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ये अजनार नदी है...धार टूटी...काई जमने से दिखने लगी घास के हरे मैदान जैसी

यह फोटो किसी घास के मैदान का नहीं बल्कि एक जमाने में शहर की प्यास बुझाने वाली अजनार नदी का पाट है। असल में लगातार...

Danik Bhaskar | May 01, 2018, 02:30 AM IST
यह फोटो किसी घास के मैदान का नहीं बल्कि एक जमाने में शहर की प्यास बुझाने वाली अजनार नदी का पाट है। असल में लगातार अतिक्रमण, अनदेखी के चलते इसका अस्तित्व लगातार खतरे में है। गांव आंदलहेड़ा के पास जंगल से शुरु होकर यह नदी राजगढ़ के नजदीक से होते हुए राजस्थान के मनोहरथाना तक जाती है। इसके किनारे करीब 15 गांव बसे हैं। लेकिन कुछ सालों से इसके उथले होने से बरसात के बाद से इसकी धारा जगह-जगह विछिन्न होकर घाटों के आसपास सिमट जाती है। 4-5 साल पहले नदी के ब्यावरा में गहरीकरण के लिए स्थानीय लोगों ने प्रयास किए थे। लेकिन इस जन अभियान को सरकारी सपोर्ट न मिलने से यह सिमट कर रह गया। इस तरह शहर के इर्द-गिर्द करीब 5 किमी इलाके से गुजरी यह नदी संकट में है।

यह है स्थिति

40 साल पहले इस पर बने दो सो बांध से होती थी शहर में पानी सप्लाई

07 प्राचीन घाट बने हैं नदी किनारे शहर में स्नान के लिए

05 किमी, यानि मेला मैदान से रेलवे ब्रिज तक शहर के भीतर बहती है नदी

05 गंदे नालों का पानी मिल रहा नदी में, इससे प्रदूषित होता है इसका जल

गांव आंदलहेड़ा के पास जंगल से शुरू होकर यह नदी राजगढ़ के नजदीक से होते हुए राजस्थान के मनोहर थाना तक जाती है, नदी के किनारे बसे हैं 15 गांव

ब्यावरा नगर के इंदौर नाके के पास धार टूटने और काई जमने से घास के हरे मैदान सी नजर आने लगी अजनार नदी। फोटो| गोविंद सोनी।

घास जैसी नजर आती है जलकुंभी

नदी की मुख्य धारा सूख गई है। अब इंदौर नाका-पंचमुखी हनुमान मंदिर के आसपास कुछ जगहों पर गड्ढों में पानी भरा है। इस पर भी काई की परत चढ़ चुकी है। जिससे दूर से देखने पर यह हरा घास का मैदान नजर आती है, जो इन गर्मियों में आंखों को खासा सुकून देती है।

कारण... अतिक्रमण और प्रदूषण से बने हालात