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सवा करोड़ केली के पौधे आड़े, 50 लाख पूरी तरह खत्म, ढाई हजार किसानों का दावा- 40 करोड़ रु. का नुकसान

सदाकत पठान/ राजेंद्र चौकसे | बुरहानपुर/शाहपुर जिले में 1 व 6 जून की शाम चली आंधी से केली के सवा करोड़ पौधे आड़े हो गए।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 08, 2018, 03:20 AM IST

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    सदाकत पठान/ राजेंद्र चौकसे | बुरहानपुर/शाहपुर

    जिले में 1 व 6 जून की शाम चली आंधी से केली के सवा करोड़ पौधे आड़े हो गए। इनमें से 50 लाख पौधे पूरी तरह से खत्म हो गए। लोनी, बहादरपुर, नाचनखेड़ा, भातखेड़ा, चापोरा, दापोरा, अड़गांव, धामनगांव, खामनी, बक्खा सहित 28 गांवों के ढाई हजार किसान प्रभावित हुए हैं। 15 हजार केला रकबा में से 2613 हेक्टेयर की फसल बर्बाद हो गई। किसानों के अनुसार एक हेक्टेयर में लगभग 4 हजार पौधे लगाए जाते हैं। इनकी लागत मूल्य पर पाैधा 80 से 90 रु. आता है। इस अनुमान से करीब 40 करोड़ रु. का नुकसान हुआ है। प्रति हेक्टेयर किसानों का नुकसान 1 लाख 53 हजार 846 रुपए का नुकसान हुआ है।

    शासन द्वारा 25 से 33% प्रभावित फसलों का प्रति हेक्टेयर 15 हजार रु., 33 से 50% नुकसान पर 20 हजार रु. प्रति हेक्टेयर, 50 से ज्यादा प्रतिशत नुकसान पर 30 हजार प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाता है। शाहपुर क्षेत्र के पीड़ित किसानों ने कहा- जो पौधे गिर गए हैं उसका कचरा फेंकने की भी मजदूरी नहीं निकल पाएगी। वहीं पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए मंत्री अर्चना चिटनीस व सांसद नंदुकुमारसिंह चौहान ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह से मुलाकात कर जिले का दौरा करने का आग्रह किया। साथ ही प्रत्येक पौधे के हिसाब से मुआवजा देने की मांग की हैं। शुक्रवार को भी मंत्री व सांसद गांवों का दौरा करेंगे।

    कचरा फेंकने में प्रति हेक्टे. 20 हजार रु. खर्च

    खोड़ (तना) लुंगर (धड़ जो बाहर आ गया) डोबर (जमीन में गढ़ा हुआ) और पील को पूरा निकालकर कचरा एकत्र कर खेत के बाहर फेंकने की लागत पर पौधे की लागत 5 से 6 रुपए पड़ जाती है। एक हेक्टेयर में 4 हजार से ज्यादा पौधे होते है। प्रत्येक पौधे के पांच रुपए के हिसाब से 20 हजार रुपए हेक्टेयर मजदूरी हो जाती है। इसके अलावा एक हजार रुपए रोज ट्रैक्टर किराया अलग से लगता है।

    बीमा कंपनी को आगे अाना चाहिए

    फसल नुकसान होने पर हमेशा शासन ही दौड़ लगाता है जबकि कायदे से बीमा कंपनी के अफसरों को पहले पहुंचना चाहिए। चूंकि कृषि लोन लेते वक्त प्रीमियम राशि काटी जाती है। उसका कोई हिसाब नहीं होता। नुकसान होने पर बीमा कंपनी फ्रंट पर नहीं आती। हालांकि शासन जांच में लग गया है कि कृषि के ऊपर कितने किसानों ने लोन लिया है और बैंक ने प्रीमियम राशि कितनी काटी हैं। बुधवार रात मंत्री ने भी बीमा कंपनी को निर्देश दिए लेकिन गुरुवार तक कोई एक्शन नहीं लिया गया।

    किसानों ने केला फसल सड़क पर फेंकी, डेढ़ घंटे किया चक्काजाम

    बुरहानपुर | गुरुवार सुबह से प्रभावित खेतों का सर्वे करने दल नहीं आने पर ग्राम लोनी के सैकड़ों किसानों का प्रशासन पर गुस्सा फूट पड़ा और आंधी से खराब हुई केला फसल खेतों से उठाकर रावेर रोड पर फेंककर चक्काजाम किया। डेढ़ घंटे तक पुलिस गुजारिश करती रही लेकिन कोई भी जगह से नहीं उठा। दोनों ओर वाहनों की कतार लगी रही। मंत्री चिटनीस के निर्देश के बाद भी खेत तो दूर गांव-गांव तक सर्वे दल नहीं पहुंचा। ऐसे में लोनी क्षेत्र के किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। मौके पर अजाक डीएसपी केपी डेवीड, टीआई डीएस चौहान पहुंचे। टीआई ने अनाउंसमेंट कर किसानों को समझाने की कोशिश की कि बीमार, बुजुर्ग, बच्चे परेशान होंगे। किसान नारेबाजी करते रहे। हम सब एक है, हमारी मांगें पूरी करो। प्रति पेड़ मुआवजा तय करो। रावेर की ओर महाराष्ट्र बार्डर और शहर तरफ बहादरपुर तक जाम रहा। किसानों ने बाइक तक जाने नहीं दी। महिलाएं बसों से उतरकर पैदल लोनी से बहादरपुर पहुंची। कसरावद विधायक सचिन यादव, अपर कलेक्टर रोमानुस टोप्पो, डिप्टी कलेक्टर प्रगति वर्मा, तहसीलदार अनिता चौकोटिया पहुंचे।

    सांसद ने बताई समस्या, सीएम बोले- मैं किसानों के साथ खड़ा हूं

    फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए सांसद नंदकुमारसिंह चौहान भोपाल सीएम हाउस पहुंचे। सीएम शिवराजसिंह चौहान से मुलाकात केला फसलों की जानकारी दी। सीएम ने किसानों के नाम एक संदेश का वीडियो भेजा। उन्होंने कहा-किसान भाइयों और बहनों। मुझे पता चला आंधी से केला फसल प्रभावित हुई है। मैं जानता हूं आप दुखी है। निराश होने की जरुरत नहीं है। हताश मत होना। मैं और सरकार आपके साथ खड़े हैं। हर संभव मदद करेंगे। आरबीसी के नियम के तहत राशि िवतरण प्रारंभ कर रहे हैं।

    महाराष्ट्र के रावेर रोड पर केले फेंककर चक्काजाम कर बैठे किसान।

    आंधी से सबकुछ खाक

    किसान हेमंत पाटील ने कहा- छह हजार पेड़ आड़े हो गए। 1 लाख की फसल पर 5 हजार रु. प्रीमियम ले रहे हैं। दो साल का 10 हजार रुपए प्रीमियम कटाया है। राजू महाजन ने कहा- प्रशासन प्रति पेड़ इकाई से मुआवजा तय करे।

    100 करोड़ रु. का पैकेज दिलाएंगे- यादव

    विधायक सचिन यादव ने कहा- नुकसान से किसान 5-10 साल तक उबर नहीं पाएंगे। बोवनी की जितनी लागत है उतना मुआवजा तो मिलना चाहिए। प्रति पेड़ को इकाई मानना होगा। कर्ज भी माफ करना होगा। हम शासन से मांग करेंगे 100 करोड़ का आर्थिक पैकेज किसानों को दे। आश्वासन पर चक्काजाम स्थगित किया।

    मंत्री चिटनीस ने केंद्रीय कृषि मंत्री को बताई नुकसानी

    महिला बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने प्रभावित क्षेत्रों के किसानों से मिलकर नुकसानी की जानकारी जुटाई। बीमा कंपनी के अफसरों को बुरहानपुर बुलवाकर दावे की कार्रवाई तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए। कहा खेतों में केला फलोद्यान को खड़ा हुआ देखकर मुआवजा आकलन करना कठिन है। उन्होंने सीएम शिवराजसिंह चौहान व केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहनसिंह को नुकसान से अवगत कराया व प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने का अनुरोध भी किया।

    फसल, मकान सहित अन्य नुकसान का आकलन कर डिमांड तैयार की जाएगी। जिसके लिए तीन-चार दिन का समय और लगेगा। डॉ. सतेंद्रसिंह, कलेक्टर

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