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मांग पत्र देने पहुंचे 8 किसानों को घेरकर खड़े रहे 50 से ज्यादा अफसर-जवान

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर आंदोलन के समर्थन में कलेक्टर को मांग पत्र सौंपने आए जिलेभर के मात्र आठ किसानों को 50...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 03, 2018, 02:30 AM IST

मांग पत्र देने पहुंचे 8 किसानों को घेरकर खड़े रहे 50 से ज्यादा अफसर-जवान
भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

आंदोलन के समर्थन में कलेक्टर को मांग पत्र सौंपने आए जिलेभर के मात्र आठ किसानों को 50 से ज्यादा पुलिस अफसर और जवान घेरकर खड़े हो गए जिन्हें 15 मिनट के अंदर कलेक्टोरेट कार्यालय से अपने-अपने क्षेत्र में रवाना भी कर दिया।

प्रदेशव्यापी 10 दिनी किसान आंदोलन को लेकर प्रशासन और पुलिस बहुत ज्यादा घबराई हुई है। इसके तहत किसान संबंधी किसी भी समस्या या उनके आयोजनों को गंभीरता से ले रही है। जिलेभर में प्रगतिशील, किसान विकास मंच और संघ है, जिन्होंने आंदोलन के नाम पर सिर्फ सांकेतिक समर्थन दिया। प्रगतिशील किसान संगठन ने रैली की अनुमति मांगी थी। इसमें संगठन 100 से ज्यादा किसानों के साथ आने वाली थी लेकिन माहौल बिगड़ने के डर से प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। दूसरे दिन यानी शनिवार को मांग पत्र सौंपने के लिए 50 से ज्यादा किसान एकजुट हुए लेकिन अफसर-जवानों ने एक-एक किसान को समझाइश देकर तो कइयों को मोबाइल पर संपर्क कर घर ,लौटा दिया। इसके बाद मात्र गिनती के आठ से दस किसान बच गए थे। जिन्होंने दोपहर 1 बजे तक प्रशासन को कलेक्टोरेट पहुंचने की सूचना दी। हालांकि उनके आने से पहले ही यहां लालबाग और गणपति नाका थाना का बल तैनात हो गया था।

लालबाग रेलवे स्टेशन पर सांसद नंदकुमारसिंह चौहान और महिला बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस पहुंची। इसमें मौजूद कलेक्टर डॉ. सतेंद्रसिंह जिला मुख्यालय पर किसानों के आने की सूचना मिलते ही कार्यक्रम छोड़कर कलेक्टोरेट पहुंच गए। प्रगतिशील किसान संगठन के आठ समर्थकों ने कलेक्टर को मांग पत्र दिया।

आंदोलन के समर्थन में आए गिनती के किसानों को 50 से ज्यादा पुलिस अफसर-जवान चारों ओर तैनात हो गए।

मांग पूरी कर दो, हम सब बहुत परेशान हैं

संरक्षक शिवकुमार कुशवाह ने कहा उपज का लागत मूल्य और उस पर 50% लाभ देने की अनेक घोषणाओं से हर किसान लाभांवित हुआ। लेकिन चार साल बाद पूरी तरह से निराश हो गया। जिसका परिणाम किसान क्रांति के रूप में दिखा। आंदोलन के माध्यम से किसान अपने हक के लिए प्रयास कर रहा है। इसके लिए हम आगे आए है। अन्नदाता को कोई दबा नहीं सकता लेकिन हम शासन का आदर करते हैं। इसलिए कहते हैं कि मांग पूरी कर दो। क्याेंकि हम सब बहुत परेशान हैं।

लागत मूल्य का 50% मुनाफ दिलाएं

जिलाध्यक्ष रघुनाथ महाजन ने कहा जून माह के पहले दिन आंधी से हजारों के केली के पौधे आड़े हो गए है। जल्द से जल्द खेतों का सर्वे कराया जाए और लागत मूल्य का 50% मुनाफा दिलाए। क्योंकि बैंक, साहुकार और केला ग्रुपों का किसान कर्जदार है। शिवसेना की ओर से भी मुआवजा, फसल बीमा का लाभ दिलाने की मांग की गई। इस दौरान सचिव सतीश पटेल, भूषण पाठक सहित अन्य मौजूद थे।

सब्जी की कम हुई आवक, केला मंडी में तेजी आई

शनिवार को फिर सब्जी मंडी में और ज्यादा आवक घट गई। कुछ-कुछ सब्जियों के दाम 2 से 20 रुपए तक कम हो गए। लेकिन कुछ सब्जियां पहले से और महंगी हो गई। लेवाली की मांग रही। अनाज मंडी में सन्नाटा पसरा रहा। केला मंडी में पहले से तेजी आई। नीलामी में व्यापारियों ने 145 वाहनों पर बोलियां लगाई। दाम न्यूनतम 401 और अधिकतम 996 रुपए तक बिका।

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