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टीवी देखकर परिवारों में बंजर हो रही चित्त चेतना

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर अयोध्या धाम (नेहरू स्टेडियम) पर श्रीराम कथा के तीसरे दिन साध्वी ऋतंभरा ने कहा हमारे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 03:20 AM IST

टीवी देखकर परिवारों में बंजर हो रही चित्त चेतना
भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

अयोध्या धाम (नेहरू स्टेडियम) पर श्रीराम कथा के तीसरे दिन साध्वी ऋतंभरा ने कहा हमारे भारत में विवाह महिला-पुरुष के मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि सृष्टि के संवर्धन के लिए कराया जाता रहा है।

देवकी, कौशल्या, जीजाबाई सहित अन्य ने अपनी कोख से ऐसे महापुरुषों को जन्म दिया। जिन्होंने राष्ट्र और धर्म की रक्षा कर गौरवशाली परंपराओं को स्थापित करके दिखाया। आज माता-पिता की अज्ञानता से रोगी, विक्षिप्त और दुःखी बच्चे जन्म ले रहे हैं। हिन्दुस्तान में सोलह संस्कारों में से एक गर्भाधान संस्कार भी होता है लेकिन आज इन सोलह संस्कारों से युवा पीढ़ी का विमुख होना भी देश, समाज के लिए शुभ संकेत नहीं है। टीवी चैनलों द्वारा परोसे जा रहे दृश्य और कहानियों को देखकर परिवारों में चित्त चेतना बंजर होती जा रही है, जिससे समाज संवेदनहीन होकर परंपराओं और संस्कृति को भुलाता जा रहा है।

साध्वी ऋतंभरा ने कहा नारद तो हमारा मन है। जीवन का संयम करना जरूरी है। हमारी परंपराओं में ब्रह्मचर्य और गृहस्थी के 25-25 वर्ष के बाद 60 की आयु में वनगमन, संयस्थ का स्थान रहा। संयस्थ अर्थात मालकियत छोड़ना नहीं। मोह माया से मुक्ति का तात्पर्य होता था। आज हम दहेज में कार, अलमारी, फ्रीज जैसे लोहे को बहु के साथ दहेज में लाते हैं तो परिवार शनि के प्रकोप से पीड़ित क्यों नहीं रहेगा। दहेज दुःख का कारण है। दीदी मां ने कहा कि सृष्टि और प्रकृति का परस्पर संबंध रहा है। प्रकृति से हम अपनी मनमानी और प्रवृत्ति अनुरूप छेड़छाड़ करके सृष्टि द्वारा सृजित रचनाओं को विकृत करते जा रहे हैं। भारत की बहनों याद करों अपनी रसोई में रस होता था। आज किचन में किच-किच ने वास कर लिया है। रूठना कोई नयी बात नहीं पर राजस्थान में रूठना और मनाना भी उत्सव स्वरूप में हुआ करता था। जब सास और दादी सास को मनाने बहुए चौपाल और कुंओं की मेढ़ पर आरती सजाकर ससम्मान उन्हें मनाती थी। ऐसे पवित्र बंधन और परंपराओं से प्रभावित रही हैं, अपनी भारतीयता।

साध्वी ऋतंभरा

अयोध्या धाम नेहरू स्टेडियम पर तीसरे दिन साध्वी ऋतंभरा ने कहा-

अयोध्या धाम पर श्रीराम कथा श्रवण करने पहुंचे हजारों श्रद्धालु।

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Web Title: टीवी देखकर परिवारों में बंजर हो रही चित्त चेतना
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