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17 साल पुरानी इंदौर पासिंग अवैधानिक बैंडबाजा गाड़ी-कार की भिड़ंत, 13 घायल

जिला मुख्यालय से करीब तीन किमी दूर खरगोन-इंदौर रोड पर केंद्रीय विद्यालय के सामने 17 साल पुरानी बैंडबाजे की गाड़ी व...

Danik Bhaskar | Feb 10, 2018, 02:20 AM IST
जिला मुख्यालय से करीब तीन किमी दूर खरगोन-इंदौर रोड पर केंद्रीय विद्यालय के सामने 17 साल पुरानी बैंडबाजे की गाड़ी व कार में आमने-सामने की तेज टक्कर हुई। हादसे में कार सवार तीन व बैंडबाजे की गाड़ी में सवार सात लोग घायल हो गए। कार में सवार तीन लोगों को आधे घंटे बाद गंभीरावस्था में इंदौर रैफर किया गया।

दोनों वाहनों में लहराकर भिड़ंत हुई है। बैंडबाजे की गाड़ी इंदौर आरटीओ से 2001 की पासिंग है। उसे व्यवसायिक तौर पर बैंडबाजे के लिए तैयार कर परिवहन में इस्तेमाल हो रहा था। बैंडबाजे की गाड़ी में सवार लोगों का कहना है कार का चालक तेज व लहराकर वाहन चला रहा था। झपकी लगने या नशे में वाहन चलाने और बैंडबाजे के वाहन की कांच और धातु की सतह चमकीली होन के कारण हादसे की आशंका जताई जा रही है।

जोरदार भिड़ंत के बाद बैंड गाड़ी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई।

सिर व पेट में गंभीर चोट होने से किया रैफर

मेनगांव टीआई धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कसरावद की बैंडबाजे की गाड़ी (एमपी09वी-2479) बिस्टान से शादी समारोह से लौट रही थे। रात करीब 1.30 बजे केंद्रीय विद्यालय के पास सामने से आ रही कार (एमपी10सीए-2209) से भिड़ंत हो गई। कार सवार राधाकृष्ण नटवरलाल नीमा (50) निवासी गुरुवा दरवाजा बुरहानपुर, प|ी सुनीता (45), बेटा आशु (21) घायल हो गए। बैंडबाजे की गाड़ी में सवार राजा कमरू (18), अफजल इब्राहिम (19), सद्दाम सिराज (27) जुबैर खान (28) निवासी कसरावद, भागीरथ चंपालाल (40) रमेश बुदिया (55) व मांगीलाल उदिया (59) निवासी करोंदिया कसरावद घायल हो गए। सभी को जिला अस्पताल में भर्ती किया है। बालकृष्ण ने प|ी सुनीता को सिर व पेट में गंभीर चोट आई। जबकि सोनू को पैर व मुझे सिर में चोट आई।

ऐसी गाड़ी बनाकर नहीं कर सकते इस्तेमाल


भिड़ंत में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

30 से ज्यादा कंडम जीप बना ली बैंडबाजे की गाड़ी

जिले में कई बैंड संचालक कंडम जीप को बैंडबाजे की गाड़ी पर कांच व चमकदार सतह बनाकर व्यवसायिक उपयोग कर रहे हैं। परिवहन विभाग के नियमों में यह अवैधानिक है। इसका व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। गाड़ी पर बैंडबाजे के अलावा 10-15 कर्मचारी भी बैठ जाते हैं। वाहन में बेहतर बैठक व्यवस्था नहीं होती है। परिवहन विभाग में केवल चारपहिया वाहन के नाम से रजिस्ट्रेशन होता है। इसमें बैंडबाजे की गाड़ी के पंजीयन जैसा कोई प्रावधान नहीं है। ये वाहन ज्यादातर कंडम है। गांवों तक पहुंच रहे हैं। रात में बैंडबाजे के वाहनों की कांच व चमकदार सतह चमकने से सामने से आ रहे वाहन के ड्राइवर को साफ मुश्किल होता है। इन वाहनों का न फिटनेस होता है न कागजात।