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हीटर-एसी का उपयोग करने वालों को भी Rs.200 का बिल सरल योजना का लाभ लेने वाले आधे उपभोक्ता फर्जी

200 रुपए मासिक बिजली बिल वाली सरल योजना में श्रमिक उपभोक्ताओं को शामिल करने से पहले बिजली कंपनी के अधिकारियों ने कोई...

Danik Bhaskar | Sep 10, 2018, 03:20 AM IST
200 रुपए मासिक बिजली बिल वाली सरल योजना में श्रमिक उपभोक्ताओं को शामिल करने से पहले बिजली कंपनी के अधिकारियों ने कोई सर्वे नहीं किया। नतीजा हीटर, एसी और अन्य महंगे बिजली उपकरण उपयोग करने और एक किलोवाॅट से अधिक खपत वाले उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिल गया। राजधानी में करीब 75 हजार उपभोक्ताओं को योजना का लाभ दिया गया है, इसमें से आधे ऐसे हैं जिनकी खपत एक किलोवाॅट से अधिक है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के क्षेत्र में एक किलोवाॅट या उससे कम खपत वाले उपभोक्ताओं की संख्या 7.63 लाख है, जबकि योजना का लाभ 15 लाख उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। इससे बिजली कंपनी का घाटा बढ़ेगा और अगले साल के टैरिफ में इसका भार आम लोगों को झेलना पड़ेगा।

कंपनी के अफसरों ने केवल श्रमिक कार्ड देख कर उपभोक्ताओं को दो सौ रुपए मासिक बिजली बिल वाली सरल बिल योजना का लाभ दे दिया। जबकि इस योजना में केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को शामिल किया जाना है जिनके घर में पंखा और टीवी के अलावा कोई और उपकरण नहीं है। या कुल लोड एक किलोवाॅट से अधिक ना हो। इस योजना के लिए जारी किए गए सर्कुलर खास तौर से लिखा है कि हीटर और एयर कंडीशनर का उपयोग करने वाले उपभोक्ता इसमें शामिल नहीं होंगे।

बिजली बिल माफी की संबल योजना के दो भाग हैं

सरल बिल योजना- इस योजना में श्रमिक कार्ड और कर्मकार मंडल कार्ड धारी ऐसे उपभोक्ता जिनकी खपत एक किलोवाट है और जो बल्ब, पंखा और टीवी का उपयोग करते हैं। हीटर और एयर कंडीशनर का उपयोग कतई नहीं करते, उन्हें हर माह 200 रुपए बिजली बिल दिया जाएगा।

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अनदेखी... न निगम ने की जांच, न बिजली कंपनी ने निगम ने वार्डों में शिविर लगा कर श्रमिक कार्ड बनाए। इन कार्ड को आधार बना कर कंपनी ने एक फार्म भरवाया और सरल बिल योजना का लाभ दे दिया। दोनों ही स्तर पर जांच नहीं हुई। टारगेट पूरा करने निगम के अफसरों ने कार्ड बनाए और बाद में इन कार्डों को आधार बनाकर बिजली कंपनी ने योजना का लाभ दे दिया।


यह होना था... आवेदन के साथ लेनी थी रिपोर्ट योजना का लाभ देने के लिए आवेदन के साथ इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजर की रिपोर्ट ली जाना थी। इस टेस्ट रिपोर्ट में वह सुपरवाइजर उपभोक्ता का लोड, खपत और घर में उपयोग हो रहे उपकरणों की जानकारी होती। इसके बाद बिजली कंपनी के इंजीनियरों को मौके पर इसकी जांच करना चाहिए थी।

समाधान योजना- इस योजना में बीपीएल कार्डधारी उपभोक्ताओं के जून 2018 तक के सभी बिल माफ कर दिए गए हैं। जुलाई और इसके बाद इन उपभोक्ताओं को पहले से तय टैरिफ के अनुसार ही बिल दिए जाएंगे। बीपीएल कार्डधारी श्रमिकों को 200 रुपए बिजली बिल का लाभ मिलेगा।

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कुछ भी हो जेब तो ईमानदार उपभोक्ताओं की ही कटनी है

समाधान योजना में थोक में बिजली बिल माफ हुए हैं और सरल योजना में श्रमिक कार्डधारकों को 200 रुपए बिजली बिल दिया जा रहा है। दोनों योजनाओं में बिजली कंपनियों को होने वाले घाटे की पूर्ति सरकार सब्सिडी से करेगी। राज्य सरकार ने यह वादा किया है कि कंपनियों को राशि का भुगतान करेगी। यदि सरकार यह राशि देती है तो ईमानदार टैक्सपेयर को किसी अन्य मद में टैक्स बढ़ेंगे और यदि सरकार सब्सिडी देने में विफल हो जाती है तो बिजली टैरिफ बढ़ेगा। गौतम कोठारी, राज्य सचिव, इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूमर सोसायटी

केंद्र का प्रस्ताव

तीन साल बाद केवल प्री पेड मीटर से सप्लाई हो बिजली

केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने बिजली चोरी रोकने के लिए कुछ कड़े कदम उठाने का प्रस्ताव दिया है। इसमें तीन साल के भीतर केवल प्री पेड मीटर से ही बिजली सप्लाई करने के साथ चोरी पकड़े जाने पर भारी भरकम जुर्माना लगाने जैसे सुझाव शामिल हैं। इसके लिए 15 साल पहले बने विद्युत अधिनियम-2003 में बदलाव करना होंगे।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों के अनुसार चोरी पकड़ी जाने पर छोटे दुकानदारों से 30 हजार रुपए प्रति किलोवाॅट और फैक्ट्री में 50 हजार रुपए प्रति किवा जुर्माना लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। अभी मप्र में मौजूदा टैरिफ से तीन गुना जुर्माना लिया जाता है। इसके अलावा बिजली बिल जमा न करने की प्रवृत्ति पर रोक के लिए केवल प्री पेड मीटर से ही बिजली सप्लाई का प्रस्ताव भी दिया गया है। ऐसी स्थिति में मोबाइल फोन की तरह बिजली मीटर को भी रिचार्ज कराना जरूरी हो जाएगा। यदि बिजली कंपनी अघोषित बिजली कटौती करे या किसी तकनीकी वजह से लंबे समय तक बिजली सप्लाई न हो तो बिजली कंपनियों पर भी जुर्माना लगाया जाएगा।