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गुलाब की 638 प्रजातियों के 6 हजार पौधे थे, अब आधे भी नहीं बचे

आनंद सक्सेना। भोपाल. प्रदेश का सबसे बड़ा गुलाब उद्यान। कभी इसमें 638 प्रजातियों के 6 हजार पौधों हुआ करते थे, जो अब आधे...

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2018, 03:20 AM IST
Bhopal - गुलाब की 638 प्रजातियों के 6 हजार पौधे थे, अब आधे भी नहीं बचे
आनंद सक्सेना। भोपाल. प्रदेश का सबसे बड़ा गुलाब उद्यान। कभी इसमें 638 प्रजातियों के 6 हजार पौधों हुआ करते थे, जो अब आधे भी नहीं बचे। देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू की 100वीं जयंती पर 1990 में भेल की भोपाल यूनिट ने इस गुलाब उद्यान को विकसित किया था। इस उद्यान की खासियत यह भी है कि यहां बेंगलुरू, लखनऊ, जम्मू-कश्मीर से गुलाब की विभिन्न प्रजातियां लाकर लगाई गई थीं। जिसमें सबसे विशेष था वायमाला गुलाब। इसे कश्मीर से यहां लाया गया था, लेकिन अब ये प्रजाति उद्यान से गायब हो चुकी है। उद्यान के प्रति भेल प्रबंधन की उदासीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने चार साल पहले इस पार्क की देखरेख का जिम्मा उस विभाग (सिविल विभाग) को सौंप दिया, जिसे बागवानी का कोई अनुभव ही नहीं है।

रोज एग्जीबिशन... 24 साल जीता पहला पुरस्कार

भेल का जवाहर गुलाब उद्यान 24 साल (1990 से 2014 तक) लगातार ऑल इंडिया रोज एग्जीबिशन में पहला पुरस्कार जीतता रहा है। 4 साल पहले उद्यान अधिकारी को हटाकर इसे भेल के सिविल विभाग को सौंप दिया गया। विभाग के सुपरवाइजरों को उद्यान का कोई ज्ञान न होने से यहां लगीं गुलाब की कई प्रजातियां धीरे-धीरे खत्म हो गईं। अब यहां गुलाब के करीब 3 हजार पौधे ही बचे हैं। इनमें भी लोकल प्रजातियों के ही गुलाब के पौधे लगे हुए हैं।

उद्यान से गुलाबों की खूबसूरती ही गायब हो गई है

ऑल इंडिया रोज सोसायटी के प्रेसिडेंट एसएस गद्रे कहते हैं कि प्रदेश में किसी भी गुलाब उद्यान के लिए समय और मौसम का सबसे बड़ा महत्व होता है। इसके साथ ही गुलाब के पौधों के साथ मौसमी पौधे लगाना भी जरूरी होता है, जिससे खूबसूरती बनी रहती है। इन बातों को आजकल जवाहर गुलाब उद्यान में नजरअंदाज किया जा रहा है। वहीं भेल के एजीएम राघवेंद्र शुक्ला कहते हैं कि आज भी उद्यान में गुलाब के फूल खिलते हैं। यह बात अलग है कि गुलाब की कुछ प्रजातियां कम जरूर हुई हैं। उद्यान पर ध्यान देने के लिए निर्देंश दिए हैं।

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