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बेटे का जिक्र आते ही टूट गया सीरियल किलर, फिर उगले 30 कत्लों के राज

अब तक 30 मर्डर का खुलासा ट्रक ड्राइवरों और क्लीनर्स की हत्या का सनसनीखेज मामला अादेश बोला-परिवार को कभी...

Danik Bhaskar | Sep 10, 2018, 03:21 AM IST
अब तक 30 मर्डर का खुलासा

ट्रक ड्राइवरों और क्लीनर्स की हत्या का सनसनीखेज मामला

अादेश बोला-परिवार को कभी जुर्म की दुनिया के बारे में नहीं बताया

क्राइम रिपोर्टर | भोपाल

सीरियल किलर आदेश खामरा के जुर्म सामने आने के बाद भोपाल पुलिस उसे कोल्ड ब्लडेड क्रिमिनल मानने लगी है। 30 कत्ल कबूल कर चुका आदेश शुरू में पुलिस के सामने रौब ही दिखाता रहा। पुलिस ने जब उसके बेटे के बारे में पूछताछ शुरू की तो वह अपने राज खोलता चला गया। वह बेटे को और परिवार को बेहद चाहता है। कहता है कि मैंने कभी उनसे अपने जुर्म के बारे में जिक्र तक नहीं किया। मूलत: पाकिस्तान के सिंध प्रांत का रहने वाले आदेश का पूर्वज काफी समय पहले मंडीदीप में आकर बस गए थे।

आदेश का पार्टनर जयकरण ट्रक ड्राइवर-कंडक्टर को कभी पार्टी देने के नाम पर तो कभी उनके ट्रक में अपना मोबाइल फोन चार्ज करने के बहाने फंसाता था। पुलिस के हाथ ग्वालियर और झांसी के ऐसे ही गिरोह के कुछ सुराग हाथ लगे हैं। आदेश भी बातचीत में इतना माहिर है कि किसी को भी अपने झांसे में ले सकता है। वर्ष 2007 में झांसी के गैंग ने उसे वही काम दिया था, जो इन दिनों जयकरण उसके लिए करता था यानी ट्रक ड्राइवर-क्लीनर को फंसाने का। एसपी साउथ राहुल लोढा के मुताबिक आदेश हर वारदात के बाद गुनाह में की गई गलतियों को कम करता चला गया। पहले-दूसरे मर्डर में उसने ड्राइवर-क्लीनर का कत्ल करने के बाद कपड़े समेत उन्हें फेंक दिया था। बाद में उसे लगा कि पुलिस कपड़ों पर लगे टेलर के मोनो को देखकर शव की पहचान कर सकती है और आगे की लिंक उसे भी पकड़वा सकती है। इसलिए उसने हत्या के बाद शव के कपड़े उतारकर उन्हें बहते पानी में फेंकना शुरू कर दिया। ताकि मछलियां शव को पहचानने लायक ही न छोड़ें।

हाईवे पर ट्रक चोरी कर ड्राइवर और क्लीनर्स की हत्या करने के सनसनीखेज मामले में गिरफ्तार आदेश खामरा ने पहले तो मुंह नहीं खोला लेकिन पुलिस ने जब उसके बेटे को भी केस में आरोपी बनाने की बात कही तो वह टूट गया।

कोडवर्ड में बात ताकि किसी को भनक न लगे

कई राज्यों में फैली हर गैंग के सदस्य आपस में कोडवर्ड में ही बात करते थे। जयकरण का काम ट्रक ड्राइवर-क्लीनर को अपनी बातों में फंसाना रहता था। जयकरण फोन कर आदेश से कहता था कि भाई साहब, कुछ मीठा तो खिला दो। इसका मतलब होता था कि ट्रक ड्राइवर-कंडक्टर उसके झांसे में आ चुके हैं, आप आओ और नशीली दवा खिलाकर उन्हें बेहोश कर दो। ग्वालियर की गैंग का काम ट्रक का माल बिकवाना रहता था। इस गैंग को जैसे ही पता चलता था कि आदेश-जयकरण ने कोई ट्रक लूट लिया है तो वे फोन कर कहते थे कि कचरा रास्ते में फेंकते हुए आना। यानी ड्राइवर-कंडक्टर के शव रास्ते में फेंकते हुए ही आना।

ऐसा क्यों किया

ज्यादा पैसा कमाने के फेर में बन गया सीरियल किलर

अपराध शुरू करने से पहले तक आदेश टेलरिंग ही करता था। इसमें इतनी इनकम नहीं होती थी कि परिवार का खर्च अच्छे से चल सके। आपराधिक प्रवृत्ति के दोस्तों के संपर्क में आकर आदेश ने पहला ट्रक वर्ष 2007 में मिसरोद स्थित 11 मील से लूटा था। इसमें किसी को मारा नहीं। पहली हत्या उसने वर्ष 2008 में सिवनी से लूटे गए ट्रक के ड्राइवर-क्लीनर की की थी। इन मामलों में उसे ईजी मनी मिलती रही, इसलिए वह लगातार बेकसूरों का कत्ल करता चला गया।

आगे क्या.... पूरे मप्र से केस डायरी बुलवा रही पुलिस

आईजी जयदीप प्रसाद ने बताया कि मप्र के थानों में इस मामले से जुड़े केस का इन्वेस्टिगेशन साथ मिलकर किया जाएगा। अलग-अलग थानों में दर्ज मर्ग, लूट, चोरी, अमानत में खयानत या मर्डर के केस का इन्वेस्टिगेशन भोपाल से भी किया जा सकता है। फिलहाल प्रदेश की थाना पुलिस को यहां बुलवाया जा रहा है। दूसरे राज्यों के मामलों के इन्वेस्टिगेशन में भी भोपाल पुलिस मदद करेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि भोपाल पुलिस के पास इस मामले की लीड है।

पांच करोड़ से ज्यादा की चोरी

पुलिस फिलहाल अंदाजा लगा रही है कि आदेश और जयकरण ने मिलकर पांच करोड़ से ज्यादा की वारदात की होगी। इस गैंग ने केवल 12 या 14 चक्का ट्रकों को ही निशाना बनाया, जिनकी कीमत 15 लाख रुपए से ज्यादा की रहती है। इनमें से कुछ ट्रकों को माल समेत लूटा गया। यानी 15 से ज्यादा मामलों में लूटी गई रकम की कीमत पांच करोड़ होगी।

यह खामी भी

व्यापारियों ने ले लिया इंश्योरेंस क्लेम इसलिए नहीं खुले अपराध

पुलिस की इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि आदेश और जयकरण द्वारा लूटे गए ट्रक तो कभी नहीं मिले। लेकिन इन ट्रक के चोरी या लूटे जाने की रिपोर्ट में खात्मा लगवाकर मालिकों ने इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम ले लिया। एक शहर से लूटे गए ट्रक के ड्राइवर-क्लीनर की लाश दूसरे शहर में मिलती थी, जो वहां की पुलिस के लिए अज्ञात होती थी। दोनों जिलों की पुलिस ऐसे मामलों की इन्वेस्टिगेशन को हल्के में लेती थी, इसलिए ऐसे मामलों का बड़ा खुलासा इससे पहले नहीं हो सका था।