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केले पर अनुदान राशि हर पेड़ के हिसाब से दी जाए

कृषक प्रतिनिधियों और राहत आयुक्त व प्रमुख सचिव उद्यानिकी की हुई बैठक में मंत्री चिटनीस ने कहा भास्कर संवाददाता...

Dainik Bhaskar

Jun 05, 2018, 02:35 AM IST
कृषक प्रतिनिधियों और राहत आयुक्त व प्रमुख सचिव उद्यानिकी की हुई बैठक में मंत्री चिटनीस ने कहा

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने बुरहानपुर के कृषक प्रतिनिधियों को साथ लेकर मंत्रालय में प्रदेश के राहत आयुक्त एवं प्रमुख सचिव उद्यानिकी के साथ बैठक की।

इस दौरान केला को अन्य वृक्षों की तरह समाहित करते हुए इस पर राहत राशि प्रति हेक्टेयर के मान से न देकर प्रत्येक पेड़ के हिसाब से देने के लिए विस्तार से चर्चा हुई। इस के लिए राजस्व पुस्तक 6-4 के पद एक (ख) में संशोधन के लिए कृषि कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से करने का आग्रह किया है। चिटनीस ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 1 को शाम 4 बजे से 5 बजे के मध्य आंधी आने व मामूली बारिश के साथ ओले गिरने से फसल को नुकसान हुआ है। प्रभावित ग्राम व क्षेत्रफल के अंतर्गत बुरहानपुर जिले के बिरोदा, पतोंडा, निम्बोला, नसीराबाद, बोरी, निम्ना, उमरदा, सारोला, अम्बाड़ा, जैनाबाद, चिंचाला, एमागिर्द, बोरगांव सहित 14 गांवों के 400 किसानों के लगभग 500-500 हेक्टेयर में नुकसान हुआ है। मंत्री ने कहा कि फलदार पेड़ जैसे संतरा, नीबू, आम, अमरूद आदि को होने वाली क्षति पर अनुदान राशि प्रति पौधे के मान से दिए जाने का प्रावधान राजस्व पुस्तक परिपत्र में विद्यमान है। इनके अतिरिक्त केला, पपीता आदि उद्यानिकी फसलों को होने वाली क्षति पर अनुदान राशि प्रति हेक्टेयर के मान से देने का प्रावधान है। केले की फसल की क्षति पर अनुदान प्रति पौधे के मान से दिए जाने के संबंध में मैंने पूर्व में आग्रह किया है। आपके निर्देश पर राजस्व विभाग द्वारा कृषि फसलों को होने वाली क्षति में प्रति हेक्टेयर की दर में कई गुना वृद्धि की है जिससे किसान लाभान्वित हो रहे हैं। अन्य उद्यानिकी फसलों की तरह केले की फसल में क्षति होने पर प्रति वृक्ष के अनुसार अनुदान राशि का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। केला फसल का क्षति होने पर केले को पेड़ की श्रेणी में मानते हुए राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के पद एक (ख) में सम्मिलित किया जाना है। तथ्यात्मक बिंदु दिखाते हुए कहा बताया कि केला फसल में उर्वरक तथा जल मांग आईसीएआर द्वारा प्रति वृक्ष के अनुसार निर्धारित की जाती है व इसी आधार पर ही कृषकों द्वारा आदानों व जल की पूर्ति की जाती है। केला फसल में लागत लाभ का विश्लेषण प्रति वृक्ष के रूप में किया जाता है। आम, आंवला आदि हेक्टेयर पर लगाए जाते हैं तथा प्रशासन द्वारा इसमें अनुदान प्रति वृक्ष के मान से दिया जाता है। इसी प्रकार केले के पेड़ भी कई हेक्टेयर पर लगाए जाते हैं। प्राकृतिक विपदा के कारण केले में प्रति पेड़ हानि, आम के पेड़ की तुलना में बहुत ज्यादा है, परंतु केले में प्रस्तावित अधिकतम अनुदान मात्र 1 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर है, जो नगण्य है। केला फसल वानस्पतिक रूप से वृक्ष के रूप में वर्गीकृत है।

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