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भागवत का आश्रय लेने वाला स्वयं भगवान होता है

भागवत का आश्रय लेने वाला स्वयं भगवान होता है भास्कर संवाददाता | बिस्टान यहां भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 04, 2018, 02:20 AM IST

भागवत का आश्रय लेने वाला स्वयं भगवान होता है

भास्कर संवाददाता | बिस्टान

यहां भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को पं. दिलीपचंद्र तारे ने कहा लोभ बढ़ने से पाप बढ़ता है। पाप से प्राणी नर्क के गर्त में चला जाता है। अधर्मी जीवों का कल्याण करने के लिए शिवजी के अंश रूप में शुकदेवजी प्रकट हुए। उन्होंने पांडव कुल के राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाई। पं. तारे ने कहा काल रूपी सर्प से बचने के लिए भागवत पुराण की शरण लेना चाहिए। भागवत कथा संजीवनी बूटी है। भागवत का आश्रय लेने वाला स्वयं भगवान होता है। इसलिए कलयुग में भक्ति व भावना की प्रधानता है।

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