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आदिवासियों को वैसे भी उजाड़ रहे, अब सिर फोड़ाे या जेल में डालो, मांगने पर भी वोट नहीं मिलेगा / आदिवासियों को वैसे भी उजाड़ रहे, अब सिर फोड़ाे या जेल में डालो, मांगने पर भी वोट नहीं मिलेगा

Bhaskar News Network

Jun 06, 2018, 03:20 AM IST

Burhanpur News - भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर ग्राम खकनार, बोदरली और नेपानगर रेंज में वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्‌टे पाने के लिए...

आदिवासियों को वैसे भी उजाड़ रहे, अब सिर फोड़ाे या जेल में डालो, मांगने पर भी वोट नहीं मिलेगा
भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

ग्राम खकनार, बोदरली और नेपानगर रेंज में वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्‌टे पाने के लिए सैकड़ों आदिवासी जागृत आदिवासी-दलित संगठन के बैनर तले कलेक्टोरेट कार्यालय पहुंच गए। बुलाने पर भी कलेक्टर उनसे मिलने नहीं आए। करीब आधे घंटे तक सभी बाहर धरने पर बैठे रहे।

जागृत आदिवासी-दलित संगठन प्रमुख माधुरी बेन के साथ 700 से ज्यादा आदिवासी पट्टों के लिए मंगलवार दोपहर 1 बजे कलेक्टाेरेट कार्यालय पहुंचे। जिन्हें पुलिस ने अंदर जाने से रोक लिया। मुख्य दरवाजे के बाद सभी को खड़ा किया। उनकी एकजुटता देखकर जिला प्रशासन घबरा गया। पहले एसडीएम सोहन कनाश समस्या जानने आए। प्रमुख नेता ने कहा दिया हम तो कलेक्टर से बात करेंगे। जिसके बाद एसडीएम ने समस्या पूछी और कलेक्टर डॉ. सतेंद्रसिंह तक पहुंचाई। आधे घंटे इंतजार के बाद कलेक्टर से 8 जून की तारीख मिली। जिसमें सिर्फ पदाधिकारियों को चर्चा करने बुलाया है। संगठन प्रमुख बेन ने चेताया बैठक में कलेक्टर, दोनों एसडीएम, ट्रायबल सहित संबंधित सभी अफसर आने चाहिए। उस दिन ऐसा न हो कि ये नहीं आया और फला अफसर व्यस्त है। जो-जो जिम्मेदार है, वो सभी बैठक में उपस्थित रहे। ये हजारों आदिवासियों का सवाल है।

संगठन प्रमुख माधुरी बेन ने कहा वन अधिकारी अधिनियम जिले में पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। सामुदायिक दवों का तो नाम ही नहीं लिया जा रहा है। पात्र, अपात्र और प्रकरण बनाना ग्राम सभा का हक है। लेकिन वन विभाग मनमर्जी से दावों को अपात्र बता रहा। राजस्व, ट्रायबल अफसर आंख बंद कर हस्ताक्षर कर रहे। वन व्यवस्थापन की प्रक्रिया खत्म होने तक बेदखल नहीं किया जा सकता। लेकिन वन अफसर-कर्मी गुंडागर्दी कर महिला, बूढ़े, बुजुर्गो को बेदखल कर रहे। घर जला रहे, फसल नष्ट कर रहे। प्रशासन मौन रहा है। अप्रैल में नेपा एसडीएम ने कहा आठ दिन, खकनार जनपद सीईओ ने 25 मई और कलेक्टर ने कहा था जल्द सत्यापन शुरू करेंगे। 5 अप्रैल से 15 दिन में सत्यापन पूरा करना था। दो महीने बीत गए कोई जमीन पर उतरा। अब चाहे सिर फोड़ो, जेल में डाल दो, अपना हक हम लेकर रहेंगे। हर चुनाव के पहले बोलते है पट्‌टा बनवा रहे है और झूठे आश्वासन के बल पर नेता बन रहे। अब गांव-गांव में चर्चा है कि अबकी बार हम वोट नहीं देंगे।

संगठन प्रमुख माधुरी बेन ने एसडीएम से कहा वन अधिकार एक्ट जिले में पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।

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