शिकार मामला / बाघ मरा हुआ था, सुना था- पंजा रखने से धन वर्षा होती है, इसलिए काट लिए

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 05:12 AM IST



Tiger hunter police custody
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  • रातापानी सेंचुरी में बाघ की मौत के बाद 3 आरोपी पकड़ाए

भोपाल . रातापानी सेंचुरी के बिनेका रेंज के लुलका गांव के पास हुए बाघ के शिकार मामले में शुक्रवार को तीन आरोपियों को पकड़ लिया गया। तीनों आरोपियों को राज्यस्तरीय और क्षेत्रीय एसटीएफ वाइल्ड लाइफ ने डॉग मैना की मदद से 48 घंटे में पकड़ा।

 

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बाघ के पंजे घर में रखने से धन की वर्षा होती है, इसलिए उन्होंने पंजे काटे। टीम ने बाघ के पंजे और कुल्हाड़ी बरामद कर ली है। पकड़े गए तीनों आरोपी लुलका गांव के चरवाहे हैं। उनका कहना है कि बाघ को उन्होंने नहीं मारा है, केवल मरे हुए बाघ के पंजे काटे हैं।  इस खुलासे के बाद बाघ की मौत का रहस्य गहरा गया है। आखिर उसकी मौत कैसे हुई। 


अौबेदुल्लागंज डीएफओ ने बताया कि रातापानी सेंचुरी में हुए बाघ के शिकार में पंजे काटने वाले मुख्य आरोपी हरचंद्र, पिता भूरेलाल ने पूछताछ में बताया कि 28 नवंबर को वह जंगल में गाय चराने गया था। वहां पर एक बाघ को पड़ा देखकर वह पहले घबरा गया। बाघ हिल-डुल नहीं रहा था, पहले सोचा कि वह सो रहा है, इसलिए वह घर लौट गया।

 

उसने अपने गांव वालों से जंगल में बाघ होने की बात कही। अगले दिन वह फिर जंगल गया जहां पास जाकर देखा बाघ मर गया था। उसने बाघ के पंजे काटने के योजना बनाई थी। उसने 1 दिसंबर को बाघ के दो पंजे काटे और छिपा दिए।

 

 बाघ की मौत 28 नवंबर को, विभाग को सूचना मिली 4 दिसंबर को : आरोपियों से पूछताछ में कई बातों का खुलासा हुआ, जिसमें पता चला कि बाघ की मौत 28-29 नवंबर को हुई थी। हरचंद्र ने दो दिन बाघ पर नजर रखी जब उसे लगा बाघ जिंदा नहीं है तो उसके दो दिन बाद 1 तारीख को उसने पंजे काटे। वन विभाग को 4 तारीख को पता चला कि बाघ की मौत हो गई है।

 

बाघ की मौत पर उठे सवाल : बाघ का शिकार आरोपियों ने नहीं किया तो उसकी मौत कैसे हुई है? यह सवाल खड़ा हो गया है।  पोस्टमार्टम में उसके शरीर पर गोली या डंडे के कोई निशान नहीं मिले हैं। उसका अमाशय खाली मिला था। उसने कुछ खाया नहीं तो उसकी मौत कैसे हुई है। हालांकि सीसीएफ एसपी तिवारी का कहना है कि पोस्टमार्टम और बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। बाघ की मौत के कारणों की जांच की जा रही है।

 

सर्चिंग में पकड़े गए दाे अन्य शिकारी : बाघ के पंजे काटे जाने के बाद इलाके में आरोपियों की तलाश कर रही एसटीएफ और डाॅग स्क्वाॅयड को दो शिकारी भी हाथ लगे हैं, जिसमें आरोपी मानसिंह पिता लचकीराम और प्रह्लाद पिता मुन्नालाल के घर से मोर के पंजे और सुअर का मांस बरामद किया।

 

इंदौर की डॉग मैना ने ढूंढ़ निकाले आरोपी : एसटीएफ वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों ने बताया कि बाघ का पंजा काटने के बाद इंदौर की डाॅग स्क्वाॅयड मैना ने आरोपियों का सुराग दे दिया था। इसके बाद सर्चिंग की गई तो आरोपी पकड़ में आए।

 

पुलिस के डर से जंगल में छिपा दिए थे पंजे : आरोपी हरचंद्र ने पूछताछ में  बताया कि बुजुर्गों से बचपन से सुनता आ रहा था कि बाघ का पैर गोबर पर पड़ जाए, तो उसे सुखा कर घर में रखने से धन की वर्षा होती है। उसे लगा कि सीधे बाघ का पंजा ही घर में रख लेते है, इसलिए उसने कुल्हाड़ी से दो पंजे काटे। फिर लगा कि पुलिस पकड़ लेगी तो उन्हें जंगल में छिपा दिया।

 


 

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