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64 की उम्र में युवाओं जैसा जोश, मृत्यु के बाद देहदान का संकल्प

देहदान को लेकर लोग अभी भी इतने जागरुक नहीं हैं। वजह यह है कि देहदान को लेकर यहां कई तरह के मिथक और भ्रांतियां हैं।...

Dainik Bhaskar

Apr 03, 2018, 03:20 AM IST
64 की उम्र में युवाओं जैसा जोश, मृत्यु के बाद देहदान का संकल्प
देहदान को लेकर लोग अभी भी इतने जागरुक नहीं हैं। वजह यह है कि देहदान को लेकर यहां कई तरह के मिथक और भ्रांतियां हैं। जैसे कुछ लोगों काे लगता है कि यदि वे अंग व देहदान करते हैं तो वे अगले जन्म में उन अंगों के बिना पैदा होंगे जबकि देहदान सबसे बढ़ा काम नहीं है।

यह कहना है यहां के रेलवे सेवा निवृत्त कर्मी डॉ. रामनाथ गुर्जर का। सागर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा छात्र-छात्राएं शरीर के अंदर का मर्ज जान सके इसलिए दोनों दंपत्ति ने बुंदेलखंड मेडीकल कॉलेज को मरणोपरात अपनी देह देने का संकल्प लिया। यंू तो डॉ. रामनाथ 64 आयु के है लेकिन वे अब भी युवाओं जैसा जोश रखते हैं। उनका जीवन भी संघर्ष भरा रहा है। लेकिन वे कभी हार नहीं माने और कई उपलब्धियां हासिल की। आज भी वे युवाओं, हम उम्र के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने हुए हैं। खेलकूद प्रतियोगिताओं में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं और स्थान भी प्राप्त करते हैं। डां. रामनाथ का जन्मस्थान झांसी है, लेकिन वे रिटायर के बाद बीना शहर के कानूनगों वार्ड में निवासरत है। डॉ. रामनाथ गुर्जर 64 साल और उनकी धर्मप|ी आशा गुर्जर 51 साल ने मरणोपरांत देहदान करने का संकल्प लेकर बुंदेलखंड मेडीकल कॉलेज सागर में फार्म भरकर जमा किया है। उनका कहना है कि वे स्वेच्छा से देहदान करना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि देहदान के बाद उनका शरीर चिकित्सा छात्रों के काम आए। वे कहते हैं कि मेडिकल के विद्यार्थियों को शरीर के अंदर के मर्ज जानने के लिए मानव अंगों की आवश्यकता होती है। हमारा शरीर मरने के बाद राख में बदल जाता है। अगर हमारे मरने के बाद शरीर मानव कल्याण के काम आ सके तो इससे बड़ा कोई पुण्यकार्य नहीं होगा।

डीन ने कहा-यह पहल दूसरों के लिए प्रेरणा : यही सोचकर देहदान का संकल्प लिया और उनके साथ-साथ प|ी ने भी देहदान किया। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति के पार्थिव शरीर पर चिकित्सा छात्र प्रेक्टिकल कर डाॅक्टर बन सकते हैं।

गौरतलब है डीन मेडीकल कॉलेज सागर ने उम्मीद जताई कि इस बुजुर्ग दम्पत्ति से दूसरे लोगों को भी देहदान करने की प्रेरणा मिलेगी। इसके लिए उन्हंे प्रमाण पत्र भी दिया गया है।

सैकड़ाें प्रतियोगिताओं में लिया भाग, जीते मैडल

डाॅ. रामनाथ ने वैंगन मरम्मत कारखाना उम रेल के खेलकूद प्रतियोगिता वर्ष 2009, 2011 व 2014 में चैम्पियन बने। 6 राज्य स्तरीय एवं 8 राष्ट्रीय स्तर की मास्टर्स एथलैटिक चैिपयनशिप प्रतियोगिता में भाग लिया। राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में इलाहाबाद 2010 में 100 मीटर बाधा दौड़ में द्वितीय, 100 वाई 4 रिलेरेस में द्वितीय, 400 मीटर बाधा दौड़ में तृतीय स्थान पाया। इसके अलावा कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर मैडल जीते हैं। आज भी वे सीनियर सिटीजन प्रतियोगिता में भाग लेने जाते हैं और स्थान भी प्राप्त करते हैं।

अब लोगों को दे रहे नि:शुल्क योग की सीख

सेवानिवृत्त के बाद भी कुछ कर गुजरने का जुनून आज भी उनमें हैं। इसी के लिए सन 2015 से उन्होंने शहर के लोगों को निशुल्क योगा का प्रशिक्षण देना शुरू किया था। वे अब तक 15 से ज्यादा निशुल्क शिविर लगा चुके हैं और प्रशिक्षक के रुप में योग की विभिन्न क्रियाओं को सिखाने के अलावा रोगों से निदान के टिप्स दिए। उनका मानना है कि योग से कई प्रकार के रोगों से बचा जा सकता है। इसलिए वे स्वयं योग करते हैं और लोगों में जागरुकता पैदा करने के लिए समय-समय पर निशुल्क योग शिविर लगाकर प्रशिक्षण के साथ ही योग से संबंधित पुस्तके, पंपलेट व अन्य सामग्री भी निशुल्क प्रदान करते हैं।

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