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मांदल और ढोल की थाप पर थिरके आदिवासी समाजजन, लोककला व संस्कृति का हुआ समागम

एक वर्ष पहले
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होली से एक दिन पूर्व नेहरू स्टेडियम ग्राउंड नेपानगर में भोंगर्या लोकोत्सव 2020 का आयोजन हुआ। आदिवासी लोककला और संस्कृति का यह समागम पांच साल से नेपानगर जागृति कला केंद्र आयोजित कर रहा है। रविवार हाट बाजार होने के साथ ही यहां भोंगर्या हाट भी लगा।

लोकोत्सव में ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में आदिवासी समाजजन यहां पहुंचे। अपनी पारंपरिक संस्कृति, वेशभूषा, हाथ में तीर कमान, मांदल और ढोल लेकर आदिवासी समाजजन नेपानगर पहुंचे। दोपहर 3 बजे लोकोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत हुई। जिले के साथ अन्य जिलों से आए कलाकारों ने जब आदिवासी लोक गीतों का गायन शुरू किया तो मांदल और ढोल की साथ पर मैदान में मौजूद सभी आदिवासी झूम उठे। रंग-बिरंगी सजाए छाते, हाथ में तीर कमान लिए युवाओं ने इसका खूब आनंद लिया। आयोजन में न्यायाधीश नरेंद्र पटेल, एस बघेल, नगर पालिका अध्यक्ष राजेश चौहान, एएसपी महेंद्र तारणेकर एसडीओपी एसआर सेंगर, एसडीएम विशा माधवानी, तहसीलदार सुंदरलाल ठाकुर, नगर पालिका सीएमओ राजेश कुमार मिश्रा मौजूद थे।

हाथ में तीर कमान, मांदल और ढोल लेकर नेपानगर पहुंचे आदिवासी समाजजन

यह भी हुआ : महिलाओं का किया सम्मान

कार्यक्रम में महिला दिवस के उपलक्ष्य में समाज में अपना सकारात्मक योगदान देने वाली महिलाओं का सम्मान किया गया। एसडीएम विशा माधवानी, सपना दलाल सहित अन्य महिलाओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए काफी संख्या में आदिवासी ट्रैक्टर ट्रालियों के माध्यम से नेपानगर पहुंचे। डोंगरगांव, सागफाटा, मांडवा, चांदनी, बाकड़ी सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से आदिवासी यहां पहुंचे।अतिथियों को मंच पर तीर कमान दी गई। जिसे सभी ने एक साथ हाथ में लेकर आदिवासियों का उत्साह बढ़ाया। 55 दलों के लोक कलाकारों को मंच पर बुलाकर नेपानगर जागृति कला केंद्र की ओर से पुरस्कृत किया।

लोकोत्सव में 55 लोक कलाकारों ने दी प्रस्तुति

आयोजक मुकेश दरबार ने बताया जब उत्सव मनाना शुरू किया था तब महज 20-30 लोक कलाकार दल ही यहां आते थे लेकिन इस बार इसकी संख्या 55 तक पहुंच गई। झाबुआ, आलीराजपुर के अलावा खरगोन व अन्य आदिवासी क्षेत्रों से भी यहां लोक कलाकार पहुंचे और आदिवासी संस्कृति के अनुसार मांदल की थाप पर प्रस्तुति दी, जिन्हें अतिथियों की ओर से सम्मानित किया। भोंगर्या हाट तो सुबह करीब 11 बजे से ही शुरू हो गया था लेकिन दोपहर 3 बजे के बाद काफी भीड़ उमड़ी। आदिवासी एक से एक वेषभूषा में नजर आए। महिलाएं, पुरुष रंग बिरंगी वेशभूषा में सेल्फी लेते हुए नजर आए। झाबुआ की तर्ज पर हुए लोक उत्सव को देखने काफी संख्या में लोग पहुंचे। विलुप्त होती जा रही आदिवासी लोक संस्कृति को बचाए रखने तथा लोक कलाकारों को सम्मान, प्रोत्साहन दिलाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जाता है। इस दौरान कोरोना वायरस से बचाव, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और बाल विवाह रोकथाम के संदेश मंच से दिए गए।

मांदल की थाप पर थिरका तो कोई लेता रहा सेल्फी

लोकोत्सव के दौरान कोई मांदल की थाप पर थिरकता नजर आया तो कईं महिला, पुरुष सेल्फी लेते नजर आए। आदिवासी युवक-युवती एक से बढ़कर एक रंगीन पोशाकों में नजर आए। दोपहर 3 बजे से शुरू हुआ कार्यक्रम शाम पांच बजे तक चला। पूरा स्टेडियम ग्राउंड खचाखच भरा हुआ था। नेपानगर व ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में आदिवासी पहुंचे।

अपनी लोक संस्कृति को जीवित रखें : न्यायाधीश

न्यायाधीश नरेंद्र पटेल ने कहा- यह हमारी संस्कृति को जीवित रखने का कार्यक्रम है। झाबुआ, आलीराजपुर सहित देशभर के विभिन्न जगहों पर यह पर्व मनाया जाता है। आदिवासी इस लोक संस्कृति को जीवित रखें। हमें बेटियों को शिक्षित करना है ताकि वह समाज में अच्छा पद हासिल कर सकें। हमें नारी शक्ति का हमेशा सम्मान करना है। न्यायाधीश बघेल ने आदिवासियों को भगोरिया पर्व की शुभकामनाएं दी। एएसपी महेंद्र तारणेकर ने कहा आदिवासी संस्कृति काफी पुरानी है। इससे जानने की जरूरत है। यह विलुप्त न हो इसलिए ऐसे आयोजन होना चािहए।

मंच से तीर कमान चलाते हुए अतिथि।

नेहरू स्टेडियम ग्राउंड में भोंगर्या पर आदिवासी समाजजन की भीड़ उमड़ पड़ी।
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