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गुलजार ने 1400 कविताओं में चुनीं 10 सर्वश्रेष्ठ कविताएं, रविंद्र भवन में गुलजार खुद करेंगे सम्मान

'कविता बैसाखी' के विजेताओं का सम्मान रवींद्र भवन में 16 जून को।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 13, 2018, 02:58 PM IST

गुलजार ने 1400 कविताओं में चुनीं 10 सर्वश्रेष्ठ कविताएं, रविंद्र भवन में गुलजार खुद करेंगे सम्मान

भोपाल।आरुषि और सामाजिक न्याय व निःशक्तजन कल्याण विभाग ने ऑनलाइन कविता प्रतियोगिता "कविता बैसाखी' का आयोजन किया था। प्रतियोगिता के लिए आई एंट्रीज में से गुलजार ने 10 सर्वश्रेष्ठ कविताओं को चुना है। जिन्हें 16 जून को रवींद्र भवन में गीतकार-लेखक गुलजार खुद सम्मानित करेंगे। समारोह सुबह 11:55 बजे शुरू होगा। इस इवेंट में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव बतौर चीफ गेस्ट मौजूद रहेंगे।

ये हैं विनर्स


1. पूनम सूद, फैजाबाद
2. आरती वर्मा, चंडीगढ़
3. ऋषिकेश मुरगुंडे, पुणे
4. नेहा भावसार, बेंगलुरू
5. कोशिश, नई दिल्ली
6. हेमंती गोसाईं, देहरादून
7. राहुल गौर, भोपाल
8. अनिल जीनगर, मुंबई
9. मनोज छाबड़ा, हिसार
10. मोहित कटारिया, बेंगलुरू

प्राइज मनी

- फर्स्ट प्राइज
Rs.30 हजार
- सेकंड प्राइज
Rs.20 हजार
- थर्ड प्राइज
Rs.15 हजार
- बाकी 7 विनर्स को
Rs.5-5 हजार

- यहां से लें इवेंट के लिए फ्री पास

रवींद्र भवन में 16 जून को होने वाले सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए फ्री पास 14 जून को शाम 5 से 7 बजे के बीच आरुषि ए-1, शिवाजी नगर, एमपीईबी ऑफिस के पास स्थित परिसर से या फोन नंबर 0755-2550827, 4293399 से लिए जा सकते हैं।

यह है उद्देश्य

- प्रतियोगिता आयोजित करने का मकसद विकलांगता के विषय में लोगों की सोच को जानना था।
- 75 शब्दों में कविता लिखनी थी।
- देशभर से 1400 से ज्यादा एंट्रीज आईं।
- 10 बेस्ट कविताओं को गीतकार-लेखक गुलज़ार ने खुद चुना है।



गुलजार साहब ने लिखा- मुझे जिन नज़्मों में धड़कन सुनाई दी, वो ही चुनीं मैंने


' ये जो पोएट्री कॉम्पिटीशन ऑन डिसेबिलिटी शुरू किया था, आरुषि एवं सामाजिक न्याय व निःशक्तजन कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश शासन के साथ मिलकर, 1400 के करीब एंट्रीज आई थीं। शायरों ने भेजी हैं लिखकर, जो डिसेबिलिटी को महसूस करते हैं। वो महसूस करते हैं लोग जो हैं किसी न किसी वजह से या उनकी कमी या उनकी कमजोरी और उनके दर्द को पहचानते हैं और उन सब ने कोशिश की है कहने की नज़्म की शक्ल में उन ने। पोएट्री कॉम्पिटीशन इस तरह का किया, जिसमें 1400 से ज्यादा नज़्में आईं। हमारे पास थोड़ी सी टाइम लिमिट थी, वरना मेरा ख्याल था, पूरा हिन्दुस्तान लिखने को तैयार था। इन नज़्मों में से अव्वल तो इनाम तो तीन के सोचे थे, तीन तो नामुमकिन सा लगा। इसमें से तीन नज़्में कैसे निकाली जाएं, फिर इनके हिस्से करने शुरू किए। पहले एक बार चुनाव करें, छन्नी करें फिर दूसरी भी छन्नी करें। फिर छन्नी करते-करते हम 200-250 के करीब पहुंचे। 250 के बाद फिर उसकी छन्नी शुरू की। दूसरे राउंड में 82 नज़्में मुझ तक आईं, 82 में से फिर 3 का चुनाव करना था, जो उतना ही मुश्किल लगा जितना 1400 में था। 82 नज़्मों में से फिर एक चुनाव शुरू हुआ, जिसमें से मैंने कोशिश की कि वो नज़्में सिलेक्ट की जाएं, जिसमें वो अहसास जरूर हो उन बच्चों की तरफ और उन लोगों की तरफ छोटे हों या बड़े हों, जो किसी न किसी वजह से मफ़लूज हैं। जिनमें कोई न कोई कमी है, कोई डिसेबिलिटी है, जिनमें वो अहसास है। पहले तो निकालनी पड़ेंगी वर्ना कहने को तो कह देता है आदमी, नज़्म में कह देता है, पर सिर्फ कहना नहीं है। शायरी महसूस करना है, कहना नहीं है, ये सिर्फ अल्फाज़ नहीं हैं। जिन नज़्मों में वो धड़कन सुनाई दी मुझे वो निकालीं। उसमें से आखिरकार मेरे हाथ में 28 नज़्मे इंतेखाब में आईं, चुनाव में आईं, अब उनका फिर हिस्सा शुरू किया। मैं तो कोशिश कर रहा था, करते-करते तो आधी याद हो गईं। ए, बी, सी करके उन्हें छांटना शुरू किया। करते-करते आखिरकार उसमें से 10 नज़्में ए कैटेगरी में निकालीं। 9 नज़्में बी कैटेगरी में निकालीं और फिर 9 जो सी में बचीं, ये कुल मिला के 28 नज़्में हुईं। उसमें पहले ए में, 10 में तो ये हैं कि 3 को बड़े इनाम मिलेंगे। बाकी 7 लोगों को भी कैश इनाम दिए जाएंगे। साथ-साथ में जो रनर्सअप कहला सकते हैं। आप कह सकते हैं रेस में और 10 नाम जो आखिरकार चुने गए, जब पढ़ा उन्हें, उनके नाम पढ़े तो उसमें कुछ पहचान वाले भी निकले। उनको पहचान सका मैं। मैं जानता हूं कि वो हमारे साथ आरुषि में भी शामिल हैं और आरुषि जैसे दूसरी जगहों पर भी ऐसे काम में शामिल हैं। उन 10 में से पहले 3 हैं, जिनमें पूनम सूद हैं, जिनसे मैं वाकिफ हूं। बहुत अच्छी राइटर हैं। दूसरे नंबर पर आरती वर्मा नाम आया। तीसरा ऋषिकेश मुरगुंडे। ये पहले तीन और इनकी नज़्में बहुत ही अच्छी थीं। हालांकि नज़्में और भी थीं और अच्छी लग रही थीं तो हम उनकी भी गिनती साथ-साथ करते चलेंगे। नंबर 4 पे नेहा भावसार हैं और पांचवें नंबर पे जो हैं, उनका नाम ही कोशिश है या ये उनका तखल्लुस है इस नाम से लिखती हैं। इसमें मुझे उनका जेंडर नहीं पता चल सका कि वे लड़की हैं या लड़का हैं, पर शायर जरूर हैं। फिर नंबर 6 पर हेमंती गोसाईं हैं। 7 नंबर पर राहुल गौर हैं। आठवें नंबर पर जो शख्स हैं उनको भी मैं जानता हूं अनिल जीनगर। अच्छा कहने का हौसला भी रखते हैं और जज्बा भी रखते हैं और अहसास भी रखते हैं और मैं जानता हूं वो आरुषि के लिए काफी मेहनत करते हैं। काम करते हैं और उन बच्चों के साथ घुले मिले हैं। नौवें नंबर पर मनोज छाबड़ा हैं। नंबर 10 पर जो हैं वो भी बहुत अच्छे शायर हैं, बच्चों के लिए अक्सर लिखते रहते हैं और उनकी शायरी पर मुझे आइंदा भी बहुत उम्मीद है कि वे अच्छा काम करेंगे और कर रहे हैं पहले से, वो मोहित कटारिया हैं। बस ये 10 तक के नंबर हैं और पहुंचेंगे और इंशा अल्लाह अच्छा सा जलसा कर के इन शायरों से मुलाकात होगी। -थैंक्यू

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Web Title: gauljaar ne 1400 kvitaaon mein chunin 10 srvshresth kvitaaen, rvindr bhavan mein gauljaar khud karengae smmaan
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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