मप्र / दुधमुंहे बच्चों को लेकर धरने पर बैठी महिलाएं बोलीं- हमारा कसूर क्या है, सरकार पीएससी चयनित महिला असिस्टेंट प्रोफेसर बोलीं- आश्वासन नहीं, नियुक्ति चाहिए

women sitting on the dharna with the milk babies said - what is our fault
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women sitting on the dharna with the milk babies said - what is our fault

Dainik Bhaskar

Dec 05, 2019, 03:55 AM IST

भोपाल | मप्र लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) से असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए चयनित हुए उम्मीदवारों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी हैं, जो नीलम पार्क में धरने पर बैठी हैं। वे परिवार की जिम्मेदारी छोड़ खुले आसमान के नीचे बीते पांच दिन से अपने हक के लिए धरना दे रही हैं। 


इनमें से कई भूख हड़ताल पर भी डटी हैं तो कुछ छोटे बच्चों को लेकर महु से पैदल चलकर आई हैं। इन महिलाओं की पीड़ा अब आक्रोश बन चुकी है। इन सभी महिला उम्मीदवारों का कहना है कि आखिर हमारा कसूर क्या है? हमने व्यक्तिगत समस्याओं से जूझते हुए परीक्षा पास की है, लेकिन सरकार डेढ़ साल से हमें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है।

आखिर हमारी गलती क्या है?
आखिर हमारी गलती क्या है? ये कि हमने नेट क्वालीफाई किया। ये कि हमने प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षा पास की। ये कि हम पिछले डेढ़ साल से सरकार के आश्वासन पर भरोसा करके शांति से अपनी नियुक्ति का इंतजार करते रहे। हमें घर से निकलकर यहां तक आने में बहुत संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन सरकार इस तरह पेश आ रही है, जैसे हमने परीक्षा पास करके कोई गुनाह कर दिया हो। - भारती जमरा, धार 


प्रेगनेंसी की हालत में वैरीफिकेशन के लिए आई थी
 परीक्षा के बाद मैं पांच माह से गर्भवती थी। आठ माह की प्रेगनेंसी में जब मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही थी, तब मैं वैरीफिकेशन के लिए भोपाल आई। प्रसव के बाद मुझे पैरालिसिस हो गया। तीन माह बिस्तर पर पड़ी रही, लेकिन सोच लिया था कि आदेश निकले तो इसी हालत में ज्वाइन करूंगी, लेकिन आज मैं अपने एक साल के बच्चे को धरना देने को मजबूर हूं। - मंजू सोनी, ग्वालियर

पिपरिया : अतिथि विद्वान पैदल भोपाल रवाना, बाेले- सीएम के अाश्वासन पर नहीं भराेसा

 सेवा समाप्ति के विराेध में प्रदर्शन करने के दाैरान िछंदवाड़ा से खदेड़े गए प्रदेशभर के करीब 300 अतिथि विद्वान बुधवार काे भाेपाल के लिए पैदल यात्रा पर निकले। अतिथि विद्वानाें काे एक दिन पहले पुलिस ने छिंदवाड़ा से जबरदस्ती पिपरिया लाकर छाेड़ दिया था। अतिथि विद्वान घर नहीं लाैटे अाैर सीएम कमलनाथ से मिलने भाेपाल के लिए भविष्य सुरक्षा यात्रा पर निकल पड़े। अतिथि विद्वानों ने कहा मुख्यमंत्री कमलनाथ ट्वीट कर नियमीतिकरण का अाश्वासन दे रहे हैं लेकिन सीएम पर भराेसा नहीं है।

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