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3 माह का पांच करोड़ रुपए का भुगतान अटका

भावांतर भुगतान योजना: फरवरी, मार्च और अप्रैल में 2168 किसानों से खरीदी थी 31962 क्विंटल तुअर भास्कर संवाददाता |...

Dainik Bhaskar

May 16, 2018, 03:20 AM IST
भावांतर भुगतान योजना: फरवरी, मार्च और अप्रैल में 2168 किसानों से खरीदी थी 31962 क्विंटल तुअर

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना के तहत रेणुका कृषि उपज मंडी प्रबंधन द्वारा खरीदी गई तुअर का तीन महीने का सवा पांच करोड़ रुपए भुगतान मप्र सरकार के पास अब तक अटका हुआ है। जबकि फरवरी माह की डिमांड भेज चुके है। मार्च की सूची नहीं मिलने से डिमांड नहीं की। अप्रैल माह के तो अब तक मॉडल रेट ही तय नहीं किए। ऐसी स्थिति सरकार के पास बजट की कमी के करण बन रही है।

पिछले साल अक्टूबर महीने में मुख्यमंत्री ने भावांतर भुगतान योजना शुरू की। पहले मंडी प्रबंधन के टैक्स लेकर किसानों को भुगतान किया गया था। टैक्स की राशि खत्म होने के बाद किसानों का भुगतान करने में परेशानी आई। उसके बाद राज्य सरकार ने अलग से बजट तय कर खरीदी शुरू की। लेकिन उसमें से अब तक एक भी किसान का भुगतान नहीं हो पाया है। जब भी किसान मंडी पहुंच रहे है, उन्हें सिर्फ एक ही जवाब मिल रहा है। एक-दो रोज में राशि आ जाएगी। मंडी के खाते में आते ही किसानों के खाते में डाल देंगे। ये कहते-कहते साढ़े तीन महीने बीत गए।

फरवरी माह में मॉडल रेट 1390 रुपए तय हुआ था। इसमें 1225 किसानों ने 18567 क्विंटल तुअर बेची। जिनका 2 करोड़ 58 लाख 8130 रुपए बकाया है। मार्च महीने में मॉडल रेट 1620 रुपए तय हुए। इसमें 502 किसानों ने 7768 क्विंटल तुअर बेची। इनका 1 करोड़ 25 लाख 84 हजार 160 रुपए बकाया है। अप्रैल माह में 441 किसानों ने 5672 क्विंटल तुअर बेच दी। आधा मई महीना बीत चुका है, अब तक अप्रैल माह का मॉडल रेट तय नहीं किया है।

योजना के तहत हर माह बाजार की स्थिति के अनुरूप अलग-अलग मॉडल रेट तय होता है। यदि तय रेट से कम में कोई खरीदी करता है तो उन किसानों को अंतर की राशि देने का प्रावधान है। अब तक सिर्फ अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर और जनवरी का भुगतान हुआ है।

ठप हाेती देख भावांतर से समर्थन मूल्य में बदली चना खरीदी-योजना ठप होते देख अप्रैल से शुरू होने वाली चने की खरीदी को समर्थन मूल्य में बदल दिया गया। जिस कारण पंजीकृत किसानों से 10मई से खरीदी शुरू की गई। प्याज के लगभग 200 किसानों ने पंजीयन कराया है। जिसकी 1 जून से खरीदी की जाना है। लेकिन ये भी फिक्स नहीं।

डिमांड के लिए पोर्टल से मार्च के किसानों की सूची नहीं मिली

पोर्टल पर दर्ज सूची लेकर प्रबंधन ने जांच के बाद फरवरी की डिमांड राज्य सरकार को भेजी थी। इसके बाद उन्हें मार्च महीने के किसानों की सूची अब तक नहीं मिली। जिस कारण तीसरे महीने के भुगतान के लिए डिमांड ही नहीं भेजी गई है। अप्रैल माह की सूची मॉडल रेट तय नहीं होने से अटकी हुई है।


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