मप्र / सुबह नहीं आए टीचर्स, कुलपति ने फोन पर कहा- विश्वविद्यालय आइए, अभी गिरफ्तारी नहीं होगी

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 07:27 AM IST



Vice-Chancellor said on  phone- come to university, there will be no arrest
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Vice-Chancellor said on  phone- come to university, there will be no arrest
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  • पूर्व कुलपति प्रो. बीके कुठियाला समेत 20 लोगों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में दर्ज हुई एफआईआर
  • सोमवार को पूरे विश्वविद्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा रहा

भोपाल . माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बीके कुठियाला समेत 20 लोगों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में दर्ज हुई एफआईआर के अगले दिन सोमवार को पूरे विश्वविद्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा रहा।

 

ईओडब्ल्यू ने जिन टीचर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, उनमें से एक-दो टीचर्स ही विवि पहुंचे और जब कोई नहीं दिखा तो वे भी वापस लौट गए। यह जानकारी लगते ही कुलपति दीपक तिवारी ने उनसे संपर्क किया और कहा कि वे उनके साथ हैं। घबराने जैसी कोई बात नहीं है। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी। कुलपति के इस आश्वासन के बाद भी कुछ ही टीचर्स विवि पहुंचे। दरअसल, विवि में पाठ्यक्रम निर्माण को लेकर हुई बैठक होनी थी, इसलिए कुलपति ने इनको बैठक में शामिल करना चाहा था। उधर, विवि में छात्रों की कक्षाएं भी नहीं लगीं। हालांकि, इसका एक बड़ा कारण कैंपस में बिजली गुल रहना भी है। 

ईओडब्ल्यू ने सभी 20 प्रोफेसर्स की नियुक्ति की जानकारी मांगी  : जिन प्रोफेसर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सोमवार को ईओडब्ल्यू ने उन सभी की अलग-अलग रिपोर्ट विवि से मांगी है। इसमें पहली नियुक्त से लेकर अब तक की पूरी जानकारी के साथ सेपरेट रिपोर्ट विवि मांगी हैं। इसमें विज्ञापन, नियुक्ति आदेश, यूजीसी व राज्य शासन के नियम, योग्यता, महापरिषद की मंजूरी मिलने नहीं मिलने जैसे बिंदु शामिल हैं। पत्रकारिता विश्वविद्यालय प्रशासन से जानकारी मांगी है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अरुण मिश्रा, एसपी ईओडब्ल्यू

 

पूर्व कुलपति कुठियाला का बयान वायरल 


हैरानी और दुख भी, जिनको आरोपी बनाया उनका पक्ष ही नहीं सुना गया, जांच व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास
 

विश्वविद्यालय में कार्यरत 19 मित्रों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। रिपोर्ट का आधार तीन सदस्यों की कमेटी की जांच रिपोर्ट है। हैरानी भी और दुख भी है कि जिन को आरोपी बनाया गया है उनका पक्ष तो सुना ही नहीं गया। यह पूर्णत: अन्याय है, गैर-कानूनी है। सात दशकों से अधिक की आजादी के बाद भी नागरिक अधिकार का ऐसा हनन अनुचित है। एक व्यवस्था में आपके काम की सराहना होती है और उसके लिए आपको पुरस्कृत किया जाता है। परन्तु दूसरी व्यवस्था उस काम को दंडनीय बनाने का प्रयास करती है। -बीके कुठियाला, पूर्व कुलपति

 

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