मध्यप्रदेश / टॉयलेट जाने पर रोक से बच्चों में यूटीआई की समस्या बढ़ी, किडनी पर भी हो सकता है असर

UTI problem
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UTI problem

  • ये कैसा अनुशासन क्लास के दौरान कई निजी स्कूलों में बच्चों को टॉयलेट करने के लिए नहीं जाने देते हैं

दैनिक भास्कर

Oct 28, 2019, 03:15 PM IST

भोपाल। निजी स्कूलों ने अनुशासन कायम रखने के नाम पर ऐसी व्यवस्था लागू कर रखी है, जो बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। दरअसल इन स्कूलों ने फरमान जारी किया है कि क्लास के दौरान कोई भी बच्चा टॉयलेट नहीं जाएगा। इसके लिए उन्हें लंच ब्रेक या शॉर्ट रीसेस का इंतजार करना होगा। 

 

शिशु रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इस वजह से बच्चों को मूत्र रोककर रखना पड़ता है। नतीजे में उन्हें यूटीआई यानि यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की समस्या हो रही है। शिशु रोग विशेषज्ञ मनीष जैन ने बताया कि उनके यहां इस तरह की समस्या से ग्रस्त हर माह 10 से 15 बच्चे आते हैं। इसकी एक ही वजह है कि बच्चे किसी न किसी वजह से मूत्र रोककर रखते हैं।


इसका दूसरा पहलू यह भी है कि अगर बच्चों पर यह दबाव रहे कि उन्हें बीच में टॉयलेट नहीं जाने दिया जाएगा, तो वह पानी कम पीने लगते हैं। यूटीआई की समस्या के लिए यह भी एक वजह बन जाती है। उन्होंने बताया कि वे दावे से यह नहीं कह सकते हैं कि यूटीआई की समस्या के लिए स्कूलों की आंतरिक व्यवस्था जिम्मेदार है या नहीं। इसके लिए अलग से सर्वे करना होगा।


यानि बच्चों पर दोनों ओर से खतरा है : वे पानी ज्यादा पिएंगे तो बार-बार टॉयलेट जाना पड़ेगा और स्कूल प्रबंधन उन्हें ऐसा करने से रोकेगा। न जाने पर उन्हें संक्रमण का खतरा रहेगा। वहीं टॉयलेट से बचने के लिए वे पानी कम पीने लगेंगे तो भी यूटीआई का खतरा है।


100 से ज्यादा बच्चों को हर माह हो सकती है यह समस्या : इस समस्या के आंकड़े बड़े हो सकते हैं। शहर में 10-12 शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। अगर उनके यहां 10 बच्चे हर माह भी इस समस्या को लेकर आते हैं तो आंकड़ा 100 से ज्यादा हो सकता है। यह अपनी आप में गंभीर मामला है।

 

स्कूल हो या घर, बच्चों को खूब पानी पीने और मूत्र न रोकने की सीख दी जाना चाहिए। इससे सबसे आम समस्या यूटीआई की होती है। जिससे पेशाब में जलन आदि की समस्या आती है। गंभीर स्थितियों में मूत्र के साथ खून आने लगता है। यह किडनी के संक्रमण की वजह भी बन सकता है।

डॉ. मनीष जैन, शिशु रोग विशेषज्ञ


 

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