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नए जिला अस्पताल में शिफ्टिंग के समय पुराने में छोड़ी महंगी दवाइयां कचरे में पड़ी

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर नए जिला अस्पताल भवन में शिफ्टिंग के समय जिम्मेदार कर्मचारी पुराने अस्पताल में...

Dainik Bhaskar

Jun 06, 2018, 03:20 AM IST
नए जिला अस्पताल में शिफ्टिंग के समय पुराने में छोड़ी महंगी दवाइयां कचरे में पड़ी
भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

नए जिला अस्पताल भवन में शिफ्टिंग के समय जिम्मेदार कर्मचारी पुराने अस्पताल में महंगी और जरुरी दवाइयां छोड़कर चले आए। जो अब कचरे में पड़ी हुई है। कुछ सरदार वल्लभ भाई पटेल केंद्र के पीछे कमरे में फेंकी है।

जनवरी से नए भवन में शिफ्टिंग शुरू हुई थी। जो मार्च महीने तक चलती रही इस बीच एक-एक वार्ड शिफ्ट किया। माह के अंत तक दवाइयां भी बंटना शुरू हो गई। ऐसे में कुछ दवाइयां जिम्मेदार कर्मचारी पुराने भवन में छोड़ आए। कुछ सरदार वल्लभ भाई पटेल केंद्र में पड़ी हुई थी। मई माह तक पड़ी रहने पर कुछ कर्मचारियों की नजर पड़ी। किसी ओर की नजर न पड़े इसलिए उन्होंने ओपीडी रूम के पीछे फेंक दी। इसके अलावा कुछ दवाइयां पुराने वाले महिला केंद्र में ही पड़ी हुई है। जिसमें से अधिकांश जनवरी माह में ही एक्सपायर हो गई थी। कुछ ऐसी जरुरी और महंगी दवाइयां है जो अगले माह तक चलेगी। जो नए भवन के एसटीआई क्लिनिक में भी उपलब्ध नहीं है। लेखा शाखा के पास भी ढोरों सलाइन की बॉटले पड़ी हुई है। जिसका उपयोग किया जा सकता है लेकिन अफसर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।

सिविल सर्जन डॉ. शकील अहमद ने बताया शिफ्टिंग में रह गई होगी कर्मचारियों ने ध्यान नहीं दिया होगा। मैं दिखवा लेता हूं। जरुरी दवाइयां उपयोग में लेंगे। एक्सपायर को नष्ट करवाएंगे। लापरवाह कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।

पुराने जिला अस्पताल में पड़ी हुई महंगी दवाईयां।

ये दवाइयां पड़ी

एजीथ्रोमाइशिन टेबलेट आईपी 1 ग्राम के 200 से ज्यादा पैकेट पड़े हैं। ये महिला संबंधी यौन रोगों के काम आती है। बाजार में एक पैकेट 120 रुपए का मिलता है। जिसकी अवधि जुलाई 2018 तक है। एजीथ्रोमाइशिन ओरल सस्पेंशन आईपी 200 एमजी, 5 एमएल के एक दर्जन से ज्यादा बॉक्स पड़े मिले। प्रत्येक बॉक्स में 35-35 बॉटल रहती है। जनवरी 2018 में अवधि पूरी हो गई। एस्पीरीन गेस्टरो-रेसीस्टंट टेबलेट आईपी 75 एमजी की 10-10 टेबलेट के एक दर्जन से ज्यादा बॉक्स पड़े हुए है। जो कि रक्त पतला करने के लिए उपयोग की जाती है। जिसकी अवधि जनवरी 2018 को पूरी हो चुकी है। इसके अलावा विभिन्न ड्राप कचरे में पड़े हुए है।

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