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बिस्टान नपं की अधिसूचना जारी होने पर खुशियां मनाई, निकाय में 5 पंचायत के 12 गांव होंगे शामिल

बिस्टान को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने के प्रयासों को कुछ हद तक सफलता मिली है। मप्र शासन ने इसको लेकर अधिसूचना जारी...

Danik Bhaskar | Jun 09, 2018, 02:25 AM IST
बिस्टान को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने के प्रयासों को कुछ हद तक सफलता मिली है। मप्र शासन ने इसको लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। नई नगर पंचायत में बिस्टान सहित 5 पंचायत के 12 गांव शामिल रहेंगे। अधिसूचना 16 अप्रैल को हुई पर खबर अब मिली। ग्रामीणों ने आतिशबाजी कर खुशी जाहिर की।

मप्र शासन की अधिसूचना के अनुसार बिस्टान, बन्हेर, अनकवाड़ी, जगन्नाथपुरा व घट्‌टी पंचायत के महूमांडली, आवली, डोल, गोपालपुरा, लोनारा, रतनपुरा, जैतापुर गांव की 4625 हैक्टेयर भूमि नगर पंचायत के अधीन होगी। इन गांवों की 20 हजार आबादी को नपं की सुविधाओं का लाभ मिलेगा। गांव को नपं का दर्जा दिलाने के लिए जनप्रतिनिधि लगातार प्रयास कर रहे थे। 15 जनवरी 17 को बिस्टान उद्वहन नहर परियोजना के भूमिपूजन में शामिल होने आए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के समक्ष सांसद सुभाष पटेल ने मंच से बिस्टान को नपं का दर्जा देने की मांग उठाई थी। भाजपा अजजा मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र पटेल ने जिले से भोपाल स्तर तक प्रयास किए। प्रतिनिधिमंडल के साथ नगरीय विकास विभाग को क्षेत्र की जानकारियां उपलब्ध करवाई। प्रभारी मंत्री विजय शाह ने भी बिस्टान पंचायत में नगर पंचायत की संभावना को लेकर नगरीय प्रशासन विभाग को अवगत कराया। विधायक विजयसिंह सोलंकी ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण याचिका लगाई थी। लाभांवित पंचायतों के सरपंच ने एसडीएम व तहसीलदार को समय-समय पर जानकारी उपलब्ध करवाई। तत्कालीन प्रभारी मंत्री अर्चना चिटनीस ने भी बिस्टान को नपं का दर्जा दिलाने का आश्वासन दिया था।

नपं की अधिसूचना जारी होने पर खुशियां मनाई।

सुविधाएं बढ़ेंगी


जल्द प्रक्रियाएं पूरी करेंगे


बन्हेर तिराहे पर मनाई खुशी

अधिसूचना जारी होने से ग्रामीणों में खुशी है। क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं ने बन्हेर तिराहे पर आतिशबाजी की। एक-दूसरे को मिठाई खिलाई।

अभी यह स्थिति

वर्तमान में पंचायत को पंच परमेश्वर व राज्य वित्त आयोग की राशि ही विकास के लिए मिलती है। राशि के अभाव में सफाई व पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। सफाई कामगार व वॉटरमैन को वेतन तक भुगतान नहीं हो पा रहा है। कचरा वाहन तक नहीं है। सामाजिक संस्थाओं ने कचरा वाहन को लेकर गांव बंद तक की चेतावनी दी थी।

5 साल से संस्थाएं कर रही थी प्रयास

सामाजिक संस्थाएं व संगठन भी 5 साल से प्रयासरत थे। सामाजिक संस्था क्रांतिकारी टंट्या मामा भील सेवा संस्थान, संजीवनी सेवा संस्थान, स्वामी विवेकानंद सेवा समिति, व्यापारी संघ, भारतीय किसान संघ आदि ने लगातार शासन व डूडा से पत्र व्यवहार किया।

यह होंगे फायदे

नपं का दर्जा मिलने के बाद स्वच्छता व पेयजल के लिए अलग से फंड मिलेगा। कचरा वाहन व पेटियाें के साथ पेयजल के लिए नई योजना स्वीकृत होने की उम्मीद है। नगरीय प्रशासन से अनुदान मद में राशि मिल सकेगी। साथ ही विशेष निधि में मिली राशि परिषद की आवश्यकतानुसार खर्च की जा सकेगी। प्रशासनिक पकड़ भी मजबूत होगी।