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जांच रिपोर्ट में स्पष्ट : घटना के समय दरवाजा अंदर से बंद था, हत्या का मामला नहीं बनता

एक वर्ष पहले
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कामिनी दहेज हत्याकांड : 21 फरवरी 2019 को होना थी अंतिम बहस, एक साल बाद अब 12वीं तारीख शनिवार को शुरू हुई बहस में बचाव पक्ष से अधिवक्ता ने कहा

चर्चित कामिनी दहेज हत्याकांड पर एक साल बाद अब अंतिम बहस शुरू हो पाई है। पहले चरण में बचाव पक्ष से अधिवक्ता सिर्फ धारा 302 पर आंशिक रूप से यह दलील दे पाए कि पूरे प्रकरण की वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि घटना के समय दरवाजा अंदर से बंद था। ऐसे में हत्या का मामला नहीं बनता है।

न्यायाधीश वीरेंद्रकुमार पाटीदार पूरा पक्ष भी नहीं सुन पाए और न्यायालयीन समय खत्म होने में आ गया। ऐसे में अदालत ने अंतिम बहस सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी। अब लगातार हर रोज इस मामले पर बहस सुनी जा सकती है।

शनिवार सुबह 11 बजे अंतिम बहस के लिए अभियुक्त पति अनूप मालवीय, जेठ आनंद चौकसे, जेठानी मंजूषा चौकसे, चाचा ससुर अनिल मालवीय, चाची सास भारती मालवीय पहुंचे। न्यायालयीन व्यस्तता के कारण चाय काल समाप्ति के बाद शाम करीब 4.30 बजे दोनों पक्षकार और अधिवक्ताओं की मौजूदगी में बहस शुरू हुई। 4.55 बजे तक चली बहस में बचाव पक्ष के अधिवक्ता हेमेंद्र गोविंदजीवाला ने दलील दी कि धारा 302 में फरियादी पक्ष की जो शिकायत है कि पहले हमारी लड़की को मारा और फिर एक कमरे में जला दिया गया। डॉक्टरी परीक्षण और वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट देखेंगे तो उसमें बताया है कि घटना के समय दरवाजा अंदर से लगा हुआ था। ऐसे में हत्या का मामला बनता ही नहीं है। शरीर पर हिंसा के निशान भी नहीं मिले थे। उसी दिन पुलिस ने भी जांच में यहीं पाया था। इस दौरान मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता गोविंदजालवाला के सहयोगी अधिवक्ता कस्तूरचंद टाक, जोहेर हुसैन, एवी खान, संतोष देवतोले, जीतेश दलाल, धीरज दलाल, आदित्य शर्मा, फरियादी पक्ष से जिला अभियोजक दिनेश शंखपाल, अधिवक्ता असलम खान, मनाेज अग्रवाज, अशोक साल्वे भी मौजूद थे।

कामिनी

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