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खुद की बर्थ बनाकर हो रहा है आराम का सफर

ट्रेनों में भीड़भाड़ का यह आलम है कि पैर रखने की जगह नहीं है। कोई बाहर लटका हुआ है तो कोई भीतर सोने के लिए जुगाड़ बना रहा...

Danik Bhaskar | Apr 16, 2018, 03:35 AM IST
ट्रेनों में भीड़भाड़ का यह आलम है कि पैर रखने की जगह नहीं है। कोई बाहर लटका हुआ है तो कोई भीतर सोने के लिए जुगाड़ बना रहा है। ऐसे में कोई सामान रखने वाले रैक पर सो रहा है तो कोई गेट के पास ही कपड़े की गोदी बांधकर उसमें सो रहा है।

हालांकि यह अत्यंत खतरनाक है लेकिन भला नींद को पूरा करने के लिए भीड़ में भी यात्री साधन जुटा रहे हैं। रिजर्वेशन भी नहीं मिल रहे हैं। दरअसल ट्रेनों में भीड़ का कारण शादी विवाह एवं चैतुओं का लौटना है। बिलासपुर भोपाल, बीना-कटनी-चैपन पैंसेजर फुल जा रही है। वहीं हीराकुंड एक्सप्रेस में भी पैर रखने की जगह नहीं है। आलम यह है कि चैतुआ एक दिन पहले शाम को रेलवे स्टेशन पर पहुंच जाते हैं और अगले दिन दोपहर में 2 बजे ट्रेन में सवार होते हैं। फिर भी भीड़ में कुछ लोग ट्रेन में सवार नहीं हो पाते तो दो-दो दिन तक इंतजार करना पड़ता है।

चंदिया के पास के गांव के मुरारी, लक्ष्मी, रचना बताते हैं सभी लोग कटाई का काम पूरा करके वापस लौट रहे हैं। इस साल जल्दी काम खत्म हो गया है। सामान बहुत है इसलिए एक दिन पहले ही रेलवे स्टेशन आ गए थे। ट्रेक्टर-ट्राॅली से गांव से स्टेशन पहुंचे। लेकिन ट्रेन में जगह न होने से चढ़ नहीं पाए। बीना से ही ट्रेन भरी आ रही है। डिब्बे में घुसने की जगह ही नहीं है। अब इंतजार कर रहे हैं अगले दिन ट्रेन में जगह मिली तो जाएंगे। बिलासपुर भोपाल में यात्रा कर रहे प्रकाशचंद ने बताया कि रिर्जवेशन कराया था। लेकिन डिब्बे में बहुत भीड़ है। रिजर्वेशन का कोई मतलब नहीं है। दरवाजे तक लोग बैठे हैं। यहां तक की लोगों ने कपड़े की गोदी बनाकर सोने की व्यवस्था की है। सीटों के नीचे भी लोग सो रहे हैं।

लंबी दूरी की हर ट्रेन फुल, जनरल में सफर करने वालों के न टिकट चैक, न सामान, टिकट लेने वाले मुसाफिर परेशान

ट्रेन में भीड़ के चलते एक युवक ने सोने की जुगाड़ कुछ ऐसी बनाई।

भीड़ बढ़ गई है, ट्रेनों में

जगह नहीं

स्टेशन अधीक्षक राकेश रायकवार का कहना है कि शादी विवाह का समय है। चैतुआ भी कटाई करके लौट रहे हैं। जिससे कम दूरी की ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई है। कई बार लोग छूटने पर ट्रेन खड़ी कराते हैं। लेकिन पहले से ही डिब्बों में ज्यादा सवारी हैं। जिससे डिब्बे में कम लोग घुस पा रहे हैं। चार पांच दिन में स्थिति नार्मल हो जाएगी।