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बगैर सूचना दिए कर दिया बाहर

डीबी स्टार

Danik Bhaskar | Sep 10, 2018, 02:10 AM IST
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दरअसल अफसरों को इस बात की भनक पहले ही लग चुकी थी कि गुजरात या इंदौर की कंपनी यह टेंडर ले जा सकती है। ऐसे में उन्होंने सबसे पहले इंदौर की कंपनी को बाहर किया। इसके लिए आधार बनाया गया कि उन्होंने टेंडर फीस जमा नहीं की, जबकि यह कंपनी एमएसएमई में रजिस्टर्ड है। केंद्र सरकार भी इनसे टेंडर फीस नहीं लेती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इनके द्वारा 15 लाख रुपए की ईएमडी जमा की गई थी। इसमें से फीस एडजस्ट की जा सकती थी। दूसरी बात यह है कि यदि कंपनी फीस जमा नहीं करती है तो उसे सूचित किया जाता है। लेकिन काॅर्पोरेशन के अफसरों ने ऐसा नहीं किया। इसी तरह गुजरात की कंपनी को भी बाहर करने के लिए आईडीसी नंबर को आधार बनाया। जबकि काॅर्पोरेशन ने टेंडर में टॉप फाइव ब्रांड की शर्त रखी थी। यानि कोई भी कंपनी दुनिया की टॉप फाइव ब्रांड प्रोडक्ट कोट कर सकती है। इस कंपनी ने एसर के मॉनीटर काे कोट किया। काॅर्पोरेशन ने इसकी आईडीसी रैंकिंग मांगी, लेकिन यह कंपनी ने उपलब्ध नहीं कराई, क्योंकि ऐसा करना अनिवार्य नहीं था। इस बारे में काॅर्पोरेशन के अधिकारियों से बात की तो जवाब मिला कि पता करवाते हैं कि ऐसा क्यों हुआ?

51 जिलों में ट्राइबल डिपार्टमेंट आधार इनरोलमेंट किट को संकुल केंद्र और अपने स्कूलों में लगाएगा

इसलिए की जा रही है खरीदी

केंद्र सरकार ने विद्यार्थियों के आधार कार्ड बनवाने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए हैं। खासतौर से स्कूल शिक्षा और ट्राइबल डिपार्टमेंट। इसके पहले अन्य विभागों ने खरीदी के लिए टेंडर जारी करवाए, लेकिन यह अब तक की सबसे बड़ी खरीदी है। इसके बाद ट्राइबल डिपार्टमेंट आधार इनरोलमेंट किट को संकुल केंद्र और अपने स्कूलों में लगाएगा। ऐसा सभी 51 जिलों में किया जाना है। केंद्र की तरफ से निर्देश दिए गए हैं कि इस काम को जल्द से जल्द करें। हद तो यह है कि जब इस संबंध में अधिकारियों को बताया गया तो उन्होंने न तो गलती स्वीकार की और न ही गड़बड़ी से इंकार किया।