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कितनी धूल चढ़ी है, फाइलें भी बिखरी पड़ी, जाले देख लग रहा कितनी सफाई है यहां!

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर कलेक्टर ने पहली बार तहसील और जनपद कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। दोनों कार्यालय...

Dainik Bhaskar

May 26, 2018, 04:20 AM IST
कितनी धूल चढ़ी है, फाइलें भी बिखरी पड़ी, जाले देख लग रहा कितनी सफाई है यहां!
भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

कलेक्टर ने पहली बार तहसील और जनपद कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। दोनों कार्यालय के अधिकांश ऑफिसों में अव्यवस्था मिली। एसडीएम से बोले क्या ये तहसील आफिस है, कितनी धूल चढ़ी है अलमारियों पर, फाइलें भी बिखरी हुई पड़ी हैं। जाले देखकर लग रहा कितनी सफाई होती है।

दरअसल कलेक्टर सत्येंद्रसिंह बीएलओ बैठक के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे। शाम 4 बजे अंदर प्रवेश करते ही अव्यवस्थित वाहनों की पार्किंग से उनका सामना हुआ। जिस कारण तहसील ऑफिस के सामने उनकी कार पहुंच नहीं पाई, उन्हें पेड़ के पास उतरना पड़ा और बाद में ड्राइवर ने कार पलटाकर लगाई। एसडीएम सोहन कनाश पहले से मौजूद थे। उन्होंने तहसीलदार का कोर्ट दिखाया। डेस्क पर पहुंचकर बैठक व्यवस्था देखी। पीछे खिड़की से बाहर झांका और टूटे कांच देखे बोले अपशगुन है ये, कितने साल से देखा ही नहीं होगा, जल्द से जल्द बदल दो इन्हें। निरीक्षण करते हुए कलेक्टर बाहर निकले और बोले तो ये तहसील आफिस है। यहां बोर्ड लगा न कोई नेम प्लेट, बाहर से पता ही नहीं चलता तहसीलदार बैठते होंगे यहां। बोर्ड पर लिखा होना चाहिए न्यायालय व तहसीलदार। कोर्ट के दरवाजे खुले हुए हैं, चेंबर का दरवाजा लगा दिया। इसे भी खोलकर रखो भाई, जिसे कोर्ट में काम होगा उधर जाएगा, जिसे तहसीलदार से मिलना है, चेंबर के अंदर अलग दरवाजे से जाएगा।

तहसील कोर्ट में कलेक्टर ने एसडीएम सोहन कनाश को टेबल व्यवस्थित रखकर खिड़कियों के कांच बदलने के निर्देश दिए।

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

कलेक्टर ने पहली बार तहसील और जनपद कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। दोनों कार्यालय के अधिकांश ऑफिसों में अव्यवस्था मिली। एसडीएम से बोले क्या ये तहसील आफिस है, कितनी धूल चढ़ी है अलमारियों पर, फाइलें भी बिखरी हुई पड़ी हैं। जाले देखकर लग रहा कितनी सफाई होती है।

दरअसल कलेक्टर सत्येंद्रसिंह बीएलओ बैठक के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे। शाम 4 बजे अंदर प्रवेश करते ही अव्यवस्थित वाहनों की पार्किंग से उनका सामना हुआ। जिस कारण तहसील ऑफिस के सामने उनकी कार पहुंच नहीं पाई, उन्हें पेड़ के पास उतरना पड़ा और बाद में ड्राइवर ने कार पलटाकर लगाई। एसडीएम सोहन कनाश पहले से मौजूद थे। उन्होंने तहसीलदार का कोर्ट दिखाया। डेस्क पर पहुंचकर बैठक व्यवस्था देखी। पीछे खिड़की से बाहर झांका और टूटे कांच देखे बोले अपशगुन है ये, कितने साल से देखा ही नहीं होगा, जल्द से जल्द बदल दो इन्हें। निरीक्षण करते हुए कलेक्टर बाहर निकले और बोले तो ये तहसील आफिस है। यहां बोर्ड लगा न कोई नेम प्लेट, बाहर से पता ही नहीं चलता तहसीलदार बैठते होंगे यहां। बोर्ड पर लिखा होना चाहिए न्यायालय व तहसीलदार। कोर्ट के दरवाजे खुले हुए हैं, चेंबर का दरवाजा लगा दिया। इसे भी खोलकर रखो भाई, जिसे कोर्ट में काम होगा उधर जाएगा, जिसे तहसीलदार से मिलना है, चेंबर के अंदर अलग दरवाजे से जाएगा।

कितना भंगार पड़ा है यहां, निकालकर जला दो इसे

खसरा-नकल शाखा में घुसते ही बोले यहां कितना भंगार है, जो काम के नहीं उन्हें बॉक्स को निकालकर जला दो। क्यों फालतू ढेर लगाकर रखे हो यहां। क्या प्रभाव पड़ता होगा आने वालों पर। पटवारी ऑफिस में भी अलमारियां धूल में दिखी। कलेक्टर ने कहा यहीं से हमारी रोजी-रोटी चलती है, घर समझकर ही सफाई करा लो। इतने कर्मचारी होने पर भी ये हाल। अगली बार ये गंदगी दिखनी नहीं चाहिए।

जनपद कार्यालय देख कलेक्टर ने कहा- सूचना अिधकारी को गए समय हो गया लेकिन नाम नहीं हटा

जनपद कार्यालय के निरीक्षण के दौरान सूचना अधिकारी का बोर्ड देख बोले कभी जनपद सीईओ कौन है, कर्मचारी बोले- अनिल पवार। कलेक्टर बोले ये सूचना अधिकारी कौन है, कितना समय हो गया उन्हें गए, लेकिन उनका नाम यहां से आज भी नहीं हटा। अंदर फाइलें पर धूल चढ़ी है। व्यवस्थित रखते नहीं हो, नीचे भी गंदगी हो गई है। इतने कर्मचारी होने पर भी क्यों ध्यान नहीं देते। उनके जाते ही कर्मचारियों ने शर्मा के नाम पर कागज चिपका दिया।

अलमारी पर कभी कपड़ा मारा नहीं लगता, कितनी धूल है

यहां से उन्होंने लिपिक आॅफिस देखा, घुसते ही अलमारी से कैलेंडर फेंका और बोले अलमारी पर धूल चढ़ी है। उस पर कभी कपड़ा मारा ही नहीं लगता, जगह-जगह फाइलें बिखरी पड़ी हैं, ऐसे क्यों रखते हा़े भाई, अलमारी व्यवस्थित रखो। फाइलों काे उसके अंदर रखो। अलमारियों पर कागज मत चिपकाओ। जिसे कलेक्टर ने निकालकर फेंका।

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