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पट्‌टा और तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलेगा बोनस, आदिवासियों को 10 रु. किलो दाल

स्कूल शिक्षा मंत्री शाह ने अफसरों के साथ सीएम के कार्यक्रम की तैयारी की समीक्षा की। 200 करोड़ रुपए के विकास...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 01, 2018, 03:20 AM IST

पट्‌टा और तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलेगा बोनस, आदिवासियों को 10 रु. किलो दाल
स्कूल शिक्षा मंत्री शाह ने अफसरों के साथ सीएम के कार्यक्रम की तैयारी की समीक्षा की।

200 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन होगा

मुख्यमंत्री चौहान 200 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों का शिलान्यास और 15.50 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। इनमें मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित जमाधड़-मेढापानी, पटाजन-रनई, दिदम्दा से ढोलगांव, गुलाई से बोरखेड़ा, दिदम्दा-पिपल्या, आंवल्या-रोशनी-मामाडोह मार्ग पर निर्मित उच्चस्तरीय ब्रिज, पॉलिटेक्निक खंडवा के 50 सीटर कन्या छात्रावास, वनग्राम झींझरी में निर्मित हायर सेकंडरी भवन तथा छैगांव माखन के मंडी प्रांगण का भी लोकार्पण भी करेंगे। इसी तरह 165 करोड़ रुपए की आंवल्या मध्यम परियोजना, अमोदा से टांडा, नाहरमल से नीमसेठी, चीरा खदान से उटावद, किल्लौद से गुरांवा, अाबूद से चमाटी, अटूट भिखारी से जावर, कालमुखी से हीरापुर, देवला से टिटगांव, लछोरा से सेमरूढ, खेड़ी से खार मार्ग तथा पीएचई विभाग की गुलाई, बगमार, टाकली कला और पामाखेड़ी मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल योजना का भूमिपूजन करेंगे।

इन घोषणाओं की संभावना

हरसूद विस क्षेत्र में हो रहे दो जिलों के संयुक्त सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री चौहान द्वारा शिक्षा मंत्री के गृह क्षेत्र के लिए बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। इनमें आदिवासी बहुल खालवा ब्लाक के 40 ग्रामों के लिए इंदिरा सागर जलाशय से उद्वहन सिंचाई, हरदा-खंडवा - होशंगाबाद जिले की प्रस्तावित वृहद मोरंड-गंजाल सिंचाई परियोजना के अलावा इंदिरा सागर बांध परियोजना से प्रभावित किसानों के लिए बड़ी घोषणा संभावित है।

इधर, सीएम के नाम डूब प्रभावितों की पाती

मुख्यमंत्री जी ! डूब से बचे क्षेत्र में कृषि, फूड, पर्यटन की अपार संभावना, प्रभावितों को रोजगार दिलाएं

हरसूद | मुख्यमंत्री जी! हरसूद तहसील के अधिकांश गांव इंदिरा सागर बांध से प्रभावित हैं। जो डूब से बचे हैं वहां कृषि, फूड, पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। डूब से विस्थापित सबसे बड़े शहर हरसूद के विस्थापित आज भी रोजगार के लिए भटक रहे हैं। यहां रेल, सड़क, जमीन, पानी व श्रमिकों की पर्याप्त उपलब्धता है। इसके बावजूद विस्थापन के 14 सालों में यह क्षेत्र औद्योगिक विकास से अछूता है।

5 साल में इंदिरा सागर बांध क्षेत्र में प्रदेश सरकार और आपका ध्यान पर्यटन की दृष्टि से सिर्फ हनुवंतिया टापू पर केंद्रित है। जबकि वहां साल के आधे समय बैक वाटर दूर चला जाता है। ऐसे में दूर-दराज से आए पर्यटकों के मन में प्रदेश पर्यटन को लेकर गलत छवि बन रही है। पुराने हरसूद क्षेत्र में मंत्री शाह की पहल पर आपने 29.6 किमी पिपलानी-ओंकारेश्वर मार्ग की स्वीकृति प्रदान की है। इसमें प्रस्तावित 10 किमी मार्ग बैक वाटर को चीरकर बनाया जाना है। इस स्थान पर बांध में न्यूनतम 245 मीटर जल भराव पर भी सालभर बैक वाटर रहेगा जो पर्यटकों को आकर्षित करेगा।

कृषि और फूड प्रोसेसिंग में संभावना

डूब से बची खाली जमीन पर रिकार्ड तो़ड़ अनाज उत्पादन जिनमें मूंग, चना, गेहूं और सोयाबीन होता है। बांध में अधिकतम जल भराव 263.35 मीटर क्षेत्र की अधिग्रहित जमीन पर बड़े स्तर पर फूड प्रोसेसिंग विकसित किया जा सकता है। इससे न केवल किसानों को सुविधा मिलेगी बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

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