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रोजगार के हुनर के साथ संस्कृत बोलना भी सिखाया

Biyawara News - क्षेत्र में ग्रामीण पृष्ठ भूमि की शहर में आ बसी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अग्रवाल सखी क्लब ने नई मिसाल कायम...

Dainik Bhaskar

Mar 08, 2018, 04:20 AM IST
रोजगार के हुनर के साथ संस्कृत बोलना भी सिखाया
क्षेत्र में ग्रामीण पृष्ठ भूमि की शहर में आ बसी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अग्रवाल सखी क्लब ने नई मिसाल कायम की है। अपने परिवारों से बचे समय को आजीविका में लगाकर, कंधे से कांधा मिलाने वाली करीब 500 महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने में क्लब की खास भूमिका रही है। क्लब का गठन अग्रवाल महासभा की पूर्व जिलाध्यक्ष ज्योति मंगल व प्रीति गोयनका की पहल पर वर्ष 2015 में किया गया। क्लब से जुड़ीं आरती मंगल, मेघना अग्रवाल, संध्या, प्रीति, अशविता अग्रवाल, कविता मंगल, आस्था, सोनल, नेहा ने रोजगार उन्मूलक प्रशिक्षण की गतिविधियां चलाकर असाक्षर व जरूरतमंद महिलाओं को दिवाली स्पेशल डेकोरेटिव क्लास, सलाद डेकोरेशन, कुकिंग, बेकिंग, प्रोफेशनल 3D रंगोली बनाने, ईकोफ्रेंडली मूर्तियां बनाने सहित अन्य कई तरह के प्रशिक्षण दिलाए हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए क्लब इन महिलाओं के लिए निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कैंप भी लगाता है। सखियों का कहना है कि इन क्लासेस और प्रशिक्षण के जरिए महिलाओं को रोजगार दिलाकर उन्हें आत्म निर्भर बनाने में मदद करने से खुद का कांफिडेंस काफी बढ़ गया है। अब वह बेझिझक पुरुष प्रधान समाज में अपने प्रोग्राम खुद आयोजित व संचालित कर पाती हैं।

अनपढ़ महिलाओं को सिखाई वेदों की

भाषा संस्कृत बोलना

प्रदेश का पहला संस्कृत में बातचीत करने वाला गांव बना झिरी

दिनेश दुबे| संडावता

जिले में सिर्फ व्यवसाय ही नहीं बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी कई महिलाओं ने सराहनीय पहल की है। एक महिला हैं जशपुर छत्तीसगढ़ निवासी विमला तिवारी। ये संस्कृत में संभाषण की कला सीखने के बाद भोपाल में महिलाओं को संस्कृत बोलना सिखाने लगी थीं। वर्ष 2003 में संस्कृत भारती के जरिए राजगढ़ के झिरी गांव आईं और अनपढ़ महिलाओं को साक्षर करने के साथ ही उन्हें संस्कृत में बोलना सिखाना शुरू किया। श्रीमती तिवारी ने सुबह बालकों, दोपहर में बालिकाओं और शाम को महिलाओं की कक्षाएं लीं। संगठन के अन्य आचार्यों के साथ मिल कर झिरी को उन्होंने प्रदेश का पहला संस्कृत में बातचीत करने वाला गांव बनाया। शासकीय शिक्षक श्रीमती तिवारी के अनुसार उन्होंने 1200 की आबादी वाले इस गांव की 350 महिलाओं व बालिकाओं को संस्कृत में बातचीत सिखाई है।

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