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मनीष दुबे, अमित शर्मा | गुना

सिर्फ ईंट-गारे से बन रहा बजरंगगढ़ का नया जैन मंदिर, आरसीसी के मुकाबले 4 गुना ज्यादा होगी लाइफ, 2 गुना महंगा और बनने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 12, 2018, 06:10 AM IST

मनीष दुबे, अमित शर्मा | गुना
सिर्फ ईंट-गारे से बन रहा बजरंगगढ़ का नया जैन मंदिर, आरसीसी के मुकाबले 4 गुना ज्यादा होगी लाइफ, 2 गुना महंगा और बनने में 3 गुना अधिक समय लगेगा


मनीष दुबे, अमित शर्मा | गुना

बजरंगगढ़ जैन मंदिर के निर्माण में सदियों पुरानी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। 28000 वर्ग फीट क्षेत्र में बन रहे इस मंदिर में सिर्फ ईंट, सीमेंट और बजरी का उपयोग हो रहा है। इसमें आरसीसी का एक भी ढांचा नहीं बनाया जा रहा है। ईंट से बनी छत और गुंबद भी बिना किसी पिलर या गर्डर के टिके हुए हैं। इसका निर्माण तीन साल से चल रहा है। आरसीसी के मुकाबले इसे बनने में तीन गुना ज्यादा समय लगेगा। जबकि लागत दोगुनी रहेगी।

चार सौ साल तक टिका रहेगा मंदिर

पुरानी इमारतों में यही तकनीक होती थी इस्तेमाल। देश में सिर्फ पुड्‌डुचेरी के इंजीनियरिंग कॉलेज में ही होती है इसकी पढ़ाई

मंदिर समिति से जुड़े प्रदीप जैन का कहना है कि इस तकनीक से इमारतों की उम्र 400 साल तक होती है, जबकि आरसीसी के ढांचे की उम्र 100 साल मानी जाती है।

यह तकनीक महंगी है और आरसीसी के मुकाबले इस पर दो गुना ज्यादा खर्च आता है। इमारत बनने में भी 3 से 4 गुना ज्यादा समय लग सकता है।

सिंगल स्टोरी बिल्डिंग बनाने में तकनीक सस्ती पड़ सकती है।

पुड्‌डुचेरी के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में इस तकनीक को आज भी सिखाया जाता है। बजरंगगढ़ मंदिर के इंजीनियर भी इसी कॉलेज के छात्र रहे हैं।

राघौगढ़, रुठियाई और बीनागंज में भी मंदिरों का निर्माण भी इसी तकनीक से होने वाला है।

आरसीसी का मंदिर दो साल में तैयार हो जाता है पर इसमें 6 साल से ज्यादा वक्त लगेगा और मजबूती ज्यादा रहेगी

8 लाख ईंटों से होगा निर्माण, कम तीव्रता वाले भूकंप से भी नहीं हाेगा नुकसान, 3 से 5 फीट तक मोटी हैं इसकी दीवारें

ऐसे बनता है ढांचा

छत के निर्माण के दौरान ईंटों की एक के ऊपर एक 3-4 परतें डाली जाती हैं। इसी तरह गुंबद बनाए जाते हैं। पूरे ढांचे का वजन दीवारों पर रहता है।

ईंट से बने बड़े ढांचे बिना किसी सहारे के टिके रहेंगे

मंदिर में 32 फीट व्यास का एक गुंबद बन चुका है, जो पूरी तरह से ईंट का बना हुआ है। इसी तरह अब 70 फीट के फैलाव वाला गुंबद तैयार हो रहा है। यह भी ऐसा ही होगा। भवन की पूरी छतें भी ईंट की बन रही हैं।

शुरुआत आरसीसी से ही हुई

प्रदीप जैन बताते हैं कि निर्माण की शुरुआत में इसे आरसीसी से ही बनाने की योजना थी। 8-10 पिलर भी बन गए थे, लेकिन फिर प्रोजेक्ट के इंजीनियर अमित जैन ने इस तकनीक का सुझाव दिया। उन्होंने पहले इससे एक कमरा बनाकर बताया। हमने उसकी मजबूती परखी।

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