथा तोड़ दें। निगम ने एक महीने बाद तोड़ दिया।

  2. औपचारिक आदेश के बगैर तोड़ दिया गेट

    दो दिन पहले धराशाई हुए ऐतिहासिक बाग फरहत अफ्जा गेट के मामले में यह अब भी रहस्य बना हुआ है कि गेट तोड़ने के आदेश किसने दिए थे? तीन दिन तक चली इस कार्रवाई के दौरान नगर निगम और जिला प्रशासन के अफसर मौजूद थे। गेट तोड़ने के लिए निगम के अमले और संसाधनों का उपयोग किया गया, लेकिन इतनी बड़ी कार्रवाई के लिए किसी भी स्तर पर कोई औपचारिक आदेश नहीं हुआ। 

  3. निगम के पास संरक्षण की योजना नहीं

    बता दें कि इससे पहले शौकत महल का जर्जर हिस्सा तोड़ा जा चुका है। सिर्फ सदर मंजिल का संरक्षण चल रहा है, यह काम भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड (बीएससीडीसीएल) कर रहा है। बाकी इमारतों और गेट को संरक्षित करने की दिशा में निगम के पास कोई योजना नहीं है। जबकि, महापौर आलोक शर्मा अपने भाषणों में हमेशा हेरिटेज को बचाने की बात करते हैं।

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