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खतरनाक हैं आंगनवाड़ियां, नालियां फांद हाथों के सहारे चढ़ रहे सीढ़ियां

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर महिला एवं बाल विकास विभाग अब भी बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर नहीं है। क्योंकि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:25 PM IST

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

महिला एवं बाल विकास विभाग अब भी बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर नहीं है। क्योंकि अधिकांश आंगनवाड़ियां जर्जर भवनों में चल रही है। दीवारों की स्थिति ऐसी है कि कभी भी गिर सकती है। शहर में ऐसी दर्जनों खतरों में आंगनवाड़ियां संचालित है। पिछले 18 साल से ये ऐसी ही स्थिति में चल रही है।

जिलेभर में कुल 815 आंगनवाड़ियां संचालित है। विभाग 799 पक्के भवनों का दावा कर रहा है। जबकि हकीकत में मुश्किल से 500 आंगनवाड़ी ही पक्के भवन में चल रही है। अपने रिकार्ड में यह सिर्फ 11 कच्चे भवन को दर्शा रहे हैं लेकिन इससे कई ज्यादा आंगनवाड़ी कच्चे भवन में लग रही है। इनके रिकार्ड में 243 किराए के भवन में केंद्र संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश केंद्र कार्यकर्ताओं के घरों में लग रही है। 559 केंद्र विभागीय और अन्य शासकीय भवनों में संचालित है। 13 ऐसे है जो न सरकारी है न किराए पर है। यहां 76110 बच्चे आंगनवाडिय़ों में दर्ज है। जिनमें मुश्किल से 50000 भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। तीन महीने से अधिकांश आंगनवाडिय़ों में जरूरी पोषण आहार नहीं पहुंचा है।

गेट गिरने से एक बच्चे की मौत हो चुकी है लेकिन अब भी उपेक्षित हैं आंगनवाड़ियां

सीढ़िया जर्जर, हाथ-पैर के सहारे चढ़ते हैं बच्चे

इतवारा आंगनवाड़ी क्रमांक 2 में प्रवेश के लिए बच्चों को मुश्किलों से गुजरना पड़ रहा है। सीढ़ियां चढ़ने से पहले बच्चों को नाली फांदना पड़ रही है। मुश्किल से नाली फांदकर हाथ, पैर के सहारे से नन्हें-मुन्ने आंगनवाड़ी में प्रवेश कर रहे हैं। इस कोशिश में बच्चे गिरकर घायल हो जाते हैं। इनकी ओर किसी का ध्यान भी नहीं रहता है। इस भवन की भी दीवारें कच्ची है। यहां 70 बच्चे दर्ज हैं। बुधवार को बच्चे पहुंचे तो मशक्कत कर नाली फांदी और सीढ़ियां चढ़कर प्रवेश किया।

जिलेभर के जर्जर भवनों की स्थिति पता कर रहे हैं। ऐसे भवन चिह्नित कर किराए के पक्के या सरकारी भवनों में शिफ्ट करने के प्रयास कर रहे हैं। करीब 3 से 4 दिन में कार्रवाई करेंगे। - सौरभ सिंह, कार्यक्रम अधिकारी एकीकृत बाल विकास सेवा

आंगनवाड़ी केंद्र में 101 में से आ रहे 20 बच्चे

आंगनवाड़ी क्रमांक 2 नागझिरी 18 साल से एक जर्जर भवन में चल रही है। दीवारें कच्ची है। चढ़ने के लिए सीढ़ियां टूटी हुई है। किसी का पैर पड़े तो वह गहरी नाली में गिर सकता है। आंगनवाड़ी में तीन सप्ताह से हलुआ, बाल बाहार में सुजी, मूंगदाल, चावल के पैकेट नहीं आए हे। गर्भवतियों के लिए सोयाबर्फी, बेसन के लड्‌डू के पैकेट नहीं मिले है। यहां 101 बच्चे दर्ज है। इनमें से 15 से 20 बच्चे ही आ रहे हैं। 26 गर्भवतियां वर्तमान में चिह्नित हैं।

जर्जर परकोटे के नीचे चल रही आंगनवाड़ी

सरदार पटेल वार्ड मेंं आंगनवाड़ी क्रमांक 3 कार्यकर्ता सुरेखा राठौर के पुराने घर में चल रही है। केंद्र से सटकर ऐतिहासिक परकोटे के गेट का हिस्सा जर्जर स्थिति में है। किसी भी दिन गिर सकता है। यहां पर 70 से ज्यादा बच्चे दर्ज हैं। बच्चे आंगनवाड़ी के बाहर खेलते रहते हैं। यहां का भवन भी जर्जर है। शहर में कई जगह भरी भरकम परकोटे के हिस्से गिर चुके हैं। यहां कभी भी हादसा हो सकता है। अफसरों को ध्यान देना चाहिए।

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