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पिता से प्रेरित हो 14 साल की उम्र में बन गए हाफिज

Burhanpur News - भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर खेलकूद और मौज मस्ती की उम्र में मोहम्मद अबूजर को हाफिज बनने की धुन सवार हो गई। उनके...

Dainik Bhaskar

Jun 05, 2018, 02:35 AM IST
पिता से प्रेरित हो 14 साल की उम्र में बन गए हाफिज
भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

खेलकूद और मौज मस्ती की उम्र में मोहम्मद अबूजर को हाफिज बनने की धुन सवार हो गई। उनके वालिद हाफिज नासिर शहजाद हाफिज-ए-कुरान हैं। इसलिए बेटा भी बचपन से अपने नाम के आगे हाफिज लगाकर अपना परिचय देता। स्कूल की पढ़ाई के साथ अबूजर को हाफिज बनने की एसी धुन छूटी की उसने मात्र 14 साल की उम्र में ढाई साल तक मदरसा की पढ़ाई कर कुरान पाक के 30 पारे (पेज), 323760 हरफ (शब्द), 114 सूरतें, 6666 आयतें सहित पूरा कुरान कंठस्थ याद कर लिया।

अबूजर को इसी साल शेख अली मुत्तकी मदरसा से हाफिज की डिग्री मिली है। उन्होंने इसी साल पहले रमजान से हजरत गुंगे शाह मस्जिद में 10 दिन की तरावीह में शानदार कीरत के साथ कुरान पाक सुनाया। इसके बाद वे शिकारपुरा मस्जिद अकबर अरजानी में छह दिन की तरावीह में समाजजन को कुरान पाक सुना रहे हैं। हाफिज अबूजर हाफिज की डिग्री लेने के बाद आलिम की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा- दीन की तालिम हासिल करने के साथ ही दुनियावी तालिम डॉक्टर बनकर सेवा करने की इच्छा है। अबूजर ने कहा कुरान पाक में अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है जब कुरान पढ़ा जाए तो उसे कान लगाकर सुनो और खामोश रहो कि तुम पर रहम हो।

शहर में सबसे कम उम्र का हाफिज, मदरसा में ढाई साल तक पढ़ाई करने के बाद मिली डिग्री, सुना रहे कंठस्थ कुरान

14 साल के हाफिज मोहम्मद अबूजर बीच में अपने पिता व भाई के साथ।

ऐसे मिली प्रेरणा

अबूजर ने कहा- घर में मम्मी-पापा से अकसर सुनता था कि जो कुरान पढ़ेगा और उसके मुताबिक अमल करेगा, कयामत के दिन अल्लाह तआला उसके मां-बाप को ऐसा ताज पहनाएगा जिसकी रोशनी सूरज की रोशनी से बेहतर होगी। जब मां-बाप को इतनी इज्जत मिलेगी तो कुरान पाक को कंठस्थ याद करने वाले हाफिज की इज्जत का आलम क्या होगा। कुरान पाक की यही बात दिमाग में बैठ गई और स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ ढाई साल पहले मदरसा में दाखिला ले लिया। अबूजर के छोटे भाई मोहम्मद अबूबकर भी हाफिज की तैयारी कर रहे हैं।

ऐसे बनते हैं

हाफिज

कुरान पाक अरबी भाषा में है। इसके एक-एक शब्द को याद करने वाला हाफिज-ए-कुरान कहलाता है। जिन बच्चों को हाफिज बनाना रहता है उन्हें परिजन बचपन से मदरसा में एडमिशन दिलवा देते हैं। डिग्री लेने तक बच्चा मदरसा में ही रहता है। हाफिज बनने के बाद मस्जिद में नमाज पढ़ाना, रमजान माह में तरावी पढ़ाना व बच्चों को मदरसा पढ़ाने के लिए समाजजन हाफिज को पदस्थ करते हैं।

तरावीह की नमाज

रमजान महीने में रोजे के साथ 30 दिन की तरावीह पढ़ना जरूरी है। यह नमाज रात को इशा की नमाज के साथ पढ़ाई जाती है। कई लोग व्यस्थता के कारण 30 दिन लगातार तरावीह नहीं पढ़ पाते हैं इसलिए 10 दिन, सात दिन व छह दिन की तरावीह पढ़कर हाफिज से कुरान पाक सुनते हैं।

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