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सालों से झिरिया का काई युक्त पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण

तहसील मुख्यालय से 40 किमी दूर बेतवा नदी के मुहाने पर बसा ग्राम पंचायत बरोदिया में जल स्त्रोत सूखने के बाद गांव में...

Danik Bhaskar | Jun 03, 2018, 04:10 AM IST
तहसील मुख्यालय से 40 किमी दूर बेतवा नदी के मुहाने पर बसा ग्राम पंचायत बरोदिया में जल स्त्रोत सूखने के बाद गांव में जल संकट गहरा गया है।रात दिन ग्रामीण पानी की तलाश में लगे हुए है।गांव में लगे सार्वजनिक हैंडपंप सूख गए हैं, अब ग्रामीणों को पानी के लिए झिरिया ही एक मात्र सहारा है। जिसका गंदा काई युक्त पानी पीने ग्रामीण मजबूर हैं। यह स्थिति इस वर्ष की नहीं है यह तो सालों साल से चली आ रही एक समस्या है। जो मिटने का नाम नहीं ले रही। गांव में हर साल अधिकारी आकर आश्वासन तो देते है लेकिन साफ पानी नहीं देते।जल संकट को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि झिरिया के पास एक नल कूप खनन हो जाए या फिर 4 किमी दूर से बेतवा नदी निकली है वहां से पानी की सप्लाई से जल संकट खत्म हो सकता है।

ग्राम पंचायत बरोदिया की जनसंख्या करीब 3 हजार के आसपास है। जहां गर्मी से पहले से ही गांव में जल संकट गहराने लगता है। तब गांव के बाहर प्राचीन शंकर मंदिर के पास बनी झिरिया का गंदा काई युक्त पानी से ग्रामीण अपनी व्यास बुझाते है। जहां पहुंचने के लिए रास्ता भी नहीं है। वहां पत्थरों के बीच में बने कच्चे रास्ते से होकर ग्रामीण आते जाते है जो खतरों से खाली नहीं है।

गांव की कपूरी बाई, अनीता ने बताया कि कई सालों से जल संकट झेल रहे हैं। हर साल अधिकारी आते है और आश्वासन देकर कागजों पर कुछ लिख कर ले जाते है जो फिर अगली गर्मी में ही नजर आते है। यह सिलसिला कई सालों से चला आ रहा है। कृष्णकांत गोस्वामी ने बताया कि गांव की अपेक्षा एक नलकूप झिरिया के पास खनन हो जाएं तो उसमें पर्याप्त पानी आ सकता है जिससे पूरे गांव का जल संकट खत्म हो सकता है। झिरिया में पानी भरने आई गांव की जनपद सदस्य राजबाई ने बताया कि पानी को लेकर बैठक में कई बार शिकायत की लेकिन आज तक स्थिति नहीं सुधरी।

बीना। ग्राम बरोदिया में झिरिया का गंदा पानी काई युक्त भरने के लिए लगी ग्रामीणों की भीड़। दूसरे चित्र में पथरीले रास्ते से होकर पानी लेकर गांव की ओर जाती महिलएं।

कई बार की शिकायत

गांव के कृष्णकांत गोस्वामी ने बताया कि गांव की समस्या को लेकर कलेक्टर,एसडीएम,जनपद सीईओ तक से दर्जनों शिकायते कर चुके हंै लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है उन्होंने बताया कि इसी माह में 4 मई को एसडीएम एवं 8 मई सीईओ को ग्रामीणों के साथ ज्ञापन दिया था। गांव के रूप्पा ने बताया कि शासन घर- घर में शौचालय तो अनिवार्य कर रही है लेकिन पीने के पानी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। पीने को पानी की समस्या है शौचालय के लिए पानी कहां से लाएं।

सचिव सस्पेंड,सहायक सचिव हड़ताल पर


पत्थरों के बीच से बने कच्चे रास्ते से होकर आते- जाते हैं