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आज की तकनीक हमें भावनात्मक रूप से नहीं जोड़ सकती लेकिन शिक्षक इसे बखूबी कर सकते हैं

वर्तमान दौर में हमारा संबंध सुबह उठने से लेकर रात के सोने तक सूचना प्रौद्योगिकी से है, अब सूचना प्रौद्योगिकी ने...

Danik Bhaskar | Sep 10, 2018, 02:10 AM IST
वर्तमान दौर में हमारा संबंध सुबह उठने से लेकर रात के सोने तक सूचना प्रौद्योगिकी से है, अब सूचना प्रौद्योगिकी ने शैक्षणिक संस्थानों में भी अपनी पैठ बना ली है, तो क्या इस दौर में शिक्षकों की भूमिका कम हो जाती है या शिक्षकों का दायित्व बढ़ जाता है? सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा का माध्यम है या सूचना का? दोनों में बहुत फर्क है, और इसी का विश्लेषण करने का कार्य वह व्यक्ति कर सकता है, जो इस अनुभव से गुजरा हो। हम अगर किसी व्यक्ति के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ना चाहते हैं, तो उसके पास हमें पहुंचना होगा, तकनीक हमें भावनात्मक रूप से नहीं जोड़ सकती और ना ही हमारे आंसू पोंछ सकती है। यह कहना था स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में आयोजित युवा संवाद में डाॅ. सीमा रायजादा का। इस अवसर पर चयनित पांच युवाओं ने "तेजी से विस्तृत होते हुए संचार प्रौद्योगिकी के युग में शिक्षकों की भूमिका' विषय पर विचार व्यक्त किए।

युवा संवाद में विषय विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी।

यूट्यूब हाथ पकड़कर लिखना नहीं सिखा सकता

कार्यक्रम में राजीव शर्मा ने कहा कि, विषय में रुचि पैदा करने का कार्य शिक्षक ही कर सकता है, इसलिए शिक्षक का स्थान कभी तकनीक नहीं ले सकती। यू-ट्यूब हमें हाथ पकड़कर लिखना नहीं सिखा सकता। अभिषेक शर्मा ने कहा, शिक्षक की भूमिका पहले भी महत्वपूर्ण थी और भविष्य में भी रहेगी, लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में मायने बदल गए हैं। जैसे परंपरागत शिक्षा के स्थान पर ई-शिक्षा। दोनों को पूरक होने की आवश्यकता है ना की प्रतिद्वंदी। कहीं ना कहीं शिक्षक और विद्यार्थी के बीच में एक खाई पैदा हो रही है।