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पानी की तलाश में बुरहानपुर से घाटाखेड़ी के रास्ते आए तेंदुए ने 3 युवकों पर किया हमला; 11 घंटे बाद बेहोश कर पकड़ा

भास्कर संवाददाता | पंधाना (खंडवा) ग्राम बड़ोदा अहिर में बुधवार सुबह 7 बजे पानी व शिकार की तलाश में आए तेंदुए ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 24, 2018, 01:50 PM IST

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    भास्कर संवाददाता | पंधाना (खंडवा)

    ग्राम बड़ोदा अहिर में बुधवार सुबह 7 बजे पानी व शिकार की तलाश में आए तेंदुए ने मवेशी चराने गए बच्चों को देखने जा रहे मोहन पिता प्यारा की पीठ व हाथ पर हमला कर उसे घायल कर दिया। गुस्साए तेंदुए ने दो युवकों गोविंद पिता मांगीलाल व धर्मेंद्र कमलसिंह पर भी हमले किए। गोविंद घायल हो गया लेकिन धर्मेंद्र को मामूली चोट आई है। तेंदुआ संभवत: भूख-प्यास से बेहाल था और नाले के नीचे पाइप के अंदर ठंडक में बैठा था।

    तेंदुए के हमले की खबर फैलते ही गांव के लोग जमा होने लगे। डायल 100 के पुलिसकर्मी भी सायरन बजाते हुए नाले के पास पहुंचते उससे पहले ही तेंदुआ घबराकर लगभग 500 मीटर जाकर बेशरम की झाड़ियों में घुस गया। पहले ग्रामीणों को लगा कि झाड़ियों के अंदर खो होगी, इसलिए वह फंस गया है। इसलिए पुलिस व वन विभाग ने कोई रिस्क नहीं ली, उन्होंने रेस्क्यू टीम को सूचित किया। तब तक टीम बार-बार कभी उस पर बेशरम की झाड़ियों पर जाल बिछाती तो कभी उसे देखने का प्रयास करती। सूचना मिलने पर जिला मुख्यालय से मुख्य वनसंरक्षक मनोज अग्रवाल, बुरहानपुर डीएफओ देवांशु यादव, डीएफओ उत्पादन नरेश कुमार दोहरे, प्रशिक्षु डीएफओ नेहा श्रीवास्तव, एसडीओ सीएस चौहान, खंडवा से सुनील सोमानी, पंधाना के डिप्टी रेंजर शंकर सिंह चौहान सहित वन अमला मौके पर पहुंचा। करीब ढाई साल के 65 किलो वजनी नर तेंदुए को पकड़ने के लिए सुबह 8 बजे से मशक्कत शुरू हुई। लेकिन इसके लिए उसे बेहोश करना जरूरी था। रालामंडल इंदौर से रेस्क्यू टीम बुलवाई गई।

    संक्षिप्त में जाने क्या हुआ

    1. घटना खंडवा से 28 किमी दूर पंधाना तहसील के बड़ोदा अहिर में बुधवार सुबह 7 बजे हुई, शाम 5.38 बजे पकड़ा, टंट्या भील (मामा) की जन्मस्थली है गांव

    2. रालामंडल इंदौर से आई रेस्क्यू टीम ने ढाई साल के 65 किलो के नर तेंदुए के वजन के हिसाब से सीरिंज में डाली दवा और ट्रैंकुलाइजर गन से शूट किया

    3. पिंजरे में बंद कर तेंदुए को चांदगढ़ वन रेंज भेजा, जहां से बोरियामाल के जंगल में उसे छोड़ा जाएगा, तबियत का भी रखा जा रहा है ख्याल

    जंगल में नहीं मिल रहा शिकार इसलिए गांव की ओर रूख किया

    पंधाना के डिप्टी रेंजर शंकरसिंह चौहान और तेंदुए को पकड़ने में अहम भूमिका निभाने वाले वनरक्षक मयंक चौबे और सुरक्षा श्रमिक मलखान रायकवार ने बताया गांव के पास तेंदुआ बुरहानपुर वनमंडल से घाटाखेड़ी के रास्ते यहां पहुंचा है। जंगल में शिकार और पानी नहीं मिलने के कारण वह सुक्ता डेम के पास पहुंचा। तेंदुए को जनवरी-फरवरी में वाइल्ड लाइफ की गणना के दौरान भी ट्रेस किया गया था। करीब 15 दिन पहले भी वह घाटाखेड़ी के पास नजर आया था। कुत्ता इसका पसंदीदा शिकार होता है। शायद इसलिए उसने गांव की ओर रूख किया है।

    तेंदुए से डरकर नहीं बल्कि उसे देखने उमड़ी भीड़, लाठियां भांज खदेड़ा

    रालामंडल इंदौर से रेस्क्यू टीम बुलवाई

    रालामंडल इंदौर से रेस्क्यू टीम बुलवाई गई। अधीक्षक आरसी चौबे, शूटर वनपाल एसएस कटारे, वनरक्षक सोहनलाल दसोदिया, मुरारीलाल धाकड़ ट्रेंकुलाइजर गन, बेहोश करने की केटामिन और जायला जीन दवा लेकर शाम 4.27 बजे मौके पर पहुंचे। पंधाना के पशु चिकित्सक डॉ. के.एस. चौहान और डॉ. दीपक वास्कले से चर्चा कर करीब 65 किलो के तेंदुए के वजन के मान से सीरिंज में दवा लेकर गन के सहारे 5.38 बजे तेंदुए को बेहोश किया। इसके बाद उसे जाल के सहारे उठाकर पिंजरे में रखा। यहां से पहले पंधाना वन चौकी लाया गया। उसे इतनी ही दवा दी गई थी कि बेहोश हो जाए और पिंजरे में बंद किया जा सके। 20 मिनट बाद ही उसे होश आ गया। यहां से उसे चांदगढ़ रेंज ले जाया गया।

    बड़ोदा अहिर में टंट्या भील के स्मारक के सामने रोड पार कर नाले के अंदर घुसकर बैठे तेंदुए ने लगातार तीन लोगों पर हमले किए। यह खबर फैलते ही सैकड़ों लोग उसे देखने के लिए घटनास्थल पर पहुंचने लगे। हमला करने के बाद तेंदुआ 500 मीटर दूर बेशरम की झाड़ियों में घुस गया। डायल 100 के पुलिसकर्मियों व वन विभाग के के सामने बड़ी चुनौती तेंदुए को पकड़ना थी ताकि वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सके लेकिन लोग भी उसे देखने को आतुर थे। ऐसे में कभी वनकर्मी व पुलिस भीड़ को खदेड़ती तो कभी तेंदुए पर नजर रखती। शाम 5.38 बजे जैसे ही तेंदुए को बेहोश किया, वैसे ही भीड़ उसे देखने के लिए टूट पड़ी। मजबूरी में अफसरों को भीड़ को खदेड़ने के लिए लाठियां भांजना पड़ी।

    दवा का नशा उतरते ही पिंजरे में से गुर्राया

    जंगल में नहीं मिल रही खुराक और पानी, कुत्ता है पसंदीदा शिकार।

    15 दिन पहले भी घाटाखेड़ी (पंधाना) के पास दिखाई दिया था तेंदुआ।

    बेहोश करने के लिए केटामिन और जायलाजीन दवा इंदौर से बुलवाई।

    यह भी जानिए

    वनपाल कटारे, जिन्होंने अब तक पकड़े 56 तेंदुए

    तेंदुए को बेहोश करने वाले रालामंडल के वनपाल एसएस कटारे ने इसे पकड़ते ही ‘अब तक 56’ का आंकड़ा छू लिया। इससे पहले वे 55 तेंदुए पकड़ चुके हैं। इसके लिए मप्र शासन की ओर से 2014 में उन्हें राजकीय सम्मान भी दिया जा चुका है। तेंदुए को पकड़ने में वनरक्षक उत्तम सिंह, आशीष शर्मा, हरीश कृष्णे, जयपाल सिंह पंवार, मनोज उपाध्याय सहित अन्य अफसर-कर्मचारियों की अहम भूमिका रही।

    वो जिसे छूकर गुजरी मौत

    मोहन की पीठ व सीने पर पंजा मारा।

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