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पुराने भवनों की देखरेख नहीं, नए पर लाखाें खर्च

पीजी कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को सुविधा देने के नाम पर संस्था करोड़ों रूपए खर्च कर भवन बनवा रहा है लेकिन...

Dainik Bhaskar

Feb 18, 2018, 04:35 AM IST
पीजी कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को सुविधा देने के नाम पर संस्था करोड़ों रूपए खर्च कर भवन बनवा रहा है लेकिन जिस परपच से ये भवन बनाए जा रहे हैं उसके लिए इनका उपयोग नहीं हो रहा है। अत: भवनों का उपयोग एवं देखरेख नहीं होने से वे खंडहर होने की कगार पर है। पुराने भवन जहां उपयोगहीन हैं वहीं नये भवन बनाने के लिए रूसा के तहत मिली राशि में से एक करोड़ रूपए से ज्यादा नये भवन बनाने पर खर्च कर दिए।

दरअसल संस्था परिसर मुख्य गेट के पास छात्राओं को ठहरने के लिए सर्वसुविधा युक्त गर्ल्स हॉस्टल बनवाया गया था। इस हॉस्टल को बने करीब 6 साल बीत चुके हैं। इतना समय बीतने के बाद भी आज तक एक भी छात्रा नहीं रुकी है।

जबकि संस्थान में कला, कामर्स, साइंस एवं पीजी में करीब 500 छात्राएं पढ़ती है। इनमें से 70 फीसदी छात्राएं शहर व 30 फीसदी छात्राएं ग्रामीण क्षेत्रों की रहने वाली है। गांव से कॉलेज आने वाली छात्राओं की नियमित पढ़ाई हो, इसके लिए उन्हें कॉलेज में रुकने की सुविधा देने के लिए इस छात्रावास भवन को वर्ष 2007 में स्वीकृत मिली थी। भवन बनाने के लिए यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के तहत करीब 55 लाख रुपए की राशि पीडब्ल्यूडी विभाग को दी गई। राशि मिलने पर पीडब्ल्यूडी ने निर्माण एंजेंसी द्वारा पीजी कॉलेज गेट से लगी जमीन में वर्ष 2013 तक दो भवन तैयार कर संस्था प्रबंधन को सौंप दिए।

प्रबंधन ने हैंडओवर कर लिया लेकिन छात्राओं को ठहराने में रूचि नहीं दिखाई और रख रखाव पर भी ध्यान नहीं दिया। मसलन इसका उपयोग न होने से खंडहर में तब्दील होने लगा है।

भवन तो है पर नहीं हुई कैंटीन चालू,

खेल मैदान उपयोगहीन

इसी तरह विद्यार्थियों सहित स्टाफ को चाय-नास्ता की सुविधा कराने के लिए लाखों रुपए खर्च कर मुख्य गेट के पास कैंटीन भवन बनवाया। वर्ष 2015 में भवन बनकर तैयार हो गया। ठेकेदार ने दिसंबर 2015 में कॉलेज प्रबंधन को हैंडओवर कर दिया। तभी से इसमें ताला पड़ा है। सर्वसुविधा युक्त खेल मैदान बनाने पर 14 लाख रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए, लेकिन न तो खेल मैदान बना न ही खिलाड़ियों को सुविधा मिली।

एक करोड़ 39 लाख के भवन बनकर तैयार

संस्था से मिली जानकारी अनुसार रुसा के तहत कॉलेज को 2 करोड़ रुपए राशि मिली थी। संस्था ने इस राशि में से करीब 1 करोड़ 39 लाख रुपए नये भवन बनावाने पर खर्च किए। इस राशि से प्रशासनिक भवन, बालक छात्रावास, अकादमिक भवन, प्रयोगशाला भवन व पुस्तकालय भवन बनवाए। ये भवन लगभग बनकर तैयार हो गए है। जल्द ही संस्था हैंडअोवर करने वाली है। हैंडओवर होने के बाद इनका उपयोग होगा यह कहा नहीं जा सकता। क्योंकि पहले से ही कई भवन अनुपयोगी पढ़े-पढ़े खंडहर होने की कगार पर है। जब इस संबंध में संस्था प्राचार्य डां.एके जैन से बात करना चाही तो उनका फोन बंद बताया।

भास्कर संवाददाता | बीना

पीजी कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को सुविधा देने के नाम पर संस्था करोड़ों रूपए खर्च कर भवन बनवा रहा है लेकिन जिस परपच से ये भवन बनाए जा रहे हैं उसके लिए इनका उपयोग नहीं हो रहा है। अत: भवनों का उपयोग एवं देखरेख नहीं होने से वे खंडहर होने की कगार पर है। पुराने भवन जहां उपयोगहीन हैं वहीं नये भवन बनाने के लिए रूसा के तहत मिली राशि में से एक करोड़ रूपए से ज्यादा नये भवन बनाने पर खर्च कर दिए।

दरअसल संस्था परिसर मुख्य गेट के पास छात्राओं को ठहरने के लिए सर्वसुविधा युक्त गर्ल्स हॉस्टल बनवाया गया था। इस हॉस्टल को बने करीब 6 साल बीत चुके हैं। इतना समय बीतने के बाद भी आज तक एक भी छात्रा नहीं रुकी है।

जबकि संस्थान में कला, कामर्स, साइंस एवं पीजी में करीब 500 छात्राएं पढ़ती है। इनमें से 70 फीसदी छात्राएं शहर व 30 फीसदी छात्राएं ग्रामीण क्षेत्रों की रहने वाली है। गांव से कॉलेज आने वाली छात्राओं की नियमित पढ़ाई हो, इसके लिए उन्हें कॉलेज में रुकने की सुविधा देने के लिए इस छात्रावास भवन को वर्ष 2007 में स्वीकृत मिली थी। भवन बनाने के लिए यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के तहत करीब 55 लाख रुपए की राशि पीडब्ल्यूडी विभाग को दी गई। राशि मिलने पर पीडब्ल्यूडी ने निर्माण एंजेंसी द्वारा पीजी कॉलेज गेट से लगी जमीन में वर्ष 2013 तक दो भवन तैयार कर संस्था प्रबंधन को सौंप दिए।

प्रबंधन ने हैंडओवर कर लिया लेकिन छात्राओं को ठहराने में रूचि नहीं दिखाई और रख रखाव पर भी ध्यान नहीं दिया। मसलन इसका उपयोग न होने से खंडहर में तब्दील होने लगा है।

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