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इंग्लैंड दौरे में गलतियां तो हुई हैं, तभी सीरीज हारे, बदलाव होना चाहिए, मैं इसका पक्षधर: श्रीकांत

इंग्लैंड दौरे में टीम इंडिया से गलतियां तो हुई हैं, इसीलिए सीरीज हारे हैं और हां यह पहला मौका नहीं है जब हमें विदेश...

Danik Bhaskar

Sep 12, 2018, 02:11 AM IST
इंग्लैंड दौरे में टीम इंडिया से गलतियां तो हुई हैं, इसीलिए सीरीज हारे हैं और हां यह पहला मौका नहीं है जब हमें विदेश में हार का सामना करना पड़ा है। ऐसा लंबे समय से होता आ रहा है। मैं शुरू ही से बदलाव का पक्षधर रहा हूं। बदलाव होने चाहिए, लेकिन बहुत से खिलाड़ी अभी टेस्टिंग दौर से गुजर रहे हैं। उनका ख्याल रखना चाहिए। यह कहना है 1983 की विश्व विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनर रहे कृष्णामाचारी श्रीकांत का। वे मंगलवार को एक एजुकेशनल कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भोपाल आए थे।

सीरीज भले ही हारे पर विराट का प्रदर्शन काबिले तारीफ

वर्तमान इंग्लैंड सीरीज पर उन्होंने विराट की खुलकर तारीफ की। कहा- विराट सेना भले ही सीरीज हार गई हो, लेकिन खुद विराट का प्रदर्शन लाजवाब रहा। पांच मैचों में 593 रन बनाना बड़ी उपलब्धि है। इसमें भी दो शतक और तीन अर्धशतक। सभी को पता है कि इंग्लैंड में गेंद कितना हिलती है। सीरीज में दूसरे नंबर के बल्लेबाज के रन विराट से आधे हैं। तो अंदाजा लगा लीजिए। हां, मैं टीम में बदलाव का हमेशा से पक्षधर रहा हूं। पर युवाओं को दोष नहीं दिया जा सकता। यह सभी टेस्टिंग दौर से गुजर रहे हैं। इसमें केएल राहुल जैसे प्लेयर भी शामिल हैं। करुण नायर पर हनुमा विहारी को तरजीह देने के मामले में वह इतना ही बोले यह टीम प्रबंधन का फैसला है। पर इतना जरूर कहना चाहूंगा कि करुण काफी प्रतिभाशाली हैं। फिर हनुमा विहारी का प्रदर्शन भी पहले टेस्ट के हिसाब से कहां खराब था।

शास्त्री पर कुछ नहीं बोले

कॅरियर के दौरान टीम साथी रहे और वर्तमान में भारतीय टीम के कोच रवि शास्त्री पर श्रीकांत कुछ नहीं बोले। उनसे संबंधित सवाल को वह हर बार टालते चले गए। उनसे पूछा गया कि क्या कोच के प्रदर्शन और व्यवहार से आप पूरी तरह से संतुष्ट हैं? इस पर भी वह कुछ नहीं बोले। उल्लेखनीय है कि रवि शास्त्री पर इलेवन चुनने को लेकर मनमानी करने की बात कई बार सामने आ चुकी है।

कपिल जैसा आत्मविश्वास होना चाहिए हर एक कप्तान में

उन्होंने लीडरशिप का उदाहरण देते हुए कहा कि आत्म विश्वास मैंने कपिलदेव में देखा था। बात 1983 वर्ल्ड कप की है। हमें पता था सामने क्लाइव लायड के कप्तानी वाली वेस्टइंडीज टीम और उससे उस समय उससे पार पाना सपना सच होने जैसा था। इसलिए मैंने तो न्यूयार्क में छुट्टी बिताने के लिए टिकट तक बुक करा लिया था। लेकिन कप्तान कपिल देव यह मानने काे तैयार नहीं थे। वह हर मीटिंग में यही कहते रहे कि हम जीतेंगे ही। वो जब यह कहते थे तो हम हंसते थे, लेकिन उनके आत्म विश्वास को सलाम। कप्तान को वाकई ऐसा ही आत्मविश्वासी होना चाहिए। उसी विश्वास का परिणाम था कि हम चैंपियन बने।

जुनून के साथ खेलकर ही सफल बने हैं धाेनी और विराट @ pg 20

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