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जिले में केला उत्पादक: 20 हजार

नुकसानी: 28 गांव के 2500 किसान प्रभावित एक कारण यह भी

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 10, 2018, 02:15 AM IST

जिले में केला उत्पादक: 20 हजार
नुकसानी: 28 गांव के 2500 किसान प्रभावित

एक कारण यह भी

ज्यादा उत्पादन के चक्कर में एक ही टिश्यु वैरायटी का इस्तेमाल करना और कम समय में अधिक फसल लेने की चाहत रखना।

केला फसल को नुकसान| 1 से 6 जून के बीच आई थी आपदा, सर्वे के लिए खेतों में घूम रहे अफसर

वैरायटी बदलने से 9 के बजाय 40 किलो तक के हो गए पौधे, एक के साथ चार गिरे इसलिए बड़ा नुकसान

सदाकत पठान/राजेंद्र चौकसे | बुरहानपुर

जिले में 1 से 6 जून के बीच चली तेज हवा-आंधी से कई गांवों में केले की फसल को भारी नुकसान हुआ है। किसान नुकसानी से सदमे में है तो अफसर खेत-खेत जाकर नुकसानी का आकलन कर रहे हैं। अफसरों का कहना है 10 साल में अब तक का सबसे बड़ा नुकसान इस साल हुआ है। इसका कारण बीज कंपनियों की मनमानी व वैरायटियों में परिवर्तन को माना जा रहा है। कंपनियों की बात में आकर किसान ऐसे बीज लगा रहे हैं, जिनमें प्राकृतिक अापदा से लड़ने की क्षमता नहीं है। ये पौधे हवा-आंधी में औंधे मुहं गिर जाते हैं। यही वजह है बीते साल 52 करोड़ रुपए नुकसान हुआ था, जबकि इस साल आंकड़ा और अधिक हो सकता है।

शाहपुर, फोफनार, इच्छापुर, खकनार, नेपानगर, महाराष्ट्र के अंतुर्ली, रावेर, सावदा सहित लगभग 60 किमी के सर्कल में भी केले की उन्नत खेती 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्र होती है। उद्यानिकी विभाग के अफसरों के अनुसार नुकसान का मुख्य कारण टेक्नोलॉजी है, क्योंकि पहले पौधे 8 से 9 किग्रा होता था लेकिन अब 35 से 40 किग्रा हो गया जिससे पौधा हेल्दी और वजनदार हो गया है। हवा-आंधी में एक पौधा चार को लेकर गिरता है। जिससे नुकसान का आंकड़ा बढ़ जाता है। जिले के 50 प्रतिशत से ज्यादा किसान ग्रेनाइन का माल इस्तेमाल कर रहे हैं। बताया जाता है अभी जो पौधे रोपे जा रहे है उनमें मजबूती नहीं है। पहले श्रीमंती, वसाई, महालक्ष्मी, अर्द्धपुरी, अंबियामोर, बसराई सहित अन्य वैरायटियां चलती थी। इनमें प्रोडक्टशन कम होता लेकिन मजबूती ज्यादा होती थी। टिश्यु कल्चर में प्रोडक्शन ज्यादा होता लेकिन पौधा नरम होता है जो कि टूटता भी गिरता भी है।

क्षेत्र : 15,000 हेक्टेयर में लगाई थी केला फसल

ये देखिए...तेज हवा-आंधी से खेतों में केले की फसल आड़ी हो गई है

बुरहानपुर जिले के शाहपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में केले की फसल को भारी नुकसान हुआ है।

ऐसे समझें: इस बदलाव के कारण हो रहा नुकसान

केले की वैरायटी श्रीमंती, अर्दपुरी, अंिबयामोर, वसाई, ऊंची श्रीमती वह देशी बीज हैं िजससे केला 12-15 महीने में तैयार होकर कटता है। इसे लगाने का समय मई, जून और जुलाई है, लेिकन इसके स्थान पर िकसान कंपनियों के बहकावे में आकर िटश्यू कल्चर के बीज अपना रहे हैं। इसकी समय सीमा कम है यह बीज भी मई, जून और जुलाई में लगता है। इसकी खासियत यह है िक यह वैरायटी जल्द आ जाती है, जो जीनाईन ग्रेनाइल वैरायटी के बनते है। 12 माह में ही फसल कटकर नपती हो जाती है परंतु इससे िकसानों को नुकसान है। ग्रेनाइट वैरायटी के पौधों का वजन ज्यादा होता है। जिसके कारण यह थोड़ी सी आंधी, तूफान में ही आैंधे हो जाते हैं। ग्रेनाइल वेरायटी से फसल उत्पादन तो ठीक रहता है, लेिकन यह प्राकृितक आपदा में िटक नहीं पाते।

2613.. हेक्टेयर में फसल आड़ी हुई

यह जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि बुरहानपुर जिले की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा केले के करोड़ों रुपए के कारोबार पर निर्भर करता है

ये देखिए एेसे भी ठगा जाता है किसान

कृषि व हार्टिकल्चर विभाग से ड्रिप व पौधे की सब्सिडी राशि देरी से आती है। बाजार में ड्रिप का भाव कम होता है जबकि एमपी एग्रो से खरीदते हैं तो मूल्य अधिक होता है।

जानिए...कैसे किसान का पैसा फसल पर होता है खर्च

1 पौधे पर लगभग 75 रु. खर्च, हम्माली-बैंक ब्याज अलग से

प्रति हेक्टेयर में चार से साढ़े चार हजार केले के पौधे लगते हैं। प्रति पौधे पर लगभग 80 से 90 रुपए खर्च आता है। 15 रुपए का पौधा, 10 रु. गोबर खाद, 10 से 15 रु. फर्टिलाइजर, 10 रु. कल्टीवेशन, 10 रु. निंदाई गुड़ाई, 10 रु. एरिगेशन मेंटेनेंस, 10 रु. लगवाई-रोपना, मिट्टी चढ़ाना, 5 से 10 रु. लुंगर बाहर निकालना, हम्माली व बैंक ब्याज आदि खर्च अलग से है। इसमें जमीन का लागत मूल्य शामिल नहीं है। जिले में लगभग 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केले की 80 प्रतिशत से अधिक फसल ड्रिप सिंचाई पद्धति से ली जाती है। पौधों से पौधों की दूरी 5 बाय 5 या 5.50 बाय छह रहती है।

कृषि उपज मंडी में केला नीलाम होने के बाद जब किसान व्यापारी से पैसे मांगता है तो उस पर फिर से भाव कम करने के लिए दबाव बनाया जाता है। इस वजह से किसान का 10 से 20 हजार रुपए प्रति ट्रक का नुकसान होता है।

ये हैं िनर्देश

केला उत्पादक किसानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र के नवीनतम प्रावधानों के तहत अधिकतम मदद दिलाने का प्रयास किया जाए।

प्राकृतिक आपदा से हुई क्षति के लिए फसल बीमा करा चुके किसानों को बीमा राशि का यथाशीघ्र भुगतान कराएं।

(शुक्रवार को प्रभावित किसानों से चर्चा के बाद इंदौर कमिश्नर राघवेंद्रसिंह ने उक्त निर्देश दिए।)

विदेश में भी जाता है यहां का केला

यहां का केला पंजाब, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, जम्मू कश्मीर, ईरान, इराक, तेहरान, पाकिस्तान, सऊदी अरब भी जाता है।

एक बार केला तैयार हो गया तो दो-तीन दिन में काटना जरूरी है नहीं तो फसल खराब हो जाती है।

200 किसानों के केस बने, सर्वे जारी है

बोरगांवखुर्द, लोनी बहादरपुर, इमागिर्द, फतेहपुर गांव के 200 किसानों के खेतों का सर्वे हो चुका है। यहां 25 से 33, 33 से 50 व 50 प्रतिशत से अधिक नुकसानी का आकलन किया गया है। नुकसानी वाली खेतों का सर्वे जारी है। टिश्यु वैरायटी के पौधों का नुकसान ज्यादा हुआ है। सर्वे में भी यह बात सामने आई है। कृषि वैज्ञानिक और उद्यानिकी अधिकारियों से चर्चा करेंगे। काफी बड़ी मात्रा में नुकसान हुआ है जिसके कारणों का भी पता लगा रहे हैं। प्राकृतिक आपदा तो रोक नहीं सकते नुकसान प्रभावित गांवों में अब सर्वे चल रहा है। -सत्येंद्रसिंह, कलेक्टर, बुरहानपुर

6 से 12 माह का वाले पौधों को ज्यादा नुकसान

1 व 6 जून को चली हवा-आंधी से 6 से 12 माह वाले पौधों का ज्यादा नुकसान हुआ है। शासन को तीन केटेगरी में मुआवजा तय करना चाहिए। 0 से 3 महीने में नुकसान कम होगा। इसके बाद 3 से 6 महीने की फसल मेें मध्यम नुकसान होगा। 6 से 12 माह का पूरा नुकसान होगा। इन्हें प्रति हेक्टेयर मुआवजा मिलना चाहिए। -कार्तिकेयसिंह, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र

एक सलाह यह भी...

एक सलाह यह भी...

किसानों को खेतों में केले की सभी वैरायटियां लगाना चाहिए ताकि नुकसानी से बच सके।

कृषि व उद्यानिकी के अफसरांे को किसानों से राय-मशविरा कर समय-समय पर प्रशिक्षण भी कराना चाहिए।

10 साल में पहली बार इतना बड़ा नुकसान

10 साल में पहली बार इतना बड़ा नुकसान हुआ। इससे पहले कभी सुना भी नहीं था। इसकी खास वजह पौधों का वजन बढ़ना हवा आंधी में 30-35 किलो के पौधे वजन संभाल नहीं पाते इस कारण वह आड़े हो जाते है। दूसरा मौसम परिवर्तन पिछले तीन साल से प्री-मानसून के दौरान बुरहानपुर जिले में आंधी तूफान आ रहा है। जो कि पहले कभी नहीं होता था। हवा आंधी भी ऐसी चलती थी जिससे केली व अन्य फसल को नुकसान कम होता था। अब तक बिजली के हाईटेंशन तार उड़ रहे है खंभे उखड़ रहे है। -रामनरेशसिंह तोमर, उपसंचालक, उद्यानिकी।

22हजार केली में से 10 हजार गिर गई

36 एकड़ जमीन में टीशू कल्चर (रोपे) 22 हजार केली लगाई इनमें से 10 हजार आड़ी हो गई। पौधा लगाने में प्रत्येक पर 70-80 रुपए खर्च आया। इनमें से 5 एकड़ का बीमा कराया था। लेकिन अब तक बीमा कंपनी वाले झांकने तक नहीं आए। सोसायटी से कर्ज लेकर पौधे लगाए थे। सरकार से मांग करते है कि प्रत्येक पौधा 100 रुपए मुआवजा दे। -युवराज पाटिल, पीड़ित किसान

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Web Title: जिले में केला उत्पादक: 20 हजार
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