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दो साल की तीन करोड़ रुपए से ज्यादा की फीस शिक्षा विभाग में अटकी

आरटीई में प्रवेश का तीसरा सत्र पास आया, अब तक स्कूलों के क्षेत्र का ही सर्वे चल रहा भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर...

Dainik Bhaskar

May 26, 2018, 04:20 AM IST
आरटीई में प्रवेश का तीसरा सत्र पास आया, अब तक स्कूलों के क्षेत्र का ही सर्वे चल रहा

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेशित गरीब बच्चों की दो साल की फीस अब तक निजी स्कूलों को नहीं मिल पाई है। शिक्षा विभाग के खातों के उनके तीन करोड़ रुपए से ज्यादा फीस अटकी है। जिसको लेकर इस बार निजी स्कूल संचालक विरोध के मूड़ में दिख रहे हैं।

दरअसल हर साल नि:शुल्क प्रवेश के अंत में स्कूलों की सीटों का सत्यापन होता है। जिसमें गरीब बच्चों की स्थिति देखी जाती है। यदि सालभर स्कूल में पढ़कर आगे बढ़े तो उसकी फीस तय कर खातों में भेजी जाती है। वर्ष 2016-17 में 110 स्कूलों में 6983 बच्चों का प्रवेश हुआ। जिसकी अधिकांश स्कूलों ने जानकारी विभाग को भेजी। इसमें से सिर्फ चार ही स्कूलों की प्रतिपूर्ति कर पाए हैं। इस साल 2017-18 के लगभग 7 हजार बच्चों की भी जानकारी भेज चुके हैं। कुछ स्कूलों की जानकारी विभाग को जुटाकर सत्यापन किया जाना है। बाकी अधिकांश का रिकार्ड मिलने पर भी प्रतिपूर्ति बची है।

डीपीसी अशोक शर्मा ने बताया अब आधार, समग्र की जांच हो रही है। कई बच्चों के नाम आधार, समग्र और स्कूलों में अलग-अलग हैं। कईयों के तो अंगूठे ही मैच नहीं हो रहे हैं। जिस कारण सत्यापन में परेशानी आ रही है। पहले स्कूल से सत्यापन करना है। उसके बाद नोडल अफसर जांच करेंगे। उसके बाद डीपीसी आॅफिस रिकार्ड भेजेंगे। जहां से प्रतिपूर्ति के लिए भोपाल भेजेंगे।

नि:शुल्क प्रवेश के लिए इस साल फिर स्कूलों का सीमांकन हो रहा है। अब तक जिलेभर की लगभग 119 स्कूलों के आस-पास के क्षेत्रों का सत्यापन हो चुका है। 40 स्कूलों के सत्यापन के लिए क्षेत्रों की जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट बनाकर कलेक्टर कार्यालय भेजी जाएगी। चयन समिति प्रस्ताव का अनुमोदन करेगी। उसके बाद कलेक्टोरेट, डीईओ, डीपीसी कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर सूची चस्पा होगी। जिस पर स्कूल संचालकों से दावे-आपत्ति बुलाएंगे।

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