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क्या चीज है ये चाय, सबके ही मन को भाए

शहीद भवन मेंं शुक्रवार को परवेज खान के निर्देशन में हास्य नाटक काहिलों की जमात का मंचन हुआ। 1.15 घंटे की अवधि का यह...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 02:21 AM IST
शहीद भवन मेंं शुक्रवार को परवेज खान के निर्देशन में हास्य नाटक काहिलों की जमात का मंचन हुआ। 1.15 घंटे की अवधि का यह नाटक संदेश देता है कि इंसान को हंसते रहना चाहिए, चाहे जैसे हंसो क्योंकि रोने से कभी कोई परेशानी हल नहीं होती।

नाटक में 4.30 मिनट की एक कव्वाली चाय पर केंद्रित थी जिसके बोल "क्या चीज है ये चाय, सबके ही मन को भाए, इज्जत बढ़ाए चाए और जिल्लत कराए...' थे। नाटक में गालिब की शायरी और फिल्मी गीतों का भी प्रयोग किया गया। काहिलों की जमात का अरबी में मतलब दारूल कोहला होता है, अरबी में स्कूल को दारूल और कोहला को काहिल कहा जाता है। 2014 में अब्दुल हक ने यह कहानी लिखी थी।

नाटक के दो पात्र आबिद व अकबर शहर के मशहूर शायर अलालाबादी के शागिर्द हैं। वे दोनों अक्सर चच्चा की चाय की दुकान पर मिलते हैं। चच्चा उन्हें जमात बनाने की सलाह देते हैं। दारुल कोहला के उसूलों पर काहिलों की जमात बनती है और वे अपने हुनर से काबिल।