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स्टेडियम में हरी घास पर खेलेंगे खिलाड़ी,लोग जिम में करेंगे कसरत

बिस्टान रोड स्थित स्टेडियम पर जल्द ही घास उगाई जाएगी। यहां हरी घास पर खिलाड़ी क्रिकेट, कबड्‌डी, हॉकी सहित अन्य खेल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 18, 2018, 02:10 AM IST

बिस्टान रोड स्थित स्टेडियम पर जल्द ही घास उगाई जाएगी। यहां हरी घास पर खिलाड़ी क्रिकेट, कबड्‌डी, हॉकी सहित अन्य खेल खेलेंगे। साथ ही आम लोग जिम में कसरत कर सकेंगे। इसका प्रस्ताव बनाकर इंदौर भेजा गया है। जल्द ही मंजूरी मिल सकती है। पिछले दिनों भोपाल की टीम ने निरीक्षण भी किया था। संभवत: एक सप्ताह में काम शुरू हो सकता है। स्डेडियम की देखरेख खेल एवं युवक कल्याण विभाग करता है।

यहां घास लगाएगा। इसकी तैयारियां चल रही है। भोपाल की टीम ने मैदान का निरीक्षण किया है। प्रभारी जिला खेल अधिकारी एएसपी अंतरसिंह कनेश ने बताया प्रस्ताव इंदौर में पेंडिंग है। जल्द पास होने की उम्मीद है। इसके बाद कम शुरू हो जाएगा। स्टेडियम पर रोजाना 200 से ज्यादा खिलाड़ी विभिन्न अभ्यास करते हैं। इसके अलावा सालभर खेल संगठन व विभागीय खेल गतिविधियां होती हैं।

मिट्टी मंे खेल रहे खिलाड़ी जल्द ही यहां हरी घास पर खेल सकेंगे।

ओपन जिम भी खुलेगा

11 लाख रुपए से बनेगी बाउंड्रीवाल

यहां 11 लाख 80 हजार रुपए से बाउंड्रीवाल बनेगी। इसकी मंजूरी हो गई है। जल्द ही पीडब्ल्यूडी काम शुरू करेंगी। फिलहाल एक हिस्से में चार फीट बाउंड्रीवाल है। इससे आए दिन असामाजिक तत्व घुस जाते हैं।

जल्द काम शुरू होगा

यहां आमलोगों के लिए ओपन जिम का भी प्रस्ताव बनाया है। इसका निर्माण स्टेडियम के एक कोने में किया जाएगा। इसमें सुबह और शाम जिम खुलेगा। इसका काम बारिश के बाद शुरू होगा।

तालाब की मिट्‌टी ढूंढेंगे

हरी घास के लिए जरूरी काली मिट्‌टी की जरूरत होती है। यह काली मिट्‌टी तालाब से निकालकर लाई जाएगी। इसलिए टीम ने निरीक्षण कर खरगोन के आसपास के तालाबों की भी जानकारी जुटाई गई है, क्योंकि तालाबों से मिट्‌टी लाकर यहां डाली जाएगी।

प्रस्ताव भेजा है। जल्द हरी घास सहित जिम व बाउंड्रीवाल का काम शुरू होगा। खिलाड़ियों के बेहतर खेल मैदान मिलेगा। - अंतरसिंह कनेश, प्रभारी जिला खेल अधिकारी

हेलीपेड बनने पर संशय, सीएम का संभावित दौरा

स्टेडियम केवल खेलकूद के लिए है। यहां किसी भी प्रकार का राजनैतिक, सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम नहीं हो सकता है। अब यहां हेलीपेड नहीं बन पाएगा। प्रशासन को अन्य जगह हेलीपेड का चयन करना पड़ सकता है।

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