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जुलाई से नवरात्रि तक महंगा बिकेगा केला

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर जुलाई से नवंबर तक जो केला खेत से निकलकर बाजार जाने वाला था उनमें से ज्यादातर आंधी...

Danik Bhaskar | Jun 13, 2018, 03:20 AM IST
भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

जुलाई से नवंबर तक जो केला खेत से निकलकर बाजार जाने वाला था उनमें से ज्यादातर आंधी में गिर गए। इस कारण नवरात्रि तक केला महंगे दाम पर बिकेगा।

1 व 6 जून को बुरहानपुर जिले में अाई आंधी से केले की 30 प्रतिशत फसल यानी सवा करोड़ पौधे गिर गए। इतना ही नुकसान महाराष्ट्र बार्डर से लगे गांवों में भी हुआ। अब तक 300 करोड़ रुपए नुकसान का आकलन किया जा चुका है। गर्मी के दौरान अप्रैल-मई में केले की डिमांड रहती है साथ ही रमजान माह आने से यह और बढ़ जाती है। रमजान माह लगभग बीतने को है, इसके बाद श्रावण, जन्माष्टमी, नवरात्रि व दीपावली में केले की डिमांड बढ़ जाएगी। बुरहानपुर मंडी में महाराष्ट्र की गाड़ियां भी नीलामी के लिए आती है। 6 जून को आंधी में हुए नुकसान वाले दिन मंडी में 350 से 375 गाड़ियां लगी थी। प्रतिदिन लगभग इतनी ही गाड़ियां मंडी में लगती है। नुकसान के बाद मंडी में गाड़ियों की संख्या कम होकर 250 पर पहुंच गई है। केले की कमी अभी से दिखाई दे रही है क्योंकि मंडी में महाराष्ट्र की गाड़ियां भी नहीं लग रही है।

1 व 6 जून को अाई आंधी से हुआ नुकसान, मंडियों में भी पहुंच रही कम ही गाड़ियां

ग्राम भातखेड़ा और नाचनखेड़ा में जगह-जगह केले खेत के बाहर पड़े हैं जिन्हें मवेशियों के लिए लोग मुफ्त में ले जा रहे हैं।

कल मुख्यमंत्री के आने की संभावना

दो दिन से बुरहानपुर में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के आने के संकेत मिल रहे थे लेकिन फिर भोपाल से दो दिन के लिए उनका दौरा टल गया है। कलेक्टर डॉ. सतेंद्रसिंह ने बताया 14 जून को सीएम के आने की संभावना है। हालांकि उनका प्रशासनिक तौर पर अब तक कोई कार्यक्रम नहीं मिला है। यहां आने पर संभवत: किसानों के लिए घोषणा कर सकते हैं। जो हम प्रस्ताव भेज चुके हैं उसमें निर्णय लेकर मुआवजा में बढ़ोतरी हो सकती है।

मांग : कम से कम लागत जितना खर्च तो मिले

किसान भागवत पाटील ने कहा- एक हेक्टेयर में 4500 पौधे लगाए थे। 3000 हजार आड़े हो गए। सरकार से मांग है कि कम से कम मुआवजा प्रति पौधा 60 से 70 रुपए मिलना चाहिए। अभी तो खेत साफ करने के लिए मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं।

प्रभावित क्षेत्र की फसल देखेंगे मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री जिले में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में नाचनखेड़ा, दापोरा, चापोरा, लोनी या पातोंड़ा के खेतों में प्रभावित फसल देखने आ सकते है। इसको लेकर जिले और संभाग का खुफिया तंत्र अलर्ट हो गया है। पुलिस की ओर से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा चुके हैं। जैसे ही उनका कार्यक्रम तय हो जाएगा, दिन-रात सुरक्षा में पुलिस सहित खुफिया तंत्र नुकसान प्रभावित गांव में तैनात हो जाएगा।

खेतों में सड़ रहा खाड़ी देशों में जाने वाला केला, मवेशी भी नहीं खा रहे

जिले के नाचनखेड़, भातखेड़ा, सिरसौदा, नेर, दापोरा, चापोरा, लोनी बहादरपुर, पातोंडा सहित क्षेत्रों में आड़े हुए केली के पौधों को उठाने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। खेत मालिक इन्हें उठाने के लिए पशुपालकों से संपर्क कर मुफ्त में उठाने का आग्रह कर रहे हैं। फिर भी कोई नहीं आ रहा। यह केला बुरहानपुर से पंजाब, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, यूपी आदि देशों में जाता है, जिसे अब मवेशी भी नहीं खा रहे।

फायदा व घाटे का गणित

केले का व्यापार फायदे एवं नुकसान का गणित निश्चित नहीं है। 500 से लेकर 1800 रुॅ के बीच व्यापार होता है। राज्यों के हिसाब से क्वालिटी सप्लाय होती है। इसमें मंडी टैक्स 1%, 30 रु. क्विंटल केला ग्रुप कमीशन, ट्रांसपोर्ट खर्च, गाड़ी भाड़ा, पैकिंग खर्च, हम्माली खर्च व्यापारियों को लगते हैं। तब जाकर केला दूसरी मंडी में पहुंचता है।