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सामुदायिक भवन में थाना, बरामदे में बैठकर पुलिसकर्मी कर रहे कामकाज

एक साल पहले चौकी को थाने का दर्जा दे दिया गया, लेकिन भवन का निर्माण नहीं होने से फरियादी व पुलिसकर्मियों को परेशानी...

Dainik Bhaskar

Apr 29, 2018, 03:25 AM IST
सामुदायिक भवन में थाना, बरामदे में बैठकर पुलिसकर्मी कर रहे कामकाज
एक साल पहले चौकी को थाने का दर्जा दे दिया गया, लेकिन भवन का निर्माण नहीं होने से फरियादी व पुलिसकर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। थाने के एसआई व एएसआई बरामदे में टेबल लगाकर फरियादी की एफआईआर, विवेचना व गवाहों के बयान ले रहे हैं। रिकॉर्ड रूम, शस्त्रागार, मालखाना व कम्प्यूटर रूम भी थाने के लिहाज से छोटे हैं। थाने को मिले फर्नीचर को एक के ऊपर एक रखकर स्टाफ को काम करना पड़ रहा है। यहां पुलिस का अपना भवन नहीं है। कुछ समय पहले सामुदायिक भवन में जनसहयोग से मालखाना, कारागृह आदि का निर्माण करवाकर चौकी स्थानांतरित की गई थी। चौकी का भवन स्वीकृत हुआ। लेकिन इसी दौरान थाने का दर्जा मिलने से चौकी भवन का निर्माण भी नहीं हो सका। अप्रैल 17 में चौकी को थाने का दर्जा मिला। लेकिन भवन बनाने के नाम पर अब तक विभागीय स्तर पर कागजी कार्रवाई ही हुई है। हालांकि गृह विभाग के पुलिस अधोसंरचना विकास के संबंधित अफसरों की टीम लोकेशन देख गई है। लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर पटवारी जितेंद्र सोलंकी दो माह पहले खसरा नंबर 314/2, हल्के 35 की जमीन 1.96 हैक्टेयर के पेपर भी पुलिस को दे चुके हैं।

बरामदे में बैठ पुलिसकर्मी काम कर रहे हैं।

एएसआई, प्रधान आरक्षक व आरक्षक के पद खाली

थाने के भवन के साथ ही यहां स्टॉफ की कमी से परेशानी हो रही है। थाने पर एएसआई, प्रधान आरक्षक व आरक्षक के 2-2 पद रिक्त हैं। इसके साथ महिला अधिकारी भी नहीं है। महिला संबंधित अपराधों को लेकर अन्य थाने से अधिकारी को बुलाना पड़ता है। थाना क्षेत्र के 64 गांव में एक करीब एक लाख आबादी है।

सड़क किनारे जब्त वाहन

दुर्घटना स्थलों से लाए गए चार पहिया वाहन चित्तौडगढ़-भुसावल स्टेट हाइवे किनारे खड़े किए जा रहे हैं। इससे राहगीरों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है। जब्त दोपहिया वाहन तो चौकी के दरवाजे के पास तक लगे हुए हैं।

चल रही कागजी कार्रवाई


महिला के लिए इंतजाम नहीं

महिलाओं का अलग से बंदीगृह नहीं है। साथ ही फरियादी महिला के लिए थाने में सुविधाघर की भी व्यवस्था नहीं है। जबकि महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर सरकार द्वारा यह सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

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