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नदी सूखी तो दिखा 900 साल पुराना शिव मंदिर व 300 साल पुराना हाथी दिखा

बुरहानपुर में ताप्ती नदी के किनारे पर कुल 13 घाट है। इतने घाट जलगांव, भुसावल व सूरत में भी नहीं है। तब मैंने खोज शुरू कर

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 12, 2018, 08:36 AM IST

नदी सूखी तो दिखा 900 साल पुराना शिव मंदिर व 300 साल पुराना हाथी दिखा

बुरहानपुर(एमपी)।शहर में यूं तो फारुकीकाल और मुगलकाल में अनेकों ऐतिहासिक इमारतें, मंदिर-मस्जिद बनवाए गए। इनमें शाही जामा मस्जिद, ताप्ती के घाट और मंदिर आज भी अपने ऐतिहासिक महत्व और सुंदरता के कारण विशेष स्थान रखते हैं। ताप्ती नदी के सूखने पर हीरा-मोती घाट पर बना शिव मंदिर और राजघाट पर चट्‌टान को काटकर बनाए गए हाथी के बारे में बहुत ही कम लोगों को पता है। शिव मंदिर करीब 900 साल पुराना है। वहीं हाथी राजा जयसिंह ने 300 साल पहले बनवाया था, जो कि नदी सूखने पर दिखाई दे रहे हैं।

900 साल पुराना शिव मंदिर, इतिहासकार ने ऐसे की खोज
- इतिहासकार कमरुद्दीन फलक ने बताया जब मैं कक्षा 12वीं में पढ़ाई कर रहा था। तब एक पुरानी किताब के कुछ पेज मेरे हाथ लगे।

- जिसमें पंडित केशरी प्रसाद के हवाला से लिखा था कि ताप्ती नदी में पूरब पश्चिम घाट के मध्य एक विशाल शिव मंदिर है।

- ताप्ती का मार्ग पूरब से पश्चिम की ओर है इसलिए इसे सूर्यपुत्री भी कहा जाता है लेकिन जब बुरहानपुर शुरू होता है तो ताप्ती उत्तर से दक्षिण की ओर बहने लगती है।

- खत्म होता हो तो फिर पूरब से पश्चिम की ओर बहने लगती है। इस प्रकार यह सिद्ध होता है कि बुरहानपुर में पूरब-पश्चिम तट है।

- बुरहानपुर में ताप्ती नदी के किनारे पर कुल 13 घाट है। इतने घाट जलगांव, भुसावल व सूरत में भी नहीं है। तब मैंने खोज शुरू कर दी।

- 18 साल पहले गर्मी के मौसम में ताप्ती सूखी हुई थी। तब यह मंदिर मिला। जिस पर शिवलिंग नहीं था नंदी भी क्षतिग्रस्त मिला था जिसे म्यूजियम में जमा कर दिया।

- मंदिर करीब 900 साल पुराना है क्योंकि फारुकी काल से भी पहले का है। उससे पहले शिवपंथी रहते थे। शिवरात्रि पर पानी कम होने से लोग यहां नाव से दर्शन के लिए आते हैं।

जंग में हाथी मारा था उसी की याद में चट्‌टान काटकर बनाया
- देशभक्त, कुशल राजनीतिज्ञ, राजा जयसिंह औरंगजेब के सिपहसालार थे। 1695 में राजा जयसिंह मराठों से जंग जीत कर लौटे लेकिन जंग में उनका हाथी बादल मारा गया।

- ताप्ती नदी के राजघाट पर विशाल चट्‌टान को तराशकर उसे हाथी की शक्ल दी गई, जो कि राजघाट के सामने ही है राजघाट राजा जयसिंह ने बनवाया था।

- इतिहासकारों ने तारीख-ए-फरिश्ता किताब में यह भी लिखा है कि इस चट्‌टान पर शहर आबाद होने से पहले हजरत बुरहानुद्दीन गरीब और हजरत जैनुद्दीन ने नमाज पढ़ी और दुआ की थी कि इस नदी के दोनों ओर शहर आबाद हो जाए।

- यह का पहला बादशाह नासिर खान फारुकी था। जो कि हजरत के मुरीद थे। बाद में यह शहर आबाद हुआ और इसका नाम बुरहानपुर और जैनाबाद पड़ा गया।

- इतिहासकार कमरुद्दीन फलक ने बताया बुरहानपुर को फारुकी बादशाह ने आशा अहीर से लिया था। फारुकियों से पहले आशा अहीर बुरहानपुर का बादशाह था।

- इतिहासकारों के अनुसार आशा अहीर ने भी किसी बादशाह से लिया था लेकिन तारीख में कही लिखा नहीं है।

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Web Title: nadi sukhi to dikhaa 900 saal puraanaa shiv mandir v 300 saal puraanaa haathi dikhaa
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