Hindi News »Madhya Pradesh »Burhanpur» 32 साल पहले हादसे में मौत, पुनर्जन्म लेकर परिवार से मिलने पहुंचा बालक, पुराने घर और चाचा को पहचाना, कुछ घटनाएं भी बताईं

32 साल पहले हादसे में मौत, पुनर्जन्म लेकर परिवार से मिलने पहुंचा बालक, पुराने घर और चाचा को पहचाना, कुछ घटनाएं भी बताईं

5 अप्रैल 1986 को निंबापुर में ट्रैक्टर के पहिए में दबने से हुई थी चार साल के बालक की मौत, 15 जून 2005 को बंभाड़ा में लिया...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:35 AM IST

32 साल पहले हादसे में मौत, पुनर्जन्म लेकर परिवार से मिलने पहुंचा बालक, पुराने घर और चाचा को पहचाना, कुछ घटनाएं भी बताईं
5 अप्रैल 1986 को निंबापुर में ट्रैक्टर के पहिए में दबने से हुई थी चार साल के बालक की मौत, 15 जून 2005 को बंभाड़ा में लिया पुनर्जन्म

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर/सिरपुर

13 साल का सूर्यवृत। बंभाड़ा में जन्मा। कभी निंबापुर नहीं गया लेकिन अपना गांव उसे ही बताता। वहां की बातें सुनाता। घटनाएं दोहराता। रविवार को वह मां के साथ निंबापुर पहुंचा। गलियों में घूमा। इतने घरों में से एक पुराने घर को अपना बताया। एक व्यक्ति को अपने चाचा के रूप में पहचाना। लेकिन नाम नहीं बता सका। पहली बार आए इस गांव से जुड़ी कई बातें और घटनाएं बताई। इन्हें सुनकर उसका परिवार और पूरा गांव हैरत में पड़ गया। गांव के अनिता और गोविंद सिंह ने कहा यह तो हमारे बेटे योगेश की कहानी है। चार साल की उम्र में उसकी 5 अप्रैल 1986 को ट्रैक्टर के पहिए के नीचे दबकर मौत हो गई थी।

बंभाड़ा निवासी मिर्च-मसाला के व्यवसायी सुधाकर चौधरी और विनिता के यहां 13 साल पहले बेटा जन्मा। नाम रखा सूर्यवृत। होश संभालने और स्कूल में प्रवेश के दौरान पूछताछ में वह माता-पिता का नाम तो सही बताता लेकिन अपना गांव निंबापुर बताता। उम्र बढ़ने के साथ अन्य बातें और घटनाएं भी दोहराने लगा। किसी ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। निंबापुर से बंभाड़ा ब्याह कर आई रिंकी ने भी ये बातें सुनीं। उसने निंबापुर जाकर मायके में यह बात बताई। गोविंद सिंह जाधव तक बातें पहुंचीं। 32 साल पहले हादसे में बेटे की मौत और उससे जुड़ी बातें सुनकार वह सूर्यवृत से मिलने पहुंचे। उसकी बातें सुनकर हैरत में पड़ गए।

वर्तमान मां ने दुलारा, पहली मां ने खिलाया गुलाब जामुन

वर्तमान मां वनिता ने बेटे सूर्यवृत काे दुलारा तो पहली मां अनिता ने गुलाब जामुन खिलाकर मुंह मीठा कराया।

रविवार दोपहर सभी लोग गोविंद सिंह के सिरपुर स्थित पुश्तैनी मकान पहुंचे। यहां सूर्यवृत को वर्तमान मां वनिता ने दुलारा तो पहली मां अनिता ने गुलाब जामुन खिलाया। योगेश के पुराने फोटो दिखाए। सूर्यवृत के चार साल के फोटो और इन फोटो में दोनों का चेहरा भी मिलता-जुलता नजर आया। योगेश गोविंद सिंह का इकलौता बेटा था। उसकी मौत के बाद दो बेटे और बेटी ने जन्म लिया।

पुराने फोटो से मिलता-जुलता दिखा चेहरा

सिर पर बड़ा पहिया घूमता नजर आता है

निंबापुर पहुंचे सूर्यवृत ने देखते ही चाचा चरणसिंह जाधव काे पहचान लिया। लेकिन उनका नाम नहीं बता पाया। उसने रोड पर भैंसों का एक बंद पड़ा टपरा, आसपास बिखरा कचरा, बड़ा स्कूल, आसपास नीम के पेड़ दिखने की बात कही। उसने कहा सिर पर बड़ा पहिया घूमता दिखता है। आज भी यह धुंधला-सा नजर आता है। गोविंद सिंह ने बताया यह ट्रैक्टर का पहिया है। इसके नीचे दबकर ही बेटे योगेश की मौत हुई थी। वह महज चार साल का था। लेकिन सूर्यवृत को यह बातें कैसे पता। पूरी कहानी को पुनर्जन्म मानकर गांव वाले भी सूर्यवृत की बातें सुनने पहुंचे।

ऐसी बातों को विज्ञान नहीं मानता

मनोचिकित्सक मेघा भिड़े ने कहा विज्ञान ऐसी बातों को नहीं मानता। लेकिन लाखों में ऐसा एक केस कभी-कभार सामने आता है जिसमें व्यक्ति को पिछले जन्म की बातें याद रहती हैं।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Burhanpur

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×