गेहूं फसल पर समय से पहली आईं बालियां, चने में लग रही इल्ली

Burhanpur News - इस साल किसानों ने मौसम की मार बारह महीनों झेली। कभी भीषण गर्मी ने सभी जलस्रोत सूखा दिए तो कभी लंबे समय तक चली बारिश...

Jan 24, 2020, 08:41 AM IST
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इस साल किसानों ने मौसम की मार बारह महीनों झेली। कभी भीषण गर्मी ने सभी जलस्रोत सूखा दिए तो कभी लंबे समय तक चली बारिश और बेमौसम आंधी-तूफान ने फसलों का बर्बाद कर दिया। अब लंबे समय से बार-बार बदल रहे मौसम के कारण रबी फसलें प्रभावित हो रही हैंं। गेहूं फसल पर समय से पहले ही बालियां आने लगी हैं। वहीं चना फसल पर इल्ली लग रही है। फसलों की यह स्थिति देखकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। रूआंसे किसानों ने बताया यही हाल रहा तो उत्पादन प्रभावित होगा। ऐसे में लागत निकलने को लेकर भी संशय है।

इस साल बारिश लंबे समय तक चली। इसके खत्म होने के बाद से ही मौसम बार-बार बदल रहा है। नवंबर और आधे दिसंबर तक गेहूं-चने की बोवनी करने वाले किसानों को आएदिन बदलते मौसम ने परेशानी में डाल दिया है। गेहूं फसल पकने के दौरान इसकी ऊंचाई करीब चार फीट तक रहती है। लेकिन इस साल बदलते मौसम के कारण एक से डेढ़ फीट की होने पर ही फसल पर बालियां लगने लगी हैं। ऐसे हम पहली बार देख रहे हैं। इस साल खरीफ की फसल बर्बाद होने के बाद किसानों ने बड़ी उम्मीदों के साथ खरीफ फसल की बोवनी की थी। लेकिन मौसम इन उम्मीदों को भी जमींदोज कर रहा है। इस साल गेहूं का रकबा पिछले साल की उपेक्षा दोगुना हो गया है। पिछले साल करीब ढाई हजार एकड़ में गेहूं फसल लगाई गई थी। इस साल पांच हजार एकड़ में इसकी बोवनी की गई है। लेकिन यह फसल भी मौसम के कारण प्रभावित हो रही है। किसानों ने कहा गेहूं फसल करीब चार महीने में तैयार होती है। लेकिन इस साल डेढ़-दो महीने में ही इस पर बालियां आ गईं हैं।

मौसम में बदलाव के कारण गेहूं फसल पर समय से पहले बालियां आ गई हैं।

चना फसल पर छिड़क रहे दवा

क्षेत्र में इस साल चना फसल का रकबा भी बढ़ा है। पिछले साल करीब दो हजार एकड़ में चना फसल की बोवनी की गई थी। इस साल इसकी बोवनी करीब पांच हजार एकड़ में की गई है। लेकिन बदलते मौसम के कारण इस पर भी इल्लियों का प्रकोप बढ़ गया है। किसान इससे फसल बचाने के लिए दवा का छिड़काव कर रहे हैं। हालांकि दिसंबर के अंत और जनवरी के पहले हफ्ते गेहूं की बोवनी करने वाले किसानों की फसल फिलहाल प्रभावित नहीं हो रही है। किसान सत्तू धनगर, रामदास महाजन और रूपेश इंगले सहित अन्य किसानों ने बताया रबी फसल के लिए ठंड का एक जैसा मौसम रहना चाहिए। लेकिन इस साल तापमान में लगातार घट-बढ़ हो रही है। इसका सीधा असर फसलों पर पड़ रहा है।

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