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बीना अस्पताल की बिजली गुल हो जाए तो टॉर्च के उजाले में लगते हैं इंजेक्शन

सिविल अस्पताल में जनरेटर न होने से बिजली गुल होने पर इंजेक्शन और वॉटल टॉर्च की रोशनी के सहारे लगते हैं। कुछ साल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 08, 2018, 07:10 AM IST

सिविल अस्पताल में जनरेटर न होने से बिजली गुल होने पर इंजेक्शन और वॉटल टॉर्च की रोशनी के सहारे लगते हैं।

कुछ साल पहले ऑटो जनरेटर व डीजल जनरेटर आया था लेकिन खराब पड़े हैं। वर्तमान में बिजली कुछ इन्वर्टर के भरोसे चल रही है। यानी तीन साल से यह परेशानी हजारों लोग भुगत रहे हैं।

50 विस्तर की है सुविधा: सिविल अस्पताल में मरीजों के लिए 50 विस्तर की सुविधा है। जनरेटर न होने से बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इतना जरुर है कि प्रबंधन ने बिजली बंद होने पर उजाले के लिए इंवरटर लगा कर सुविधा कर ली है, लेकिन उससे पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है जिससे जरुरी कार्य भी अटके रहते हैं। डिलेवरी वार्ड, पोषण पुनर्वास केंद्र, मेडीकल, महिला, शिशु भर्ती वार्ड सहित एक्सरे, पैथालाॅजी संचालित है। इन वार्डो में रोजाना मरीज भर्ती रहते हैं। जिन्हें बिजली बंद होने पर बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों के परिजन राधेध्याम, दीपेश, मोहनलाल ने बताया बिजली आती जाती रहती है। कई बार तो रात में बिजली चली जाती है। अस्पताल में आवारातत्व घूमते रहते हैं जिससे उनके साथ वारदात होने का डर रहता है। अंधेरे में ही नर्सो को इंजेक्शन, वॉटल आदि लगाना पड़ता है।

अस्पताल प्रभारी डॉ. आरके जैन ने बताया कि अस्पताल में जो जनरेटर आया है वह खराब पड़ा है। चूंकि अस्पताल का जनरेटर न होने से उसे सुधारा नहीं जा सका है। वहीं दूसरा डीजल जनरेटर आगासौद का है। इस कारण सुधारे नहीं जा सके है। बीना अस्पताल के नाम से आए जनरेटर के बारे में सीएमएचओ कार्यालय कई बार पत्र लिखकर अवगत कराया गया है और मांग की गई है, लेकिन अभी तक कोई उचित जबाव नहीं मिला है। लगातार इस ओर कार्रवाई की जा रही है। फिर से स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने के लिए मांग की जाएंगी।

हालांकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा सालों से भोपाल को पत्र लिखकर जनरेटर की मांग की जा रही थी। शासन ने एक ऑटो साइलेंट जनरेटर स्वीकृत कर अक्टूबर 2013 को भेजा था, लेकिन अस्पताल में जो जनरेटर आया वह खराब हालत में राहतगढ़ ब्लाक के जरुआखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नाम से था।

बीना अस्पताल में जनरेटर खराब होने पर इंजेक्शन टॉर्च के उजाले में लगते हैं। फाइल फोटो

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